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कैंची धाम: दो पहाड़ियों के बीच बाबा नीम करोली महाराज का पवित्र आश्रम, लाखों भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र

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कैंची धाम: दो पहाड़ियों के बीच बाबा नीम करोली महाराज का पवित्र आश्रम, लाखों भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र

सारांश

दो पहाड़ियों के बीच कैंची के आकार की घाटी में बसा कैंची धाम — बाबा नीम करोली महाराज की साधना भूमि — 1964 से लाखों भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर वीडियो साझा कर इस दिव्य धाम के दर्शन का आह्वान किया।

मुख्य बातें

श्री कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में भवाली-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित है।
आश्रम की स्थापना नीम करोली बाबा ने की थी; आधिकारिक उद्घाटन 15 जून 1964 को हुआ।
धाम दो पहाड़ियों के बीच कैंची के आकार की घाटी में स्थित है, इसी से इसका नाम पड़ा।
यहाँ का मुख्य मंदिर हनुमान जी को समर्पित है और देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहाँ आते हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर वीडियो पोस्ट कर भक्तों से दर्शन का आह्वान किया।
आश्रम की भूमि स्थानीय निवासी पूर्णानंद ने दान में दी थी; पहले यह स्थान घना जंगल था।

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में भवाली-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित श्री कैंची धाम महज़ एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था, आत्मिक शांति और अटूट विश्वास का जीवंत केंद्र है। यह पावन धाम 20वीं सदी के महान संत नीम करोली बाबा (महाराज जी) की साधना भूमि और कर्मस्थली के रूप में देश-विदेश में विख्यात है। मान्यता है कि बाबा के दरबार से कोई भी भक्त कभी खाली हाथ नहीं लौटता।

कैंची धाम का नामकरण और भौगोलिक विशेषता

स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह धाम दो पहाड़ियों के बीच कैंची के आकार — अर्थात् घुमावदार मोड़ों — वाली घाटी में स्थित है, इसी कारण इसे 'कैंची धाम' कहा जाता है। हरी-भरी वादियों और शांत पर्वतीय परिवेश में बसे इस धाम की अलौकिक ऊर्जा हर उस व्यक्ति को अपनी ओर खींचती है जो जीवन की भागदौड़ से दूर आत्मिक सुकून की तलाश में निकलता है। यहाँ का मुख्य मंदिर हनुमान जी को समर्पित है।

आश्रम की स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कैंची धाम आश्रम की स्थापना 1964 में नीम करोली बाबा द्वारा की गई थी। 15 जून 1964 को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच इस आश्रम का आधिकारिक उद्घाटन हुआ। गौरतलब है कि इस स्थान पर पहले घना जंगल था, जहाँ संत सोमवारी महाराज और प्रेमी बाबा साधना किया करते थे। बाबा नीम करोली ने यहाँ आकर असाधारण आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया और स्थानीय निवासी पूर्णानंद द्वारा दान में दी गई भूमि पर इस आश्रम का निर्माण कराया।

मुख्यमंत्री धामी की श्रद्धा और संदेश

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कैंची धाम का एक विशेष वीडियो साझा करते हुए लिखा, 'नैनीताल जिले में मौजूद कैंची धाम सबसे पूजनीय बाबा नीम करोली महाराज जी की कड़ी तपस्या की पवित्र जगह है और लाखों भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र है। पहाड़ों की शांत घाटियों में बसा यह दिव्य धाम आध्यात्मिक शांति और पॉजिटिव एनर्जी का एक अनोखा अनुभव देता है। नैनीताल आने पर, बाबा नीम करोली महाराज जी के इस पवित्र धाम के दर्शन जरूर करें।' धामी की इस अपील ने धाम की ओर श्रद्धालुओं का ध्यान और अधिक आकर्षित किया है।

आम जनता और भक्तों पर असर

देश के कोने-कोने से और विदेशों से भी श्रद्धालु इस धाम में दर्शन के लिए आते हैं। यह धाम उत्तराखंड के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों में से एक बन चुका है, जो राज्य की धार्मिक पहचान को और सुदृढ़ करता है। यहाँ आने वाले भक्त न केवल पूजा-अर्चना करते हैं, बल्कि इस स्थान की शांत ऊर्जा में मानसिक और आत्मिक शांति भी पाते हैं।

क्या होगा आगे

मुख्यमंत्री धामी के सक्रिय प्रचार-प्रसार और राज्य सरकार की धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की नीति के चलते कैंची धाम आने वाले समय में और अधिक श्रद्धालुओं को आकर्षित करने की संभावना है। यह धाम उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत का एक अनमोल हिस्सा बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बढ़ती भीड़ के साथ बुनियादी ढाँचे और पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान न दिया गया तो इस धाम की वह शांत अलौकिक ऊर्जा — जो इसे विशेष बनाती है — संकट में पड़ सकती है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैंची धाम कहाँ स्थित है और इसका नाम कैसे पड़ा?
कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में भवाली-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह धाम दो पहाड़ियों के बीच कैंची के आकार — यानी घुमावदार मोड़ों — वाली घाटी में बसा है, इसीलिए इसे 'कैंची धाम' कहा जाता है।
कैंची धाम आश्रम की स्थापना कब और किसने की?
कैंची धाम आश्रम की स्थापना 20वीं सदी के महान संत नीम करोली बाबा ने 1964 में की थी। 15 जून 1964 को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच इस आश्रम का आधिकारिक उद्घाटन हुआ था।
कैंची धाम में कौन-सा मुख्य मंदिर है?
कैंची धाम में मुख्य रूप से हनुमान जी का मंदिर है। यह स्थान नीम करोली बाबा की साधना भूमि के रूप में भी जाना जाता है और यहाँ की आध्यात्मिक ऊर्जा देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैंची धाम के बारे में क्या कहा?
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर कैंची धाम का विशेष वीडियो साझा करते हुए इसे 'लाखों भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र' बताया। उन्होंने नैनीताल आने वाले सभी लोगों से इस पवित्र धाम के दर्शन करने का आह्वान किया।
कैंची धाम से पहले इस स्थान पर क्या था?
कैंची धाम से पहले यह स्थान घना जंगल था, जहाँ संत सोमवारी महाराज और प्रेमी बाबा साधना करते थे। बाद में नीम करोली बाबा ने यहाँ आकर आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस की और स्थानीय निवासी पूर्णानंद द्वारा दान में दी गई भूमि पर आश्रम का निर्माण कराया।
राष्ट्र प्रेस
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