24 अगस्त 2026
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कलबुर्गी में यूरिया कालाबाजारी का भंडाफोड़: कापनूर गोदाम से 1,400 बोरी सब्सिडी खाद जब्त

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कलबुर्गी में यूरिया कालाबाजारी का भंडाफोड़: कापनूर गोदाम से 1,400 बोरी सब्सिडी खाद जब्त

सारांश

कलबुर्गी के कापनूर इंडस्ट्रियल एरिया में एक अवैध गोदाम से 1,400 बोरी सब्सिडी यूरिया जब्त की गई। कथित तौर पर किसानों की खाद को टेक्निकल ग्रेड यूरिया की आड़ में उद्योगों को बेचने के लिए रीपैकिंग की जा रही थी। गोदाम सील, संचालक पर मामला दर्ज।

मुख्य बातें

कलबुर्गी के कापनूर इंडस्ट्रियल एरिया में 24 अगस्त 2026 को संयुक्त टीम ने अवैध गोदाम पर छापा मारा।
गोदाम से 1,400 बोरी सब्सिडी यूरिया जब्त; सटीक गिनती अभी जारी है।
सब्सिडी यूरिया को टेक्निकल ग्रेड की सफेद बोरियों में रीपैक कर औद्योगिक उपयोग के लिए बेचे जाने का संदेह।
गोदाम के पास कोई वैध लाइसेंस नहीं ; नाम-पट्टिका भी अनुपस्थित।
गोदाम सील कर दिया गया है और संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज ; जाँच जारी।

कर्नाटक के कलबुर्गी में 24 अगस्त 2026 को कृषि विभाग, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने कापनूर इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक अवैध गोदाम पर छापा मारकर 1,400 बोरी सब्सिडी यूरिया जब्त की। कथित तौर पर इस खाद को किसानों तक पहुँचाने के बजाय दोगुने दाम पर कालाबाजारी के लिए जमा किया जा रहा था और औद्योगिक उपयोग हेतु रीपैकिंग की जा रही थी।

छापे की कार्रवाई और मौके पर मिले सबूत

अधिकारियों को शिकायत मिली थी कि कापनूर इंडस्ट्रियल एरिया के एक अज्ञात गोदाम में बड़ी मात्रा में सब्सिडी वाली यूरिया अवैध रूप से संग्रहीत की जा रही है। इसके बाद कृषि विभाग की सतर्कता शाखा, तहसीलदार और स्थानीय पुलिस की टीम ने संयुक्त निरीक्षण किया। मौके पर तीन-चार अलग-अलग कंपनियों की बोरियाँ मिलीं और सब्सिडी वाली यूरिया को सफेद बोरियों में भरा हुआ पाया गया, जिन पर 'टेक्निकल ग्रेड यूरिया' अंकित था — यह ग्रेड केवल औद्योगिक उपयोग के लिए होता है।

सतर्कता शाखा की सहायक निदेशक का बयान

कृषि विभाग की सतर्कता शाखा की सहायक निदेशक कविता ने बताया, 'हमें शिकायत मिली थी कि यहाँ कुछ अवैध खाद जमा है, जिसमें सब्सिडी वाली यूरिया की बोरियाँ भी हैं। हमें यह भी बताया गया था कि कुछ बोरियों पर सब्सिडी का निशान नहीं है और यूरिया को पूरी तरह से सफेद बोरियों में भरा जा रहा है।' उन्होंने आगे कहा कि गिनती अभी पूरी नहीं हुई है, लेकिन जब्त माल 1,000 से अधिक, लगभग 1,400 बोरी है।

कविता ने स्पष्ट किया कि इस गोदाम के पास कोई वैध लाइसेंस नहीं है और गोदाम पर कोई नाम-पट्टिका तक नहीं लगी है। उनके अनुसार, 'जो यूरिया किसानों को दी जानी चाहिए, उसकी यहाँ इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए रीपैकिंग हो रही थी।'

गोदाम की अवैध प्रकृति और रीपैकिंग का संदेह

जाँच में सामने आया कि सब्सिडी वाली यूरिया — जो केंद्र सरकार की कृषि सहायता योजना के तहत किसानों के लिए रियायती दर पर उपलब्ध कराई जाती है — को टेक्निकल ग्रेड की आड़ में उद्योगों को बेचा जा रहा था। यह प्रक्रिया न केवल किसानों को उनके हक से वंचित करती है, बल्कि सरकारी सब्सिडी तंत्र का दुरुपयोग भी है। गौरतलब है कि सब्सिडी यूरिया की खुले बाज़ार में बिक्री और रीपैकिंग उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत दंडनीय अपराध है।

प्रशासनिक कार्रवाई और आगे की जाँच

प्रशासन ने गोदाम को सील कर दिया है और गोदाम संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले की विस्तृत जाँच जारी है। अधिकारियों के अनुसार, जब्त स्टॉक की सटीक गिनती और संबंधित आपूर्ति श्रृंखला की पड़ताल की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह यूरिया किन स्रोतों से आई और कहाँ-कहाँ आपूर्ति की जाने वाली थी। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

कृषि सब्सिडी तंत्र की उस व्यापक खामी को उजागर करता है जिसका फायदा बिचौलिए उठाते रहे हैं — सब्सिडी खाद किसान तक पहुँचने से पहले ही उद्योगों की ओर मोड़ दी जाती है। सवाल यह है कि बिना लाइसेंस का यह गोदाम इतने बड़े स्टॉक के साथ इतने समय तक कैसे चलता रहा। जाँच यदि केवल गोदाम संचालक तक सीमित रही, तो आपूर्ति श्रृंखला में ऊपर बैठे असली खिलाड़ी बचे रह सकते हैं।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलबुर्गी में यूरिया कालाबाजारी का मामला क्या है?
कर्नाटक के कलबुर्गी में कापनूर इंडस्ट्रियल एरिया के एक अवैध गोदाम से 24 अगस्त 2026 को 1,400 बोरी सब्सिडी यूरिया जब्त की गई। कथित तौर पर किसानों के लिए आवंटित इस यूरिया को टेक्निकल ग्रेड की आड़ में रीपैक कर उद्योगों को बेचा जा रहा था।
सब्सिडी यूरिया की रीपैकिंग क्यों अवैध है?
केंद्र सरकार किसानों को रियायती दर पर यूरिया उपलब्ध कराती है, जिसे खुले बाज़ार में बेचना या औद्योगिक उपयोग के लिए रीपैक करना उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत दंडनीय अपराध है। इससे सरकारी सब्सिडी का दुरुपयोग होता है और किसान अपनी हकदार खाद से वंचित रह जाते हैं।
छापे में कौन-सी एजेंसियाँ शामिल थीं?
कृषि विभाग की सतर्कता शाखा, तहसीलदार और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। सतर्कता शाखा की सहायक निदेशक कविता ने मीडिया को जानकारी दी।
गोदाम संचालक के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
प्रशासन ने गोदाम को सील कर दिया है और संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। जब्त स्टॉक की सटीक गिनती और आपूर्ति श्रृंखला की जाँच जारी है।
इस मामले से किसानों पर क्या असर पड़ता है?
सब्सिडी यूरिया की कालाबाजारी से किसानों को रियायती दर पर खाद नहीं मिल पाती और उन्हें काले बाज़ार में दोगुने दाम चुकाने पड़ते हैं। खरीफ और रबी सीजन में खाद की कमी सीधे फसल उत्पादन और किसानों की आय को प्रभावित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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