कर्नाटक कांग्रेस संकट: मंत्री मुनियप्पा ने खाद्य मंत्रालय का पदभार लेने से किया इनकार, हाईकमान से न्याय की माँग
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के भीतर असंतोष और गहरा हो गया है। वरिष्ठ मंत्री केएच. मुनियप्पा ने 6 जून 2025 को सार्वजनिक रूप से ऐलान किया कि वे उन्हें सौंपे गए खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग का कार्यभार नहीं संभालेंगे। उन्होंने पार्टी हाईकमान से माँग की है कि पोर्टफोलियो बंटवारे में हुई कथित नाइंसाफी को तत्काल सुधारा जाए।
मुनियप्पा की नाराजगी की वजह
सूत्रों के अनुसार, मुनियप्पा इस बात से नाराज हैं कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पुत्र प्रियांक खड़गे और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के पुत्र यतींद्र सिद्दारमैया को अहम विभाग दिए गए हैं, जबकि उनकी वरिष्ठता की अनदेखी की गई। शुक्रवार को बेंगलुरु ग्रामीण जिले के देवनहल्ली में मुनियप्पा ने कहा, 'पार्टी हाईकमान को नेताओं की सीनियरिटी को समझना चाहिए और पोर्टफोलियो बंटवारे से जुड़ी दिक्कतों को ठीक करना चाहिए। जब तक ऐसा नहीं होता, मैं मुझे सौंपे गए मंत्रालय का पदभार नहीं संभालूंगा।'
हाईकमान से सीधी अपील
मुनियप्पा ने बताया कि उन्होंने यह मामला राहुल गांधी, एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला, केसी वेणुगोपाल, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के संज्ञान में ला दिया है। उन्होंने खड़गे के बारे में कहा, 'वह एक माँ की तरह हैं और उन्हें सभी को साथ लेकर चलना चाहिए था। मुझे उम्मीद है कि वह इस मुद्दे को सुलझाएंगे और ठीक करेंगे।' मुनियप्पा ने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी की व्यक्तिगत आलोचना नहीं करना चाहते, बल्कि पोर्टफोलियो बंटवारे की प्रक्रियागत खामियों पर ध्यान दिलाना चाहते हैं।
रामलिंगा रेड्डी के बाद दूसरा बड़ा झटका
गौरतलब है कि यह कदम वरिष्ठ मंत्री रामलिंगा रेड्डी की नाराजगी के ठीक बाद आया है, जिन्होंने पोर्टफोलियो बंटवारे से असंतुष्ट होकर इस्तीफे का ऐलान किया था। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक कैबिनेट का पुनर्गठन पहले से ही विवादों में घिरा हुआ था। दो वरिष्ठ मंत्रियों के एक साथ मुखर होने से शिवकुमार सरकार पर आंतरिक दबाव काफी बढ़ गया है।
मुनियप्पा का राजनीतिक कद
सात बार सांसद रहे और देवनहल्ली से मौजूदा विधायक मुनियप्पा दलित समुदाय से आते हैं। वे यूपीए सरकारों में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं और कर्नाटक कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। उल्लेखनीय है कि वे इससे पहले भी खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री का पद संभाल चुके हैं, जिससे उनकी नाराजगी और अधिक प्रतीकात्मक हो जाती है।
आगे की राह
अब सभी की निगाहें पार्टी हाईकमान पर टिकी हैं कि वह इस विवाद को कैसे सुलझाती है। यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो कर्नाटक कांग्रेस में यह असंतोष और व्यापक रूप ले सकता है।