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कर्नाटक विधान परिषद: सत्तापक्ष ने सभापति को सौंपा पत्र, विपक्ष पर कार्यवाही बाधित करने का आरोप

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कर्नाटक विधान परिषद: सत्तापक्ष ने सभापति को सौंपा पत्र, विपक्ष पर कार्यवाही बाधित करने का आरोप

सारांश

कर्नाटक विधान परिषद में सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं — दोनों एक-दूसरे पर व्यवधान का आरोप लगा रहे हैं। चार दिनों से प्रश्नकाल और शून्यकाल ठप है, जबकि राज्य भीषण सूखे जैसे संकट से जूझ रहा है और जनहित के मुद्दे संसद के पटल तक नहीं पहुंच पा रहे।

मुख्य बातें

कर्नाटक विधान परिषद के सत्तापक्ष सदस्यों ने 21 अगस्त को सभापति सलीम अहमद को औपचारिक शिकायत पत्र सौंपा।
विपक्ष के लगातार चार दिनों के विरोध-प्रदर्शन से प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव सहित सभी विधायी कार्य बाधित हैं।
पूर्व मुख्य सचेतक और एमएलसी इवान डी'सूजा ने भीषण सूखे , मालनाड में मानव-वन्यजीव संघर्ष और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट जैसे मुद्दों पर चर्चा न हो पाने पर चिंता जताई।
कांग्रेस के विधान परिषद सदस्यों ने BJP पर जनजातीय कल्याण मामले में कथित संलिप्तता को लेकर मंत्री बी.
नागेंद्र के इस्तीफे की मांग करते हुए विधानसभा की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।
सत्तापक्ष ने सभापति से विपक्षी सदस्यों के आचरण पर उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।

कर्नाटक विधान परिषद में सत्तारूढ़ दल के सदस्यों ने 21 अगस्त को सभापति सलीम अहमद को औपचारिक शिकायत पत्र सौंपा, जिसमें आरोप लगाया गया कि विपक्षी सदस्यों के लगातार चार दिनों के विरोध-प्रदर्शन और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही पूरी तरह ठप हो गई है। सत्तापक्ष का कहना है कि इस व्यवधान से जनहित के अहम मुद्दे परिषद में उठाने का अवसर नहीं मिल पा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

पत्र में सत्तापक्ष के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि विपक्ष के विरोध के चलते प्रश्नकाल, शून्यकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य विधायी कार्य नहीं हो पा रहे हैं। पूर्व मुख्य सचेतक और एमएलसी इवान डी'सूजा सहित अन्य सदस्यों ने कहा कि कर्नाटक की जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की राह बंद हो गई है।

सदस्यों ने बताया कि राज्य इस समय भीषण सूखे का सामना कर रहा है, लेकिन लगातार व्यवधानों के कारण परिषद में सूखे का मुद्दा नहीं उठाया जा सका और केंद्र सरकार से आवश्यक वित्तीय सहायता की मांग भी नहीं की जा सकी।

जनता से जुड़े मुद्दे अटके

सत्तापक्ष के सदस्यों ने कहा, 'लोग सूखे के प्रभाव से परेशान हैं। हम इस मुद्दे पर सदन में चर्चा किए बिना सीधे जनता के बीच नहीं जा सकते।' उन्होंने मालनाड क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष, कस्तूरीरंगन रिपोर्ट, पेयजल संकट, किसानों की समस्याएं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का अवसर देने की मांग की।

सदस्यों के अनुसार इन विषयों पर कई प्रस्ताव पहले ही दिए जा चुके हैं, परंतु निरंतर व्यवधानों के कारण उन्हें अवसर नहीं मिल रहा और सदन का बहुमूल्य समय बर्बाद हो रहा है।

सत्तापक्ष की मांग

सत्तापक्ष के सदस्यों ने सभापति सलीम अहमद से अनुरोध किया कि विपक्षी सदस्यों के आचरण पर उचित कार्रवाई की जाए और विधायी कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि विपक्ष का यह व्यवहार सदन की कार्यप्रणाली के सर्वथा विरुद्ध है।

विपक्ष का पक्ष

दूसरी ओर, शुक्रवार को कर्नाटक कांग्रेस के विधायक और विधान परिषद सदस्य भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पर उतर आए। उन्होंने BJP पर आरोप लगाया कि वह जनजातीय कल्याण मामले में कथित संलिप्तता को लेकर योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग करते हुए विधानसभा की कार्यवाही बाधित कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों पक्ष एक-दूसरे पर व्यवधान का आरोप लगा रहे हैं, जिससे कर्नाटक विधानमंडल का सत्र गतिरोध में फंसा हुआ है।

आगे क्या

गौरतलब है कि सभापति को सौंपी गई शिकायत के बाद अब यह देखना होगा कि सलीम अहमद विपक्षी सदस्यों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कदम उठाते हैं या सर्वदलीय बैठक बुलाकर गतिरोध तोड़ने की कोशिश करते हैं। राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति को देखते हुए विधायी चर्चा की आवश्यकता और भी बढ़ गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मानव-वन्यजीव संघर्ष और पेयजल संकट जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। विडंबना यह है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर व्यवधान का आरोप लगाते हुए स्वयं उसी का हिस्सा बन रहे हैं। जनजातीय कल्याण मामले में मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग वैध हो सकती है, लेकिन इसके लिए पूरे सत्र को बंधक बनाना कर्नाटक की जनता के साथ अन्याय है। सभापति के सामने असली परीक्षा यह है कि वे किसी एक पक्ष के दबाव में आए बिना सदन की गरिमा और कार्यवाही दोनों को बहाल कर सकते हैं या नहीं।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक विधान परिषद में कार्यवाही क्यों बाधित हो रही है?
विपक्षी सदस्यों के लगातार चार दिनों के विरोध-प्रदर्शन और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही ठप है। सत्तापक्ष का आरोप है कि इससे प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव सहित सभी विधायी कार्य नहीं हो पा रहे हैं।
सत्तापक्ष ने सभापति को क्या मांग की है?
सत्तापक्ष के सदस्यों ने सभापति सलीम अहमद को 21 अगस्त को शिकायत पत्र सौंपकर विपक्षी सदस्यों के आचरण पर उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई और विधायी कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
कर्नाटक विधान परिषद में कौन-से जनहित के मुद्दे नहीं उठ पाए?
व्यवधानों के कारण राज्य में भीषण सूखे की स्थिति, केंद्र से वित्तीय सहायता की मांग, मालनाड क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष, कस्तूरीरंगन रिपोर्ट, पेयजल संकट, किसानों की समस्याएं और शिक्षा से जुड़े मुद्दे परिषद में नहीं उठाए जा सके।
कांग्रेस ने BJP पर क्या आरोप लगाया है?
कांग्रेस के विधान परिषद सदस्यों ने BJP पर आरोप लगाया कि वह जनजातीय कल्याण मामले में कथित संलिप्तता को लेकर योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग करते हुए विधानसभा की कार्यवाही बाधित कर रही है।
इवान डी'सूजा कौन हैं और इस मामले में उनकी क्या भूमिका है?
इवान डी'सूजा कर्नाटक विधान परिषद के पूर्व मुख्य सचेतक और एमएलसी हैं। उन्होंने सत्तापक्ष की ओर से सभापति को सौंपे गए शिकायत पत्र में प्रमुख भूमिका निभाई और सदन में जनहित के मुद्दों पर चर्चा न हो पाने पर चिंता जताई।
राष्ट्र प्रेस
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