फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे बेलगावी के डॉ. दिनेश भटकल ने घर पर गोली मारकर जीवन समाप्त किया
सारांश
मुख्य बातें
बेलगावी में 22 मई 2026 को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब केएलई संस्थान के वरिष्ठ प्रशासक डॉ. दिनेश भटकल ने अपने घर की गैलरी में खुद को गोली मारकर जीवन समाप्त कर लिया। पुलिस के अनुसार, डॉ. भटकल पिछले चार महीनों से फेफड़ों के कैंसर का इलाज करवा रहे थे और असहनीय शारीरिक पीड़ा से गुज़र रहे थे।
घटनाक्रम का विवरण
डॉ. दिनेश भटकल मूल रूप से कारवार जिले के अंकोला शहर के निवासी थे और हाल ही में बेलगावी में बस गए थे। वह केएलई संस्थान के साथ 40 वर्षों तक जुड़े रहे और संस्थान द्वारा संचालित अस्पताल में प्रशासक के पद पर कार्यरत थे। शुक्रवार की सुबह वह अपने घर की गैलरी में गए और अपने सिर में गोली मार ली।
पुलिस को संदेह है कि बीमारी के कारण हो रही असहनीय पीड़ा को सहन न कर पाने के चलते उन्होंने यह अंतिम कदम उठाया। घटना से पहले उन्होंने व्हाट्सऐप पर दो संदेश भेजे थे।
अंतिम संदेश
पुलिस के अनुसार, डॉ. भटकल ने केएलई के मानद कार्यकारी अध्यक्ष प्रभाकर कोरे और अपने उपचार चिकित्सक डॉ. केरूर को व्हाट्सऐप पर संदेश भेजे। प्रभाकर कोरे को भेजे संदेश में उन्होंने कथित तौर पर लिखा था, 'आपने इन सभी वर्षों में मेरी मदद की है। हालांकि, मैं बहुत ज़्यादा दर्द से गुज़र रहा हूं और इन परिस्थितियों में मैंने यह कठिन निर्णय लिया है। यह मेरा निजी निर्णय है। कृपया मेरे परिवार की मदद करें और शहर के पुलिस आयुक्त को भी सूचित करें।'
पुलिस ने वे संदेश बरामद कर लिए हैं और मामले की जाँच जारी है। डॉ. भटकल अक्सर अपने करीबी मित्रों से भी अपनी तकलीफों के बारे में बात करते थे, जो उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
कर्नाटक में डॉक्टरों की आत्महत्या की बढ़ती घटनाएँ
यह घटना ऐसे समय में आई है जब कर्नाटक में चिकित्सा समुदाय से जुड़ी आत्महत्या की घटनाएँ चिंताजनक रूप से सामने आ रही हैं। 26 अप्रैल को बसावा लेआउट की 23 वर्षीया आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. एम.यू. निकिता ने चित्रदुर्ग जिले के होलालकेरे में आत्महत्या कर ली थी। कथित तौर पर वह एक आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर के साथ अपना नाम जोड़ने वाली अफवाहों से परेशान थीं।
इससे पहले जनवरी 2026 में कारवार जिले के एक अन्य डॉक्टर ने कथित तौर पर अपने घर पर दो-नाली वाली बंदूक से खुद को गोली मारकर जीवन समाप्त कर लिया था। पुलिस के अनुसार, एक बिना पुष्टि वाले वायरल वीडियो — जिसमें उन पर मरीज को एक्सपायर्ड दवा देने का आरोप था — के बाद सोशल मीडिया पर हुई तीखी आलोचना ने उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला था। उस आरोप की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।
आम जनता और चिकित्सा समुदाय पर असर
गौरतलब है कि यह तीसरी ऐसी घटना है जो कर्नाटक में चिकित्सकों के मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक दबाव की गंभीर स्थिति को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि गंभीर बीमारी, सामाजिक कलंक और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसे कारक मिलकर चिकित्सा पेशेवरों को मानसिक संकट की ओर धकेल सकते हैं।
पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। डॉ. भटकल के परिवार की सहायता के लिए केएलई संस्थान से संपर्क किया गया है। यह घटना स्वास्थ्य प्रणाली में कार्यरत पेशेवरों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता तंत्र की आवश्यकता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।