8 जुलाई 2026
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फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे बेलगावी के डॉ. दिनेश भटकल ने घर पर गोली मारकर जीवन समाप्त किया

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फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे बेलगावी के डॉ. दिनेश भटकल ने घर पर गोली मारकर जीवन समाप्त किया

सारांश

बेलगावी में केएलई संस्थान के वरिष्ठ प्रशासक डॉ. दिनेश भटकल ने 22 मई को घर पर गोली मारकर जीवन समाप्त कर लिया। चार महीने से फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे डॉ. भटकल ने जाने से पहले संस्थान प्रमुख को व्हाट्सऐप पर संदेश भेजा। यह कर्नाटक में डॉक्टरों की आत्महत्या की तीसरी हालिया घटना है।

मुख्य बातें

दिनेश भटकल , केएलई संस्थान के प्रशासक, ने 22 मई 2026 को बेलगावी में अपने घर पर गोली मारकर जीवन समाप्त किया।
वह पिछले चार महीनों से फेफड़ों के कैंसर का इलाज करवा रहे थे और केएलई अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था।
केएलई के मानद कार्यकारी अध्यक्ष प्रभाकर कोरे और उपचार चिकित्सक डॉ.
केरूर को उन्होंने व्हाट्सऐप पर अंतिम संदेश भेजे।
भटकल ने संस्थान के साथ 40 वर्षों तक काम किया था और मूल रूप से कारवार जिले के अंकोला के निवासी थे।
यह कर्नाटक में चिकित्सा पेशेवरों की आत्महत्या की तीसरी हालिया घटना है — इससे पहले अप्रैल 2026 और जनवरी 2026 में भी ऐसी घटनाएँ हुई थीं।

बेलगावी में 22 मई 2026 को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब केएलई संस्थान के वरिष्ठ प्रशासक डॉ. दिनेश भटकल ने अपने घर की गैलरी में खुद को गोली मारकर जीवन समाप्त कर लिया। पुलिस के अनुसार, डॉ. भटकल पिछले चार महीनों से फेफड़ों के कैंसर का इलाज करवा रहे थे और असहनीय शारीरिक पीड़ा से गुज़र रहे थे।

घटनाक्रम का विवरण

डॉ. दिनेश भटकल मूल रूप से कारवार जिले के अंकोला शहर के निवासी थे और हाल ही में बेलगावी में बस गए थे। वह केएलई संस्थान के साथ 40 वर्षों तक जुड़े रहे और संस्थान द्वारा संचालित अस्पताल में प्रशासक के पद पर कार्यरत थे। शुक्रवार की सुबह वह अपने घर की गैलरी में गए और अपने सिर में गोली मार ली।

पुलिस को संदेह है कि बीमारी के कारण हो रही असहनीय पीड़ा को सहन न कर पाने के चलते उन्होंने यह अंतिम कदम उठाया। घटना से पहले उन्होंने व्हाट्सऐप पर दो संदेश भेजे थे।

अंतिम संदेश

पुलिस के अनुसार, डॉ. भटकल ने केएलई के मानद कार्यकारी अध्यक्ष प्रभाकर कोरे और अपने उपचार चिकित्सक डॉ. केरूर को व्हाट्सऐप पर संदेश भेजे। प्रभाकर कोरे को भेजे संदेश में उन्होंने कथित तौर पर लिखा था, 'आपने इन सभी वर्षों में मेरी मदद की है। हालांकि, मैं बहुत ज़्यादा दर्द से गुज़र रहा हूं और इन परिस्थितियों में मैंने यह कठिन निर्णय लिया है। यह मेरा निजी निर्णय है। कृपया मेरे परिवार की मदद करें और शहर के पुलिस आयुक्त को भी सूचित करें।'

पुलिस ने वे संदेश बरामद कर लिए हैं और मामले की जाँच जारी है। डॉ. भटकल अक्सर अपने करीबी मित्रों से भी अपनी तकलीफों के बारे में बात करते थे, जो उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।

कर्नाटक में डॉक्टरों की आत्महत्या की बढ़ती घटनाएँ

यह घटना ऐसे समय में आई है जब कर्नाटक में चिकित्सा समुदाय से जुड़ी आत्महत्या की घटनाएँ चिंताजनक रूप से सामने आ रही हैं। 26 अप्रैल को बसावा लेआउट की 23 वर्षीया आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. एम.यू. निकिता ने चित्रदुर्ग जिले के होलालकेरे में आत्महत्या कर ली थी। कथित तौर पर वह एक आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर के साथ अपना नाम जोड़ने वाली अफवाहों से परेशान थीं।

इससे पहले जनवरी 2026 में कारवार जिले के एक अन्य डॉक्टर ने कथित तौर पर अपने घर पर दो-नाली वाली बंदूक से खुद को गोली मारकर जीवन समाप्त कर लिया था। पुलिस के अनुसार, एक बिना पुष्टि वाले वायरल वीडियो — जिसमें उन पर मरीज को एक्सपायर्ड दवा देने का आरोप था — के बाद सोशल मीडिया पर हुई तीखी आलोचना ने उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला था। उस आरोप की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।

आम जनता और चिकित्सा समुदाय पर असर

गौरतलब है कि यह तीसरी ऐसी घटना है जो कर्नाटक में चिकित्सकों के मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक दबाव की गंभीर स्थिति को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि गंभीर बीमारी, सामाजिक कलंक और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसे कारक मिलकर चिकित्सा पेशेवरों को मानसिक संकट की ओर धकेल सकते हैं।

पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। डॉ. भटकल के परिवार की सहायता के लिए केएलई संस्थान से संपर्क किया गया है। यह घटना स्वास्थ्य प्रणाली में कार्यरत पेशेवरों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता तंत्र की आवश्यकता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर दबाव का स्रोत एक जैसा — यह सवाल उठाती है कि क्या चिकित्सा संस्थान और राज्य सरकार अपने ही डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति पर्याप्त रूप से जवाबदेह हैं। गंभीर बीमारी में दर्द प्रबंधन की सीमाएँ और उपशामक देखभाल (palliative care) की अनुपलब्धता भी इस संकट का एक अनदेखा पहलू है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. दिनेश भटकल कौन थे और उनकी मृत्यु कैसे हुई?
डॉ. दिनेश भटकल बेलगावी स्थित केएलई संस्थान के अस्पताल में प्रशासक थे और संस्थान के साथ 40 वर्षों तक जुड़े रहे। 22 मई 2026 को उन्होंने अपने घर की गैलरी में खुद को गोली मारकर जीवन समाप्त कर लिया। पुलिस के अनुसार, वह पिछले चार महीनों से फेफड़ों के कैंसर के कारण असहनीय पीड़ा से गुज़र रहे थे।
डॉ. भटकल ने मृत्यु से पहले किसे संदेश भेजे थे?
डॉ. भटकल ने व्हाट्सऐप पर केएलई के मानद कार्यकारी अध्यक्ष प्रभाकर कोरे और अपने उपचार चिकित्सक डॉ. केरूर को संदेश भेजे थे। कोरे को भेजे संदेश में उन्होंने कथित तौर पर परिवार की मदद करने और पुलिस आयुक्त को सूचित करने का अनुरोध किया था। पुलिस ने वे संदेश बरामद कर लिए हैं।
क्या कर्नाटक में डॉक्टरों की आत्महत्या की यह पहली घटना है?
नहीं, यह तीन महीनों में कर्नाटक में चिकित्सा पेशेवरों की आत्महत्या की तीसरी घटना है। इससे पहले अप्रैल 2026 में 23 वर्षीया डॉ. एम.यू. निकिता ने चित्रदुर्ग में और जनवरी 2026 में कारवार जिले के एक अन्य डॉक्टर ने आत्महत्या की थी।
पुलिस इस मामले में क्या जाँच कर रही है?
पुलिस ने व्हाट्सऐप संदेश बरामद कर लिए हैं और मामले की जाँच जारी है। पुलिस का संदेह है कि फेफड़ों के कैंसर से होने वाली असहनीय पीड़ा इस कदम का मुख्य कारण रही। अभी तक किसी अन्य व्यक्ति को इस मामले में संदिग्ध नहीं माना गया है।
कर्नाटक में डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए क्या व्यवस्था है?
इन घटनाओं ने चिकित्सा पेशेवरों के लिए संस्थागत मानसिक स्वास्थ्य सहायता की कमी को उजागर किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर बीमारी में उपशामक देखभाल और मनोवैज्ञानिक सहायता की सुलभता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है, हालाँकि इस दिशा में अभी कोई ठोस नीतिगत कदम सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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