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कर्नाटक नकली दवा रैकेट: फाइजर सी-एफ डिपो समेत 8 लाइसेंस निलंबित, ₹5.05 करोड़ की दवाएं जब्त

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कर्नाटक नकली दवा रैकेट: फाइजर सी-एफ डिपो समेत 8 लाइसेंस निलंबित, ₹5.05 करोड़ की दवाएं जब्त

सारांश

बेंगलुरु के बिदादी में ₹5.05 करोड़ के नकली दवा रैकेट का भंडाफोड़ — सस्ती दवाओं को फाइजर जैसे ब्रांड बनाकर बेचा जा रहा था। कर्नाटक FDA ने 16 लाइसेंस रद्द और 8 निलंबित किए, छह राज्यों में जांच जारी। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे की घंटी है।

मुख्य बातें

18 अगस्त 2026 को बेंगलुरु दक्षिण जिले के बिदादी में कर्नाटक FDA की छापेमारी में नकली दवा री-पैकेजिंग रैकेट का पर्दाफाश।
छापे में ₹5.05 करोड़ मूल्य की नकली दवाएं, मशीनरी और प्रिंटिंग सामग्री जब्त; इन्वेंट्री वैल्यू ₹4.91 करोड़ ।
16 दवा लाइसेंस रद्द और 8 निलंबित ; फाइजर सी-एफ डिपो (नेलमंगला, बेंगलुरु ग्रामीण) का लाइसेंस भी निलंबित।
जब्त दवाओं में सक्रिय औषधीय तत्व अनुपस्थित या हानिकारक पदार्थ होने का संदेह; ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत आपराधिक मामला दर्ज।
देश भर के 6 राज्यों में सप्लाई चेन ट्रेस करने के लिए जांच जारी; मामला JMFC कोर्ट, बेंगलुरु दक्षिण में पेश होगा।
स्वास्थ्य विभाग ने उपभोक्ताओं को केवल लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी से वैध इनवॉइस पर दवा खरीदने और संदिग्ध क्यूआर कोड की सूचना देने की सलाह दी।

कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने बेंगलुरु दक्षिण जिले के बिदादी में पकड़े गए नकली दवा रैकेट के बाद बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए फाइजर सी-एफ डिपो सहित 8 दवा लाइसेंस निलंबित और 16 लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। विभाग ने 21 सितंबर 2026 को नागरिकों से आग्रह किया कि वे संदिग्ध पैकेजिंग या नॉन-फंक्शनल क्यूआर कोड वाली दवाओं की तत्काल सूचना ड्रग एनफोर्समेंट अधिकारियों को दें।

छापेमारी और जब्ती का ब्यौरा

18 अगस्त 2026 को कर्नाटक खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (FDA) के ड्रग एनफोर्समेंट विंग ने बेंगलुरु दक्षिण जिले के कुरुबाराकेरानाहल्ली स्थित एक फार्महाउस पर छापा मारा। इस कार्रवाई में कथित तौर पर बिना लाइसेंस के दवाओं की री-पैकेजिंग और री-लेबलिंग का रैकेट उजागर हुआ।

छापेमारी में लगभग ₹5.05 करोड़ मूल्य की नकली दवाएं, मशीनरी और प्रिंटिंग सामग्री ज़ब्त की गई। जब्त सामग्री की इन्वेंट्री वैल्यू लगभग ₹4.91 करोड़ आंकी गई है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, पड़ोसी राज्यों से खरीदी गई सस्ती दवाओं को कथित तौर पर नई शीशियों में दोबारा पैक कर उन पर मल्टीनेशनल कंपनियों — विशेषकर फाइजर — की महंगी जीवन रक्षक दवाओं जैसे लेबल लगाए गए।

नकली लेबल और सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा

अधिकारियों को संदिग्ध नकली लेबल पर क्यूआर और स्कैनिंग कोड मिले, जो जांच करने पर काम नहीं कर रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि जब्त उत्पादों में कोई सक्रिय औषधीय तत्व न होने, गलत सामग्री या संभावित रूप से हानिकारक पदार्थ होने का संदेह है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश में नकली दवाओं की समस्या एक राष्ट्रीय चिंता का विषय बनती जा रही है। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।

लाइसेंस निलंबन और कानूनी कार्रवाई

नकली दवाओं के वितरण और बिक्री में कथित रूप से शामिल खुदरा व थोक विक्रेताओं की जांच के तहत 16 दवा लाइसेंस रद्द और 8 लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। बेंगलुरु ग्रामीण जिले के नेलमंगला तालुक के केम्पलिंगनाहल्ली में स्थित फाइजर सी-एफ डिपो का लाइसेंस भी निलंबित कर दिया गया है।

विभाग ने कर्नाटक FDA पोर्टल पर ज़ब्त दवाओं के बैच नंबर और एंट्री ब्लॉक कर दी हैं ताकि उनकी आगे बिक्री या वितरण पर रोक लगाई जा सके। जब्त उत्पादों के नमूने प्रयोगशालाओं में परीक्षण के लिए भेजे गए हैं, जहाँ उनकी रासायनिक संरचना, स्टेरिलिटी और क्षमता की जांच होगी।

छह राज्यों में जांच का दायरा

ज़ब्त दवाओं, मशीनरी और प्रिंटिंग सामग्री को JMFC कोर्ट, बेंगलुरु दक्षिण के समक्ष पेश किया जाएगा। देश भर के छह राज्यों में पूरी सप्लाई चेन की पहचान और उसका पता लगाने के लिए जांच जारी है, और रैकेट में कथित तौर पर शामिल अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है।

उपभोक्ताओं के लिए स्वास्थ्य विभाग की सलाह

स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार को नागरिकों से अपील की कि वे केवल लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी से वैध टैक्स इनवॉइस के साथ ही दवाएं खरीदें। संदिग्ध पैकेजिंग, लेबल में बदलाव या क्यूआर कोड स्कैन न होने जैसी किसी भी असामान्यता की जानकारी तुरंत ड्रग एनफोर्समेंट अधिकारियों को दी जाए। आगे की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि कोई छिटपुट घटना। असली सवाल यह है कि फाइजर जैसे बड़े ब्रांड के नाम पर इतने बड़े पैमाने पर री-लेबलिंग होती रही और नियामक तंत्र इतने समय तक अनजान रहा — यह निगरानी की विफलता है। जब तक सप्लाई चेन की पारदर्शिता और रियल-टाइम डिजिटल ट्रैकिंग अनिवार्य नहीं होती, ऐसे रैकेट दोबारा सिर उठाते रहेंगे।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक का नकली दवा रैकेट क्या है और यह कैसे काम करता था?
यह बेंगलुरु दक्षिण जिले के बिदादी में संचालित एक गैरकानूनी री-पैकेजिंग नेटवर्क था, जिसमें पड़ोसी राज्यों से खरीदी गई सस्ती दवाओं को नई शीशियों में भरकर फाइजर जैसे मल्टीनेशनल ब्रांड के नकली लेबल लगाए जाते थे। 18 अगस्त 2026 को FDA की छापेमारी में यह रैकेट उजागर हुआ और ₹5.05 करोड़ की सामग्री जब्त की गई।
फाइजर सी-एफ डिपो का लाइसेंस क्यों निलंबित किया गया?
नकली दवाओं के वितरण और बिक्री की जांच के दायरे में बेंगलुरु ग्रामीण जिले के नेलमंगला तालुक स्थित फाइजर सी-एफ डिपो का नाम भी आया, जिसके बाद कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने उसका लाइसेंस निलंबित कर दिया। कुल 8 लाइसेंस निलंबित और 16 रद्द किए गए हैं।
इन नकली दवाओं से स्वास्थ्य को क्या खतरा है?
अधिकारियों के अनुसार जब्त उत्पादों में कोई सक्रिय औषधीय तत्व न होने, गलत सामग्री या संभावित रूप से हानिकारक पदार्थ होने का संदेह है। यदि मरीज जीवन रक्षक दवा की जगह ऐसी नकली दवा लेते हैं तो उनका उपचार विफल हो सकता है या स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुँच सकता है।
उपभोक्ता नकली दवाओं की पहचान कैसे करें और कहाँ शिकायत करें?
स्वास्थ्य विभाग ने सलाह दी है कि दवा खरीदते समय पैकेजिंग, लेबल और क्यूआर कोड जांचें — यदि क्यूआर कोड स्कैन न हो या लेबल संदिग्ध लगे तो तुरंत ड्रग एनफोर्समेंट अधिकारियों को सूचित करें। दवाएं हमेशा लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी से वैध टैक्स इनवॉइस के साथ ही खरीदें।
इस मामले में जांच कितने राज्यों में चल रही है और आगे क्या होगा?
देश भर के छह राज्यों में पूरी सप्लाई चेन का पता लगाने के लिए जांच जारी है। जब्त दवाओं, मशीनरी और प्रिंटिंग सामग्री को JMFC कोर्ट, बेंगलुरु दक्षिण के समक्ष पेश किया जाएगा, और प्रयोगशाला परीक्षण रिपोर्ट आने पर आगे की कानूनी कार्रवाई तेज होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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