कर्नाटक विधानसभा मानसून सत्र 13 अगस्त से, सीएम शिवकुमार ने सूखा राहत के लिए 27 जुलाई को बुलाई सांसदों की बैठक
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 26 जुलाई को घोषणा की कि राज्य विधानसभा का मानसून सत्र 13 अगस्त से शुरू होगा। सत्र में सूखे की गंभीर होती स्थिति और विकास से जुड़े लंबित मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने 27 जुलाई को नई दिल्ली में कर्नाटक के सभी सांसदों की बैठक बुलाई है, जिसका मकसद केंद्र सरकार से सूखा राहत दिलाना है।
बैठक का एजेंडा और स्थान
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने 25 जुलाई को जन प्रतिनिधियों को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि यह बैठक सोमवार, 27 जुलाई को शाम 6:30 बजे IST नई दिल्ली स्थित कर्नाटक भवन-1 (कावेरी) में आयोजित होगी। पत्र पर स्वयं मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर थे और इसे मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी किया गया।
शिवकुमार ने बेंगलुरु में जवाहरलाल नेहरू तारामंडल के निकट राष्ट्रीय सैन्य स्मारक के पास मीडिया से बात करते हुए कहा, 'यह बैठक राज्य में सूखे की स्थिति, अटके हुए प्रोजेक्ट्स और केंद्र का ध्यान आकर्षित करने वाले विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए बुलाई गई है। कर्नाटक का प्रतिनिधित्व करने वाले केंद्रीय मंत्री भी इस बैठक में शामिल होंगे।'
सूखे की गंभीर स्थिति
मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि कर्नाटक इस समय गंभीर सूखे की चपेट में है और कम बारिश ने किसानों व आम नागरिकों के सामने बड़ी चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। उन्होंने कहा कि कई चुने हुए प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार से इस संकट को केंद्र के सामने उठाने का आग्रह किया है।
शिवकुमार ने सभी सांसदों और विधायकों से बैठक में अनिवार्य रूप से शामिल होने का अनुरोध करते हुए कहा, 'मौजूदा सूखे की स्थिति में सभी को मिलकर काम करना होगा। हमें उम्मीद है कि संकट के इस समय में केंद्र सरकार मदद करेगी।' यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में राहत कार्यों और बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए केंद्रीय निधि की माँग लंबे समय से लंबित है।
विपक्ष की रणनीति
कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष और विधायक बीवाई विजयेंद्र ने घोषणा की है कि BJP और जनता दल (सेक्युलर) [JD(S)] मिलकर आगामी विधानसभा सत्र में जनता से जुड़े सभी अहम मुद्दे उठाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्ताधारी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) सरकार को राज्य के लोगों पर असर डालने वाले मामलों पर जवाबदेह ठहराया जाएगा।
गौरतलब है कि विपक्ष का यह संयुक्त मोर्चा मानसून सत्र को सत्तापक्ष के लिए कठिन बना सकता है, खासकर तब जब सूखे की स्थिति और केंद्र से मिलने वाली राहत राशि जैसे संवेदनशील मुद्दे एजेंडे पर हैं।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार का ध्यान अब दो मोर्चों पर एक साथ है — 27 जुलाई की सर्वदलीय बैठक में केंद्र से राहत पैकेज सुनिश्चित करना और 13 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में सूखे से प्रभावित किसानों व नागरिकों के लिए ठोस नीतिगत घोषणाएँ करना। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार केंद्र से सहयोग की कोशिश जारी रखेगी और राहत कार्यों में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।