कर्नाटक में दिव्यांग बच्चों के लिए अर्ली इंटरवेंशन सेंटर सभी जिलों में अगले वर्ष तक स्थापित होंगे
सारांश
Key Takeaways
- कर्नाटक में दिव्यांग बच्चों के लिए डीईआईसी केंद्र स्थापित होंगे।
- स्वास्थ्य समस्याओं की प्रारंभिक पहचान पर जोर।
- केंद्रों में विभिन्न विशेषज्ञ उपलब्ध होंगे।
- सरकार की योजना सभी जिलों में केंद्र स्थापित करना है।
- बच्चों के भविष्य पर सकारात्मक प्रभाव।
बेंगलुरु, १२ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने गुरुवार को यह घोषणा की है कि विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों के लाभ के लिए अगले वर्ष तक राज्य के सभी जिलों में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत जिला अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीईआईसी) स्थापित किए जाएंगे।
स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने यह जानकारी विधानसभा में कांग्रेस विधायक प्रकाश कोलिवाड द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में दी।
मंत्री ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) का उद्देश्य बच्चों में दिव्यांगता और स्वास्थ्य समस्याओं की प्रारंभिक पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित करना है। इस कार्यक्रम के तहत डीईआईसी केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहाँ विकास संबंधी देरी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त बच्चों की शुरुआती पहचान और इलाज किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इन केंद्रों में बाल रोग विशेषज्ञ, स्टाफ नर्स, कार्डियोलॉजिस्ट और नेत्र रोग विशेषज्ञ जैसे विशेषज्ञ उपलब्ध होंगे, और कुछ केंद्रों में मनोवैज्ञानिक भी होंगे ताकि बच्चों को विशेष सहायता मिल सके।
मंत्री ने यह भी बताया कि वर्तमान में राज्य में १७ डीईआईसी केंद्र कार्यरत हैं और कोप्पल में जल्द ही एक नया केंद्र शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा, “सरकार ने यह निर्णय लिया है कि इन केंद्रों को राज्य के सभी जिलों में स्थापित किया जाएगा। कम उम्र में स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान और इलाज बच्चों के भविष्य पर बड़ा सकारात्मक प्रभाव डालता है।”
इस मुद्दे को उठाते हुए विधायक प्रकाश कोलीवाड ने डीईआईसी केंद्रों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि राज्य में दिव्यांग बच्चों की अनुमानित संख्या और पंजीकृत मामलों के बीच बड़ा अंतर है।
उन्होंने कहा कि एक सर्वे के अनुसार राज्य में लगभग ६.३ प्रतिशत बच्चे दिव्यांग हैं, लेकिन उनके रानीबेन्नूर विधानसभा क्षेत्र में केवल १३७ बच्चे ही पंजीकृत हैं, जबकि तालुक में लगभग १८,००० दिव्यांग बच्चों की उम्मीद की जाती है।
कोलीवाड ने यह भी बताया कि हावेरी जिले में वर्तमान में कोई डीईआईसी केंद्र नहीं है और इसे स्थापित करने का प्रस्ताव अब तक मंजूर नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि ऐसे केंद्रों के अभाव में विशेषकर गरीब परिवारों के कई बच्चों को चिकित्सा सहायता नहीं मिल पाती और कई मामलों में उन्हें सड़कों पर संघर्ष करते देखा गया है।
विधायक ने यह भी बताया कि उनकी अपनी बेटी दिव्यांग है और उन्होंने इस क्षेत्र को उपेक्षित बताया। उन्होंने सरकार से हावेरी जिले में जल्द से जल्द डीईआईसी केंद्र की मंजूरी देने की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि आरबीएसके कार्यक्रम के तहत हजारों बच्चों की पहचान हो चुकी है, लेकिन इलाज के लिए उन्हें हुब्बल्ली, मंगलुरु और शिवमोग्गा जैसे शहरों तक जाना पड़ता है।
कोलीवाड ने तालुक स्तर पर टेली-थेरेपी और टेली-काउंसलिंग सेवाएं शुरू करने तथा दिव्यांग बच्चों को डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के तहत लाने की भी मांग की। उनका कहना था कि इससे सरकार को उनकी जरूरतों की पहचान करने और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, जिससे आने वाली पीढ़ियां अधिक स्वस्थ बन सकें।