कार्ति चिदंबरम ने एसआईआर को बताया जिम क्रो जैसा, बोले- दिल्ली के 31.63 लाख मतदाताओं को नोटिस चिंताजनक
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने 22 सितंबर 2026 को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की तुलना अमेरिका के नस्लभेदी जिम क्रो कानूनों से करते हुए इसे 'बहिष्करणकारी' प्रक्रिया बताया। उनकी यह तीखी प्रतिक्रिया तब आई जब नई दिल्ली में चल रहे एसआईआर अभियान के तहत 31.63 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए।
मुख्य आरोप: मताधिकार से वंचित करने की कोशिश
चिदंबरम ने एक विशेष बातचीत में कहा, 'भारत निर्वाचन आयोग द्वारा शुरू की गई यह एसआईआर प्रक्रिया, अलगाव के दौरान अमेरिका के जिम क्रो कानूनों के समान है। यह एक बहिष्कारकारी प्रक्रिया है, समावेशी नहीं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि वे मतदाता सूची की सफाई के विरोध में नहीं हैं, बल्कि उनकी आपत्ति इस प्रक्रिया के दायरे और क्रियान्वयन को लेकर है।
उन्होंने कहा, 'यह प्रक्रिया इससे कहीं आगे जा रही है और इसका उद्देश्य कई लोगों को मताधिकार से वंचित करना है। पिछले चुनाव में मतदान कर चुके और वर्तमान निवासी मतदाताओं पर यह किस तरह की बोझिल जिम्मेदारी डाल रही है, यह दिल्ली में अब जिन नामों को नोटिस मिल रहे हैं, उनसे स्पष्ट हो रहा है।'
प्रमुख हस्तियों को नोटिस — व्यवस्थागत खामी का संकेत
चिदंबरम ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भेजे गए नोटिसों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह 'स्पष्ट रूप से इस प्रक्रिया में एक व्यवस्थागत खामी की ओर इशारा करता है।' उनका तर्क था कि अगर इतने प्रमुख और सत्यापित निवासी मतदाताओं को नोटिस मिल रहे हैं, तो आम मतदाताओं की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
गौरतलब है कि जिम क्रो कानून अमेरिकी इतिहास के वे राज्य और स्थानीय कानून थे जो 1870 के दशक के अंत से लेकर 1960 के दशक के मध्य तक लागू रहे और जिनके जरिए अश्वेत नागरिकों को मतदान व अन्य नागरिक अधिकारों से व्यवस्थित तरीके से वंचित किया जाता था। इस तुलना को भाजपा की ओर से तीखा राजनीतिक प्रतिवाद मिलना तय माना जा रहा है।
चुनाव आयोग से पारदर्शिता की माँग
कांग्रेस सांसद ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से इस प्रक्रिया में 'पूरी तरह से बदलाव' करने और इसे अधिक 'पारदर्शी' व 'मतदाता-हितैषी' बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, 'इस प्रक्रिया में यह सुनिश्चित होना चाहिए कि मतदान के योग्य कोई भी व्यक्ति वंचित न रह जाए।' यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल लगातार एसआईआर की समयसीमा और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
राहुल गांधी के कार्यक्रम और व्यंग्य-विवाद का बचाव
चिदंबरम ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का भी समर्थन किया और इसे युवाओं की आवाज उठाने का मंच बताया। इंदौर में आयोजित इस कार्यक्रम में एक हास्य कलाकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई टिप्पणी से उपजे राजनीतिक विवाद पर उन्होंने कहा, 'व्यंग्य राजनीतिक विमर्श का हिस्सा है।' उन्होंने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि उसने भी अन्य राजनीतिक नेताओं पर व्यंग्य किया है।
उन्होंने भाजपा द्वारा उठाए गए उस सवाल को — कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने 1980 की मतदाता सूची में अपना नाम कैसे दर्ज कराया जबकि वे उस समय भारत की नागरिक नहीं थीं — 'अजीबोगरीब साजिश सिद्धांत' करार दिया।
आगे क्या
एसआईआर को लेकर विपक्ष की आक्रामकता बढ़ती दिख रही है, और चुनाव आयोग पर पारदर्शी स्पष्टीकरण का दबाव बनेगा। दिल्ली में 31.63 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे जाने के बाद यह मामला संसद के भीतर और बाहर, दोनों जगह गरमाने की संभावना है।