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क्या कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर 'त्रिवेणी योग' बनेगा?

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क्या कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर 'त्रिवेणी योग' बनेगा?

सारांश

इस साल का कार्तिक कृष्ण चतुर्थी एक विशेष योग का निर्माण कर रहा है। जानें कैसे करवा चौथ, वक्रतुण्ड संकष्टी और कार्तिगाई का यह दुर्लभ मिलन आपके लिए महत्वपूर्ण है। इस दिन की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को समझें।

मुख्य बातें

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर विशेष त्रिवेणी योग बनेगा।
इस दिन करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा।
वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी का महत्व विशेष है।
मासिक कार्तिगाई भी मनाई जाएगी।
भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्त्व है।

नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि शुक्रवार को है। इस दिन मासिक कार्तिगाई, वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी मनाने के साथ ही करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा। इस बार कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर यह योग बना रहा है।

द्रिक पंचांग के अनुसार, शुक्रवार को सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा वृषभ राशि में रहेंगे। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 45 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय सुबह 10 बजकर 41 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 8 मिनट तक रहेगा।

करवा चौथ का व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। हालांकि, अमांत पंचांग का पालन करने वाले क्षेत्रों जैसे गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में इसे आश्विन माह में मनाया जाता है। यह अंतर केवल माह के नाम का होता है, लेकिन तिथि सभी जगह एक ही रहती है।

इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए सूर्योदय से चंद्र दर्शन तक निर्जला व्रत रखती हैं। भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश और कार्तिकेय की पूजा की जाती है।

व्रत का समापन चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करने और मिट्टी के करवा (करक) से जल चढ़ाने के बाद होता है। इस व्रत में करवा का महत्व विशेष होता है, जिसे पूजा के बाद ब्राह्मण या सुहागन को दान दिया जाता है। कुछ क्षेत्रों में इसे करक चतुर्थी भी कहा जाता है।

शुक्रवार के दिन वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी भी मनाई जाएगी, जिसमें भगवान गणेश के वक्रतुण्ड स्वरूप की आराधना की जाती है। वक्रतुण्ड, जिसका अर्थ है टेढ़ी सूंड वाले गणेश, गणपति के अष्टविनायक रूपों में प्रथम हैं।

मुद्गल पुराण के अनुसार, गणपति ने मत्सरासुर नामक दैत्य का वध करने के लिए यह रूप धारण किया था। दैत्य के क्षमा मांगने पर गणेश जी ने उसे जीवन दान दिया। इस दिन भक्त गणेश जी की पूजा करते हैं और व्रत रखकर विघ्नहर्ता से आशीर्वाद मांगते हैं।

मासिक कार्तिगाई, जिसे कार्तिगाई दीपम भी कहते हैं, हर माह तब मनाया जाता है, जब कार्तिगाई नक्षत्र प्रबल होता है। यह पर्व भगवान शिव और उनके पुत्र मुरुगन (कार्तिकेय) को समर्पित है।

पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन भगवान शिव ने ब्रह्मा और विष्णु को अपनी श्रेष्ठता दिखाने के लिए स्वयं को अनंत ज्योति में परिवर्तित किया था। कार्तिक माह में पड़ने वाला कार्तिगाई दीपम विशेष महत्व रखता है।

तमिलनाडु के तिरुवन्नामलई में इस अवसर पर विशाल महादीपम जलाया जाता है, जो दूर-दूर तक दिखाई देता है। हजारों श्रद्धालु वहां एकत्र होकर भगवान शिव की पूजा करते हैं और दीप जलाकर अंधकार पर प्रकाश की विजय का उत्सव मनाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

राष्ट्रीय संपादक की दृष्टि से, हमें यह समझना चाहिए कि कार्तिक कृष्ण चतुर्थी का यह योग न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक है। यह हमें एकजुट होने और हमारे पारंपरिक मूल्यों को सम्मान देने का अवसर प्रदान करता है।
RashtraPress
9 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या करवा चौथ और कार्तिक कृष्ण चतुर्थी एक ही दिन मनाए जाते हैं?
हाँ, इस साल करवा चौथ और कार्तिक कृष्ण चतुर्थी एक ही दिन, 9 अक्टूबर को मनाए जाएंगे।
वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी का महत्व क्या है?
इस दिन भगवान गणेश के वक्रतुण्ड स्वरूप की पूजा की जाती है, जो भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।
कार्तिगाई दीपम किस दिन मनाया जाता है?
कार्तिगाई दीपम हर महीने तब मनाया जाता है, जब कार्तिगाई नक्षत्र प्रबल होता है।
राष्ट्र प्रेस
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