गृह लक्ष्मी ऑडिट विवाद: केएएस अधिकारी महेश बाबू के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के अकाउंटेंट जनरल (ऑडिट-I) जहांगीर इनामदार ने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को पत्र लिखकर कर्नाटक प्रशासनिक सेवा (केएएस) के अधिकारी एन. महेश बाबू के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की माँग की है। महेश बाबू पर आरोप है कि उन्होंने गृह लक्ष्मी योजना के ऑडिट से जुड़े मामले में अकाउंटेंट जनरल और प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल के विरुद्ध कथित तौर पर अपमानजनक और धमकी भरी टिप्पणियाँ कीं। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा गृह लक्ष्मी योजना के तहत कथित तौर पर करीब ₹225 करोड़ के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया जा चुका है।
मामले की पृष्ठभूमि
महेश बाबू फिलहाल कर्नाटक स्टेट वुमेंस डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं — यानी ठीक उसी निगम के प्रमुख, जिसकी योजना का ऑडिट किया जा रहा है। इनामदार के पत्र के अनुसार, मीडिया रिपोर्टों में महेश बाबू के नाम से ऐसी टिप्पणियाँ सामने आने का दावा किया गया है, जिनमें अकाउंटेंट जनरल के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया और उन पर शारीरिक हमले तक की बात कही गई।
गौरतलब है कि सीएजी ऑडिट में मृत और फर्जी लाभार्थियों के खातों में धनराशि हस्तांतरित किए जाने का मामला भी उजागर हुआ था। इनामदार ने स्पष्ट किया कि ऑडिट अभी अंतिम रिपोर्ट के चरण तक नहीं पहुँचा है और उपलब्ध इनपुट सीमित डेटा के आंशिक ऑडिट पर आधारित शुरुआती टिप्पणियाँ हैं, जिन्हें अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
संवैधानिक संस्था पर हमले का गंभीर आयाम
इनामदार ने अपने पत्र में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 का हवाला देते हुए कहा कि सीएजी एक संवैधानिक प्राधिकरण है। राज्यों की आय और व्यय का ऑडिट अनुच्छेद 149 और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कर्तव्य, शक्तियाँ और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971 के तहत किया जाता है। सीएजी की रिपोर्ट अनुच्छेद 151(2) के अंतर्गत राज्य विधानमंडल के समक्ष रखी जाती है।
उन्होंने तर्क दिया कि अकाउंटेंट जनरल और प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल पर उनके आधिकारिक कामकाज को लेकर हमला करना, वस्तुतः एक संवैधानिक संस्था और सार्वजनिक धन के खर्च की जानकारी पाने के विधानमंडल के अधिकार पर हमले के समान है। इनामदार के अनुसार, ऐसी टिप्पणियाँ किसी भी नागरिक की ओर से स्वीकार्य नहीं हो सकतीं, और यह मामला केवल दो अधिकारियों के बीच व्यक्तिगत विवाद तक सीमित नहीं है।
माँगें और अपेक्षित कार्रवाई
इनामदार ने मुख्य सचिव से तीन प्रमुख माँगें की हैं। पहली — महेश बाबू के नाम से सामने आई टिप्पणियों की शीघ्र जाँच कराई जाए। दूसरी — आरोप सही पाए जाने पर संबंधित आचरण नियमों और सीसीए नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए। तीसरी — अधिकारी उसी सार्वजनिक मंच पर बिना शर्त माफी माँगें, जहाँ कथित टिप्पणियाँ की गई थीं।
इसके अतिरिक्त, इनामदार ने वित्तीय पारदर्शिता और चुनावी अवधि के दौरान प्रशासन की निष्पक्षता पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव की भी स्वतंत्र रूप से जाँच कराने की माँग की है।
ऑडिट का उद्देश्य और संस्थागत विश्वसनीयता
इनामदार ने स्पष्ट किया कि गृह लक्ष्मी योजना के ऑडिट का एकमात्र लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी धन उन महिलाओं तक पहुँचे, जिनके लिए यह योजना बनाई गई है। उन्होंने कहा कि ऑडिट में सहयोग करके और उससे सामने आने वाले तथ्यों पर कार्रवाई करके ही इस उद्देश्य को प्राप्त किया जा सकता है — न कि तथ्य उजागर करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करके।
उन्होंने चेतावनी दी कि संवैधानिक प्राधिकरण को कथित तौर पर निशाना बनाने वाली सार्वजनिक टिप्पणियाँ ऑडिट प्रक्रिया को नुकसान पहुँचाने के साथ-साथ जवाबदेही सुनिश्चित करने वाली राज्य की संस्थागत व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी कमजोर कर सकती हैं। यह मामला अब कर्नाटक सरकार के लिए एक संवेदनशील प्रशासनिक और संवैधानिक परीक्षा बन गया है।