8 अगस्त 2026
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जबलपुर: पंचायत विभाग के बाबू सुभाष शर्मा पर लोकायुक्त का छापा, आय से 500% अधिक संपत्ति उजागर

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जबलपुर: पंचायत विभाग के बाबू सुभाष शर्मा पर लोकायुक्त का छापा, आय से 500% अधिक संपत्ति उजागर

सारांश

मध्य प्रदेश में एक सरकारी बाबू की 'करोड़पति' जिंदगी का पर्दाफाश — लोकायुक्त ने जबलपुर और सिवनी में एक साथ छापा मारकर पंचायत विभाग के सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी सुभाष शर्मा की आय से 500% अधिक संपत्ति उजागर की। मकान, भूखंड और फार्म हाउस के दस्तावेज बरामद, जाँच जारी।

मुख्य बातें

लोकायुक्त ने 8 अगस्त को जबलपुर और सिवनी में एक साथ छापेमारी की।
आरोपी सुभाष शर्मा सिवनी के क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग प्रशिक्षण केंद्र में सहायक ग्रेड-2 पद पर कार्यरत हैं।
प्रारंभिक जाँच में संपत्ति वैध आय से 500 प्रतिशत से अधिक पाई गई।
शर्मा और उनकी पत्नी के नाम पर मकान, भूखंड और फार्म हाउस सहित अनेक संपत्तियाँ मिली हैं।
बरामद दस्तावेजों के आधार पर अन्य स्थानों पर भी संपत्तियों की जाँच जारी है।

मध्य प्रदेश के जबलपुर और सिवनी में लोकायुक्त ने 8 अगस्त को पंचायत विभाग के सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी सुभाष शर्मा के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की, जिसमें उनकी आय से 500 प्रतिशत से अधिक संपत्ति होने का प्रारंभिक खुलासा हुआ है। शर्मा और उनकी पत्नी के नाम पर मकान, भूखंड और फार्म हाउस सहित अनेक संपत्तियों के दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

कौन हैं सुभाष शर्मा

सुभाष शर्मा सिवनी स्थित क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग प्रशिक्षण केंद्र में सहायक ग्रेड-2 के पद पर कार्यरत हैं। एक सरकारी कर्मचारी के रूप में उनकी मासिक आय सीमित है, किंतु उनके विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं।

रिपोर्टों के अनुसार, इन शिकायतों का लोकायुक्त ने पहले सत्यापन किया और पर्याप्त आधार मिलने पर छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

मुख्य घटनाक्रम

शनिवार की सुबह लोकायुक्त की टीमों ने जबलपुर और सिवनी में एक साथ दबिश दी। प्रारंभिक जाँच में शर्मा और उनकी पत्नी के नाम पर मकान, भूखंड और फार्म हाउस सहित कई संपत्तियों का पता चला है।

जब्त दस्तावेजों की जाँच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सिवनी और जबलपुर के अलावा अन्य स्थानों पर भी संपत्तियाँ हैं या नहीं। अधिकारियों के अनुसार, अब तक सामने आई संपत्ति उनकी अनुमानित वैध आय से 500 प्रतिशत से अधिक है।

लोकायुक्त की कार्रवाई जारी

लोकायुक्त की जाँच अभी जारी है। बरामद कागजों की छानबीन के आधार पर शर्मा की अतिरिक्त संपत्तियों का पता लगाया जा रहा है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जाँच के दायरे में और स्थान भी आ सकते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार-रोधी कार्रवाइयाँ तेज हुई हैं। गौरतलब है कि लोकायुक्त ने हाल के महीनों में कई सरकारी विभागों में इसी तरह की छापेमारी की है।

आगे क्या होगा

जाँच पूरी होने के बाद लोकायुक्त द्वारा आधिकारिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यदि आरोप साबित होते हैं, तो शर्मा के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल संपत्ति दस्तावेजों की विस्तृत जाँच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु असली सवाल यह है कि इतने वर्षों तक विभागीय निगरानी तंत्र कहाँ सोया रहा। मध्य प्रदेश में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग में भ्रष्टाचार की यह कोई पहली घटना नहीं है — जब तक आंतरिक ऑडिट और सतर्कता तंत्र को मज़बूत नहीं किया जाता, ऐसे मामले सामने आते रहेंगे।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोकायुक्त ने सुभाष शर्मा पर छापा क्यों मारा?
सुभाष शर्मा के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। लोकायुक्त ने इन शिकायतों का सत्यापन किया और पर्याप्त आधार मिलने पर 8 अगस्त को जबलपुर और सिवनी में एक साथ छापेमारी की।
सुभाष शर्मा कौन हैं और किस पद पर हैं?
सुभाष शर्मा मध्य प्रदेश के सिवनी स्थित क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग प्रशिक्षण केंद्र में सहायक ग्रेड-2 के पद पर कार्यरत हैं। वे एक नियमित सरकारी कर्मचारी हैं जिनकी वैध आय सीमित है।
छापेमारी में कितनी और कौन-सी संपत्तियाँ मिलीं?
प्रारंभिक जाँच में शर्मा और उनकी पत्नी के नाम पर मकान, भूखंड और फार्म हाउस सहित अनेक संपत्तियाँ मिली हैं। यह संपत्ति उनकी अनुमानित वैध आय से 500 प्रतिशत से अधिक बताई जा रही है।
लोकायुक्त की जाँच अब आगे कहाँ जाएगी?
बरामद दस्तावेजों की जाँच जारी है और सिवनी व जबलपुर के अलावा अन्य स्थानों पर भी संपत्तियों का पता लगाया जा रहा है। जाँच पूरी होने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
मध्य प्रदेश में लोकायुक्त की भूमिका क्या है?
लोकायुक्त एक स्वतंत्र भ्रष्टाचार-रोधी संस्था है जो सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के विरुद्ध शिकायतों की जाँच करती है। यह संस्था आय से अधिक संपत्ति, रिश्वतखोरी और अन्य भ्रष्टाचार के मामलों में छापेमारी और जाँच का अधिकार रखती है।
राष्ट्र प्रेस
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