8 अगस्त 2026
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सावरकर क्विज विवाद: केरल शिक्षा मंत्री शमसुद्दीन ने कासरगोड स्कूलों में जांच के आदेश दिए

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सावरकर क्विज विवाद: केरल शिक्षा मंत्री शमसुद्दीन ने कासरगोड स्कूलों में जांच के आदेश दिए

सारांश

केरल के कासरगोड में स्वतंत्रता दिवस की तैयारी में आयोजित एक अनधिकृत 'फ्रीडम क्विज' ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया — जब सावरकर को 'सबसे कठोर सजा' पाने वाले स्वतंत्रता सेनानी के रूप में प्रस्तुत किया गया। शिक्षा मंत्री ने जांच के आदेश दिए, DYFI और SFI सड़कों पर उतरे।

मुख्य बातें

केरल के सामान्य शिक्षा मंत्री एन.
शमसुद्दीन ने 8 अगस्त को कासरगोड के स्कूलों में आयोजित 'फ्रीडम क्विज' विवाद की जांच के आदेश दिए।
6 अगस्त को कुंबला और मंजेश्वर उप-जिलों के लोअर-प्राइमरी छात्रों के लिए आयोजित यह क्विज विभाग के आधिकारिक कैलेंडर का हिस्सा नहीं थी।
सावरकर को 'सबसे कठोर सजा' पाने वाले स्वतंत्रता सेनानी के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसे आलोचकों ने इतिहास की एकांगी प्रस्तुति बताया।
DYFI ने विरोध मार्च निकाला; SFI और MSF ने भी आलोचना की।
विभाग ने स्पष्ट किया कि भविष्य में सभी गतिविधियाँ केवल स्वीकृत कैलेंडर और उचित निगरानी में आयोजित होंगी।

केरल के सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शमसुद्दीन ने 8 अगस्त 2026 को सामान्य शिक्षा निदेशक को निर्देश दिया कि वे कासरगोड जिले के कुंबला और मंजेश्वर उप-जिलों के स्कूलों में आयोजित 'फ्रीडम क्विज' से उपजे विवाद की विस्तृत जांच करें और दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें। यह विवाद 6 अगस्त को लोअर-प्राइमरी छात्रों के लिए आयोजित उस प्रश्नोत्तरी से उपजा, जिसमें वी.डी. सावरकर को स्वतंत्रता सेनानियों में 'सबसे कठोर सजा' पाने वाले व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया।

विवाद की जड़: क्या था वह सवाल

स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के तहत आयोजित इस 'फ्रीडम क्विज' में एक प्रश्न पूछा गया — स्वतंत्रता सेनानियों में से किसे अंग्रेजों ने 'सबसे कठोर सजा' दी थी? इसका निर्धारित उत्तर वी.डी. सावरकर था। आलोचकों का कहना है कि इस प्रश्न और उत्तर ने स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को एकांगी ढंग से प्रस्तुत किया और एक विशेष वैचारिक दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया। विरोधियों ने इसे संघ परिवार के एजेंडे के अनुरूप इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का प्रयास बताया है।

विभाग की स्थिति: अनधिकृत था आयोजन

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि 6 अगस्त को आयोजित यह क्विज, विभाग या सोशल साइंस क्लब के किसी भी आधिकारिक गतिविधि कैलेंडर का हिस्सा नहीं थी। विभाग के अनुसार, स्थानीय या अनौपचारिक स्तर पर इस प्रकार का प्रश्न-पत्र तैयार करने या प्रतियोगिता आयोजित करने के लिए किसी को भी अधिकृत नहीं किया गया था। मंत्री शमसुद्दीन ने निदेशक को निर्देश दिया है कि वे उन व्यक्तियों की पहचान करें जिन्होंने बिना अनुमति के यह आयोजन किया।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और विरोध प्रदर्शन

इस विवाद ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) ने विरोध मार्च निकाला। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के छात्र संगठन मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF) ने भी इस आयोजन की कड़ी आलोचना की। यह ऐसे समय में आया है जब केरल में ऐतिहासिक व्याख्याओं को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से ही बना हुआ है।

आगे क्या होगा

मंत्री के निर्देशों के बाद सामान्य शिक्षा निदेशक जांच प्रक्रिया शुरू करेंगे। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में सभी स्कूल-स्तरीय गतिविधियाँ केवल स्वीकृत शैक्षणिक और गतिविधि कैलेंडर के अनुसार और उचित निगरानी में ही आयोजित की जाएंगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ वाम-उदारवादी शैक्षणिक परंपरा हावी रही है, सावरकर को केंद्रीय नायक के रूप में प्रस्तुत करना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक प्रतिक्रिया को आमंत्रित करता है। असली सवाल यह है कि यह 'अनधिकृत' आयोजन कैसे और किसके सहयोग से हुआ — और क्या जांच इसकी जड़ तक पहुँचेगी या केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल का सावरकर क्विज विवाद क्या है?
6 अगस्त को कासरगोड के कुंबला और मंजेश्वर उप-जिलों के स्कूलों में लोअर-प्राइमरी छात्रों के लिए एक 'फ्रीडम क्विज' आयोजित की गई, जिसमें वी.डी. सावरकर को अंग्रेजों से 'सबसे कठोर सजा' पाने वाले स्वतंत्रता सेनानी के रूप में प्रस्तुत किया गया। आलोचकों ने इसे इतिहास की एकांगी और वैचारिक रूप से पक्षपाती प्रस्तुति बताया।
केरल शिक्षा मंत्री ने क्या कार्रवाई की?
सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शमसुद्दीन ने 8 अगस्त को सामान्य शिक्षा निदेशक को विस्तृत जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने बिना अनुमति के प्रश्न-पत्र तैयार करने और क्विज आयोजित करने वालों की पहचान करने को कहा है।
क्या यह क्विज शिक्षा विभाग द्वारा अधिकृत थी?
नहीं। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह क्विज विभाग या सोशल साइंस क्लब के आधिकारिक गतिविधि कैलेंडर का हिस्सा नहीं थी। किसी को भी स्थानीय या अनौपचारिक स्तर पर ऐसा प्रश्न-पत्र तैयार करने या प्रतियोगिता आयोजित करने के लिए अधिकृत नहीं किया गया था।
इस विवाद पर किन संगठनों ने विरोध जताया?
DYFI (डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया) ने विरोध मार्च निकाला। SFI (स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) और IUML के छात्र संगठन MSF (मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन) ने भी इस आयोजन की कड़ी आलोचना की।
आगे क्या होने की उम्मीद है?
सामान्य शिक्षा निदेशक जांच प्रक्रिया शुरू करेंगे और दोषियों की पहचान के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई अपेक्षित है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में सभी स्कूल-स्तरीय गतिविधियाँ केवल स्वीकृत कैलेंडर और उचित निगरानी में ही आयोजित होंगी।
राष्ट्र प्रेस
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