UPI MDR पर कश्मीर के व्यापारी चिंतित, श्रीनगर में छोटे दुकानदारों ने केंद्र से प्रस्ताव वापस लेने की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के प्रस्ताव को लेकर जम्मू-कश्मीर के कारोबारियों में गहरी चिंता व्याप्त है। श्रीनगर के व्यापारी बशीर अहमद और ट्रेडर आसिफ अहमद ने 19 सितंबर 2026 को कहा कि UPI लेनदेन पर किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क लागू होने से छोटे व्यापारियों और रिटेल कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दोनों व्यापारियों ने केंद्र सरकार से इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
व्यापारियों की मुख्य चिंताएँ
बशीर अहमद ने कहा कि छोटे दुकानदार और रिटेल ट्रेडर भी 'आम आदमी' की श्रेणी में आते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के उस कथित बयान पर सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि UPI से आम आदमी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनका तर्क है कि व्यापारियों के कारोबार पर पड़ने वाला दबाव अंततः उपभोक्ताओं तक पहुँचेगा, जिससे महँगाई और बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा कि घाटी के छोटे व्यापारी पहले से ही बिजली बिल, ब्याज दरों और कारोबार से जुड़ी अन्य लागतों के बोझ तले दबे हैं। ऐसे में UPI भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क की संभावना उनके लिए एक और आर्थिक चुनौती बन सकती है।
डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर खतरा
बशीर अहमद ने आशंका जताई कि यदि MDR लागू हुआ तो कई दुकानदार नकद लेनदेन की ओर लौट सकते हैं। इससे देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की कोशिशों को गहरा झटका लग सकता है और ग्राहकों के लिए भी असुविधा बढ़ेगी।
ट्रेडर आसिफ अहमद ने भी इस आशंका को दोहराया। उनका कहना है कि यदि UPI पर अतिरिक्त शुल्क लागू होता है तो व्यापारी और ग्राहक दोनों वैकल्पिक भुगतान माध्यमों या एप्लिकेशन की तरफ जा सकते हैं, जिससे UPI की व्यापकता और स्वीकार्यता प्रभावित होगी। उन्होंने पेट्रोल पंप कारोबारियों का उदाहरण देते हुए कहा कि ईंधन जैसे बड़े लेनदेन पर अतिरिक्त भार और कठिन हो सकता है।
कश्मीर के व्यापारियों की विशेष परिस्थितियाँ
बशीर अहमद ने याद दिलाया कि जम्मू-कश्मीर के व्यापारियों को पिछले कई वर्षों में असामान्य परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। बाढ़, विरोध-प्रदर्शन, कोविड-19 महामारी और अन्य संकटों के कारण घाटी में व्यापार लंबे समय तक बाधित रहा। उन्होंने कहा कि इतनी मुश्किलों के बाद व्यापारियों पर एक और नया आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं होगा।
उन्होंने केंद्र सरकार से विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर के व्यापारियों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव पर विचार करने की गुज़ारिश की।
व्यापारियों की माँग
आसिफ अहमद ने केंद्र सरकार से MDR प्रस्ताव की समीक्षा करने की माँग की। उनका कहना है कि UPI को एक सुलभ, सुविधाजनक और सर्वव्यापी डिजिटल भुगतान माध्यम के रूप में बनाए रखना देशहित में है। दोनों व्यापारियों का मानना है कि इस मुद्दे पर व्यापारी समुदाय की आवाज़ को सुना जाना चाहिए।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब सरकार डिजिटल इंडिया अभियान के तहत कैशलेस लेनदेन को प्रोत्साहित करने की नीति पर चल रही है। यदि MDR लागू किया गया तो यह नीतिगत विरोधाभास की स्थिति पैदा कर सकता है।