काजीरंगा में 30 प्रजातियों के 217 रैप्टर और 6 प्रजातियों के 266 सारस दर्ज, सर्वे में उजागर हुई अद्वितीय जैव विविधता
सारांश
मुख्य बातें
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व (KNPTR) में फरवरी-मार्च 2026 के बीच कराए गए व्यापक पक्षी सर्वेक्षण में 30 प्रजातियों के शिकारी पक्षियों (रैप्टर्स) की 217 और 6 प्रजातियों के सारसों (स्टॉर्क) की 266 मौजूदगी दर्ज की गई है। विश्व पर्यावरण दिवस, 5 जून 2026 के अवसर पर जारी यह रिपोर्ट असम के इस यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की वैश्विक संरक्षण महत्ता को एक बार फिर रेखांकित करती है।
सर्वेक्षण की पद्धति और दायरा
KNPTR प्रशासन ने असम के विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों के सहयोग से यह सर्वेक्षण कराया। 10 विशेषज्ञ गणनाकारों की टीम ने फरवरी के अंतिम सप्ताह से मार्च के पहले सप्ताह तक काजीरंगा के सभी वन्यजीव प्रभागों में दिन और रात दोनों पालियों में पक्षियों की गणना की। यह पहली बार है जब रैप्टर और सारस दोनों को एक साथ इस पैमाने पर सर्वेक्षित किया गया।
प्रभाग-वार प्रमुख निष्कर्ष
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में सर्वाधिक 21 प्रजातियों के रैप्टर और 5 प्रजातियों के सारस पाए गए। बिस्वनाथ वन्यजीव प्रभाग में 20 रैप्टर और 6 सारस प्रजातियाँ दर्ज हुईं, जबकि नगांव वन्यजीव प्रभाग में 14 रैप्टर और 5 सारस प्रजातियाँ मिलीं।
सारसों में एशियन ओपनबिल सबसे अधिक — 92 की संख्या में — दर्ज हुआ, जबकि ग्रेटर एडजुटेंट सबसे दुर्लभ रहा और केवल 3 पक्षी ही देखे गए। रैप्टर्स में हिमालयन ग्रिफॉन गिद्ध सबसे अधिक — 69 बार — नज़र आया, वहीं बूटेड ईगल और व्हाइट-टेल्ड ईगल की केवल एक-एक बार ही मौजूदगी दर्ज हुई।
वैश्विक संरक्षण में काजीरंगा की भूमिका
रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर संकटग्रस्त पलास फिश ईगल के संरक्षण में काजीरंगा की विशेष भूमिका का उल्लेख किया गया है। मंगोलिया के वन्यजीव विज्ञान एवं संरक्षण केंद्र द्वारा टैग किया गया नर पलास फिश ईगल 'इडर' वर्ष 2020 से प्रति वर्ष प्रजनन के लिए काजीरंगा लौट रहा है और गैर-प्रजनन मौसम में वापस मंगोलिया चला जाता है।
भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के 2020 के सर्वेक्षण में काजीरंगा में पलास फिश ईगल के 10 सक्रिय घोंसले दर्ज किए गए थे — जो इस प्रजाति के दुनिया के सबसे अधिक ज्ञात प्रजनन स्थलों में से एक है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक स्तर पर रैप्टर आबादी में गिरावट दर्ज की जा रही है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
KNPTR निदेशक सोनाली घोष ने कहा कि इस सर्वेक्षण के निष्कर्ष संकटग्रस्त शिकारी पक्षियों और सारसों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने बताया कि इनमें से अधिकांश प्रजातियाँ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त करती हैं।
घोष ने यह भी कहा कि काजीरंगा के विस्तृत आर्द्रभूमि क्षेत्र स्थानीय और प्रवासी दोनों प्रकार के सारसों के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध कराते हैं, और यह सर्वे इस अनूठे पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित रखने की आवश्यकता को और पुख्ता करता है।
काजीरंगा की व्यापक जैव विविधता
गौरतलब है कि भारत में शिकारी पक्षियों की कुल 112 प्रजातियाँ दर्ज हैं, जिनमें से लगभग 50 प्रजातियाँ काजीरंगा और उसके आसपास के क्षेत्रों में पाई जाती हैं। दुनिया में सारसों की 20 प्रजातियाँ हैं, जिनमें से 8 भारत में मिलती हैं — और इन सभी आठों की मौजूदगी असम तथा काजीरंगा क्षेत्र में दर्ज की गई है।
यह अभयारण्य असम के गोलाघाट, नगांव, सोनितपुर और बिस्वनाथ जिलों में फैला हुआ है और भारत के 'बिग फाइव' वन्यजीवों का घर है — जिनमें वर्तमान में 2,613 एकसींगी गैंडे, 104 बंगाल टाइगर, 1,228 एशियाई हाथी, 2,565 जंगली भैंसे और 1,129 पूर्वी दलदली हिरण शामिल हैं। आने वाले वर्षों में इस सर्वे के आधार पर संरक्षण नीतियों को और सुदृढ़ करने की उम्मीद है।