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केरल हाई कोर्ट ने दलित छात्र नितिन राज सुसाइड केस में प्रोफेसर डॉ. कोडंडा राम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

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केरल हाई कोर्ट ने दलित छात्र नितिन राज सुसाइड केस में प्रोफेसर डॉ. कोडंडा राम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

सारांश

केरल हाई कोर्ट ने दलित छात्र नितिन राज की कथित आत्महत्या मामले में कन्नूर डेंटल कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ. कोडंडा राम की अग्रिम जमानत खारिज कर दी। न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन ने फैसला सुनाते हुए मेडिकल कॉलेजों में उत्पीड़न की शिकायतों पर समिति गठित करने का सुझाव भी दिया।

मुख्य बातें

केरल हाई कोर्ट ने 19 जून 2026 को डॉ.
कोडंडा राम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।
दलित छात्र नितिन राज ने 10 अप्रैल को कन्नूर डेंटल कॉलेज के पास एक इमारत से कूदकर कथित तौर पर आत्महत्या की थी।
राम पर आत्महत्या के लिए उकसाने और SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के तहत मामला दर्ज है।
संगीता नाम्बियार को सत्र न्यायालय ने 25 अप्रैल को जमानत दे दी थी।
हाई कोर्ट ने मेडिकल कॉलेजों में उत्पीड़न की शिकायतों की जाँच के लिए विशेष समिति गठित करने का सुझाव दिया।

केरल हाई कोर्ट ने शुक्रवार, 19 जून 2026 को कन्नूर डेंटल कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ. एम. कोडंडा राम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। डॉ. राम पर दलित छात्र नितिन राज को मौखिक रूप से प्रताड़ित करने और जाति आधारित उत्पीड़न के लिए उकसाने का आरोप है, जिसके बाद 10 अप्रैल को नितिन ने कथित तौर पर कॉलेज के पास एक इमारत से कूदकर अपनी जान दे दी। न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डॉ. राम को गिरफ्तारी से कोई सुरक्षा देने से इनकार कर दिया।

मामले का पृष्ठभूमि और आरोप

नितिन राज के पिता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने डॉ. कोडंडा राम और दो अन्य स्टाफ सदस्यों के विरुद्ध आत्महत्या के लिए उकसाने तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत मामला दर्ज किया था। परिवार का आरोप है कि नितिन को उसकी मृत्यु से पहले संकाय सदस्यों द्वारा जाति आधारित उत्पीड़न और मानसिक क्रूरता का शिकार बनाया गया था।

गौरतलब है कि डॉ. राम ने इससे पहले सह-आरोपी फैकल्टी सदस्य डॉ. संगीता नाम्बियार के साथ सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत की माँग की थी। सत्र न्यायालय ने 25 अप्रैल को डॉ. नाम्बियार को जमानत दे दी, किंतु डॉ. राम की याचिका अस्वीकार कर दी — जिसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।

अभियोजन पक्ष के तर्क

राज्य सरकार ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि दो छात्रों के बयान डॉ. राम द्वारा छात्रों के प्रति अनुचित व्यवहार की पुष्टि करते हैं। अभियोजन पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि आरोपी प्रोफेसर ने कथित तौर पर अन्य शिक्षकों को भी नितिन राज को प्रताड़ित करने के लिए उकसाया था।

बचाव पक्ष की दलीलें

डॉ. राम के अधिवक्ता ने जाति आधारित उत्पीड़न के आरोपों से पूरी तरह इनकार किया। बचाव पक्ष ने सीसीटीवी फुटेज का हवाला दिया, जिसमें नितिन राज अपनी मृत्यु से पूर्व कॉलेज के प्रिंसिपल के कक्ष में दिखाई दे रहे थे। इसके अतिरिक्त, बचाव पक्ष ने छात्र पर कथित ऋण वसूली के दबाव से संबंधित दस्तावेज़ भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए, यह तर्क देते हुए कि छात्र की परेशानी के पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं।

हाई कोर्ट की चिंता और टिप्पणी

सुनवाई के दौरान केरल हाई कोर्ट ने मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में बार-बार सामने आ रही उत्पीड़न की शिकायतों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार को ऐसी शिकायतों की जाँच करने और सुधारात्मक उपाय सुझाने के लिए एक विशेष समिति के गठन पर विचार करना चाहिए। यह टिप्पणी इस बात का संकेत है कि न्यायपालिका इस मामले को एक पृथक घटना के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक प्रणालीगत समस्या के रूप में देख रही है।

आगे क्या होगा

हाई कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद अब डॉ. कोडंडा राम की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है। जाँच एजेंसियाँ मामले की तह तक जाने के लिए गवाहों के बयान और डिजिटल साक्ष्य की जाँच जारी रखे हुए हैं। यह मामला भारत के मेडिकल शिक्षण संस्थानों में दलित छात्रों के खिलाफ कथित भेदभाव की व्यापक बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ऐसी समितियाँ पहले भी बनी हैं और उनकी सिफारिशें प्रायः फाइलों में दब जाती हैं। असली सवाल यह है कि क्या SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में सज़ा की दर को सुधारने के लिए कोई ठोस संरचनात्मक बदलाव होगा, या यह मामला भी न्यायिक प्रक्रिया की लंबी भूलभुलैया में खो जाएगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल हाई कोर्ट ने डॉ. कोडंडा राम की जमानत याचिका क्यों खारिज की?
न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन ने दो छात्रों के बयानों और अभियोजन पक्ष के तर्कों के आधार पर जमानत याचिका खारिज की, जिनसे डॉ. राम द्वारा छात्रों के प्रति अनुचित व्यवहार और अन्य शिक्षकों को उकसाने के संकेत मिलते हैं। अदालत ने गिरफ्तारी से सुरक्षा देने से इनकार कर दिया।
नितिन राज कौन थे और उनकी मृत्यु कैसे हुई?
नितिन राज कन्नूर डेंटल कॉलेज के दलित छात्र थे, जिन्होंने कथित तौर पर 10 अप्रैल को कॉलेज के पास एक इमारत से कूदकर आत्महत्या कर ली। उनके परिवार का आरोप है कि उन्हें संकाय सदस्यों द्वारा जाति आधारित उत्पीड़न और मानसिक क्रूरता का शिकार बनाया गया था।
डॉ. राम पर कौन-सी धाराओं के तहत मामला दर्ज है?
पुलिस ने डॉ. राम और दो अन्य स्टाफ सदस्यों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत मामला दर्ज किया है। यह शिकायत नितिन राज के पिता ने दर्ज कराई थी।
सह-आरोपी डॉ. संगीता नाम्बियार का क्या हुआ?
सत्र न्यायालय ने 25 अप्रैल को डॉ. संगीता नाम्बियार को अग्रिम जमानत दे दी थी, जबकि उसी सुनवाई में डॉ. राम की याचिका खारिज कर दी गई थी। इसके बाद डॉ. राम ने हाई कोर्ट का रुख किया, जहाँ भी उन्हें राहत नहीं मिली।
हाई कोर्ट ने मेडिकल कॉलेजों के बारे में क्या टिप्पणी की?
सुनवाई के दौरान केरल हाई कोर्ट ने मेडिकल कॉलेजों में बार-बार सामने आ रही उत्पीड़न की शिकायतों पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार ऐसी शिकायतों की जाँच और सुधारात्मक उपाय सुझाने के लिए एक विशेष समिति के गठन पर विचार करे।
राष्ट्र प्रेस
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