नितिन राज केस: केरल हाई कोर्ट ने DSP से पूछा — क्या गिरफ्तारी में चूक जानबूझकर थी?
सारांश
मुख्य बातें
केरल उच्च न्यायालय ने 24 जुलाई 2026 को नितिन राज आत्महत्या मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए और जांच अधिकारी को तीखी फटकार लगाई। अदालत ने मुख्य आरोपी की पहली गिरफ्तारी में हुई प्रक्रियागत चूक को लेकर डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) सुधीर कल्लन से सीधे जवाब माँगा। यह मामला दलित दंत चिकित्सा छात्र नितिन राज की कथित जाति-आधारित उत्पीड़न के बाद हुई मौत से जुड़ा है।
मुख्य घटनाक्रम
न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन की अध्यक्षता वाली पीठ नितिन राज के माता-पिता की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्देश पर स्पष्टीकरण माँगा गया था, जिसके तहत गिरफ्तारी के समय आरोपी को गिरफ्तारी के आधार बताना अनिवार्य है।
मामले के मुख्य आरोपी, कन्नूर डेंटल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. एम. कोडंडा राम को शुरुआती गिरफ्तारी के बाद निचली अदालत ने रिहा कर दिया था, क्योंकि पुलिस कानूनी प्रावधान के अनुसार गिरफ्तारी का कारण बताने में विफल रही थी। प्रक्रियागत खामी दूर करने के बाद उन्हें दोबारा गिरफ्तार किया गया।
अदालत की कड़ी टिप्पणियाँ
न्यायमूर्ति बदरुद्दीन ने DSP सुधीर कल्लन से सीधे पूछा कि इतने संवेदनशील मामले में गिरफ्तारी के दौरान इतनी बुनियादी चूक कैसे हुई। अदालत ने कहा, 'इतने संवेदनशील मामले में जांच या गिरफ्तारी के दौरान किसी भी तरह की चूक नहीं होनी चाहिए, जिससे आरोपी कानून की पकड़ से बच जाए।'
अदालत ने एक कदम आगे बढ़ते हुए यह भी पूछा कि क्या यह चूक जानबूझकर की गई थी। न्यायमूर्ति बदरुद्दीन ने कहा, 'क्या यह गृह विभाग की छवि खराब करने की कोशिश है, जबकि वह 'ऑपरेशन तूफ़ान' जैसे कई अच्छे काम कर रहा है? क्या आप सरकार से बदला लेना चाहते हैं?' DSP ने जवाब दिया, 'ऐसी कोई बात नहीं है, माननीय न्यायालय।'
न्यायाधीश ने अधिकारी से यह भी पूछा कि उन्होंने अब तक कितनी गिरफ्तारियाँ की हैं और अन्य मामलों में गिरफ्तारी का कारण बताया था, तो इस मामले में ऐसा क्यों नहीं किया गया।
अदालत का निर्देश
अदालत ने DSP को स्पष्ट रूप से याद दिलाया कि उनका कर्तव्य निष्पक्ष जांच करना है, किसी एक पक्ष का बचाव नहीं। अदालत ने कहा, 'आप इस तरह की लापरवाही से किसी आरोपी को नहीं बचा सकते। आपका कर्तव्य है कि निष्पक्ष जांच के ज़रिए पीड़ित और आरोपी, दोनों को न्याय मिले।'
हाई कोर्ट ने सरकारी वकील को यह भी याद दिलाया कि वह पहले ही इन खामियों के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्देश दे चुका है।
मामले की पृष्ठभूमि
नितिन राज दलित समुदाय के दंत चिकित्सा के छात्र थे। आरोप है कि कन्नूर डेंटल कॉलेज में जाति के आधार पर उत्पीड़न का सामना करने के बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली। यह मामला केरल में जाति-आधारित भेदभाव और उच्च शिक्षण संस्थानों में दलित छात्रों की सुरक्षा को लेकर व्यापक सामाजिक बहस का केंद्र बन चुका है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में शैक्षणिक संस्थानों में दलित छात्रों के उत्पीड़न के मामलों पर निगरानी की माँग तेज़ हो रही है।
आगे क्या होगा
केरल उच्च न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है। तब तक अदालत ज़िम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई के परिणाम की प्रतीक्षा करेगी। यह सुनवाई तय करेगी कि क्या जांच में हुई प्रक्रियागत खामियों के लिए किसी अधिकारी को जवाबदेह ठहराया जाता है।