नितिन राज मामला: केरल हाईकोर्ट ने पुलिस पर साजिश का आरोप लगाया, डॉ. राम की पुनर्गिरफ्तारी की अर्जी दाखिल
सारांश
मुख्य बातें
केरल हाईकोर्ट ने 22 जुलाई को अंजारकंडी डेंटल कॉलेज के छात्र आर.एल. नितिन राज की मौत की जांच को लेकर केरल पुलिस और राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि मुख्य आरोपी डॉ. एम.के. राम की गिरफ्तारी में प्रक्रियागत खामियाँ जानबूझकर की गई प्रतीत होती हैं, जिसके चलते उन्हें जमानत मिल गई और पुलिस की मिलीभगत का गंभीर संदेह उत्पन्न हुआ।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणियाँ
नितिन राज के परिवार की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस की ओर से साजिश रची गई थी। उन्होंने सीधे सवाल किया कि क्या वरिष्ठ अधिकारियों ने आरोपी को बचाने के लिए काम किया। अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस ने आरोपी के दबाव में काम किया और गिरफ्तारी के दौरान हुए 'ड्रामे' के लिए जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई का आदेश दिया।
कोर्ट ने तीखे शब्दों में पूछा — 'क्या पैसा न्याय से अधिक ताकतवर हो गया है? क्या पुलिस का काम अमीरों को बचाते हुए आम लोगों को परेशान करना है?' अदालत ने कहा कि अब जनता साफ तौर पर देख रही है कि पुलिस किसके पक्ष में खड़ी है।
गिरफ्तारी क्यों हुई अवैध घोषित
थलासेरी प्रिंसिपल सेशंस कोर्ट ने पहले ही अपने आदेश में कहा था कि पुलिस सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित अनिवार्य गिरफ्तारी प्रक्रियाओं का पालन करने में नाकाम रही। गिरफ्तारी मेमो में केवल यह उल्लेख था कि आरोपी ने गंभीर अपराध किया है और सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है — परंतु कानून के अनुसार गिरफ्तारी के विशिष्ट कारण नहीं दर्ज किए गए थे। इस आधार पर कोर्ट ने गिरफ्तारी को गैरकानूनी घोषित कर डॉ. राम को जमानत दे दी।
सेशंस कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि रिमांड की स्वीकृति देने से पहले विशेष न्यायाधीश को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि सभी कानूनी औपचारिकताएँ पूरी हुई हैं।
जानकारी लीक और जांच पर सवाल
हाईकोर्ट ने यह भी पूछा कि जांच रिपोर्ट और केस डायरी की गोपनीय जानकारी बचाव पक्ष तक कैसे पहुँची। अदालत के अनुसार यह पुलिस के भीतर से ही सूचना लीक होने की ओर इशारा करता है। कोर्ट ने डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस की अगुवाई में हुई जांच की भी आलोचना करते हुए कहा कि इतने संवेदनशील मामले में ऐसी बुनियादी चूकें स्वीकार्य नहीं हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य में कानून-व्यवस्था और आपराधिक न्याय प्रणाली विफल हो चुकी है और केवल जांच टीम बदलने से सरकार की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती।
सरकार और अभियोजन पक्ष की प्रतिक्रिया
हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणियों के बाद केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने कहा कि सरकार ने इन घटनाओं को गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि राज्य पुलिस प्रमुख को निर्देश दिए गए हैं कि वे अदालत द्वारा इंगित कमियों को दूर करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएँ।
इस बीच, अभियोजन पक्ष ने डॉ. एम.के. राम की पुनर्गिरफ्तारी की अनुमति के लिए जिला सेशंस कोर्ट में अर्जी दाखिल कर दी है। इस अर्जी पर सुनवाई गुरुवार को होनी है।
आगे क्या होगा
यह मामला केरल की न्यायिक और पुलिस प्रणाली के लिए एक बड़ी परीक्षा बन चुका है। गुरुवार की सुनवाई में जिला सेशंस कोर्ट का फैसला तय करेगा कि डॉ. राम को दोबारा हिरासत में लिया जा सकता है या नहीं। हाईकोर्ट की टिप्पणियों के बाद अब राज्य सरकार पर जांच में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का दबाव और बढ़ गया है।