नितिन राज आत्महत्या केस: जमानत के बाद केरल सरकार ने आईजी अजीथा बेगम की अगुवाई में नई एसआईटी बनाई
सारांश
मुख्य बातें
केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने 21 जुलाई को दलित बीडीएस छात्र नितिन राज आत्महत्या मामले में नई विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित करने के आदेश दिए, जब मुख्य आरोपी डॉ. एम.के. राम को थालास्सेरी के प्रधान सत्र न्यायालय ने प्रक्रियागत खामियों के आधार पर राहत दे दी। नई एसआईटी की कमान आईजी अजीथा बेगम को सौंपी गई है, जबकि उत्तर क्षेत्र के आईजी को जांच में हुई चूक की अलग से पड़ताल की जिम्मेदारी दी गई है।
अदालत ने क्यों दी आरोपी को राहत
थालास्सेरी के प्रधान सत्र न्यायालय ने पाया कि क्राइम ब्रांच की मौजूदा टीम ने डॉ. राम की गिरफ्तारी के दौरान अनिवार्य कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। आरोपी को गिरफ्तारी के लिखित आधार उपलब्ध नहीं कराए गए और लोक अभियोजक को भी समय पर गिरफ्तारी की सूचना नहीं दी गई। इन्हीं कमियों के आधार पर अदालत ने आरोपी की रिहाई का आदेश दिया।
हालांकि, अदालत से रिहा होने के तुरंत बाद क्राइम ब्रांच ने डॉ. राम को कोर्ट परिसर से दोबारा हिरासत में ले लिया। बचाव पक्ष ने इस कार्रवाई को अवैध करार दिया। देर रात जांच एजेंसी ने उन्हें दो दिन बाद पूछताछ के लिए उपस्थित होने का नोटिस भी जारी किया।
गृह मंत्री की प्रतिक्रिया और नई जांच के आदेश
गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आई गंभीर चूक पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से तत्काल रिपोर्ट तलब की और क्राइम ब्रांच प्रमुख से यह स्पष्ट करने को कहा कि किन खामियों के कारण अदालत ने आरोपी को राहत दी। चेन्निथला ने यह भी कहा कि पुलिस की ओर से कोई जानबूझकर लापरवाही नहीं हुई है, और परिवार के सभी संदेहों को दूर करने के लिए ही नए सिरे से जांच कराई जा रही है।
परिवार की प्रतिक्रिया और आरोप
नितिन राज के परिवार ने नई एसआईटी के गठन का स्वागत किया, लेकिन स्पष्ट किया कि मौजूदा क्राइम ब्रांच जांच दल पर उनका भरोसा पूरी तरह उठ चुका है। नितिन की माँ ने आरोप लगाया कि पुलिस और आरोपी के बीच कथित मिलीभगत के कारण डॉ. राम को राहत मिल सकी।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस ने शुरुआती जांच को लोन ऐप से जुड़े कोण की ओर मोड़ दिया, जिससे मुख्य आरोपी डॉ. राम 101 दिनों तक फरार रहने में सफल रहे।
मामले की पृष्ठभूमि
दलित बीडीएस छात्र नितिन राज ने 10 अप्रैल को आत्महत्या कर ली थी। परिवार का आरोप है कि कॉलेज के कुछ शिक्षकों द्वारा लगातार जातिगत उत्पीड़न किए जाने के कारण उसने यह कदम उठाया। बाद में जांच एजेंसियों ने बेंगलुरु में अपनी बेटी के फ्लैट में रह रहे डॉ. राम का नया मोबाइल नंबर ट्रैक कर उन्हें कर्नाटक के कोडागु से गिरफ्तार किया था। उच्च न्यायालयों से अग्रिम जमानत नहीं मिलने के बावजूद गिरफ्तारी में हुई प्रक्रियागत खामियाँ अब जांच के घेरे में हैं।
आगे क्या होगा
नई एसआईटी अब मामले की पूरी जांच अपने हाथ में लेगी। उत्तर क्षेत्र के आईजी पुरानी जांच टीम की चूक की अलग से समीक्षा करेंगे। यह देखना अहम होगा कि क्या नई टीम परिवार के जातिगत उत्पीड़न के आरोपों को केंद्र में रखकर जांच आगे बढ़ाती है और डॉ. राम के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया को दोबारा पटरी पर लाने में सफल होती है।