7 अगस्त 2026
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कॉकरोच पोस्टर विवाद: केरल हाईकोर्ट ने MG यूनिवर्सिटी का फंड रोकने का आदेश किया निलंबित

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कॉकरोच पोस्टर विवाद: केरल हाईकोर्ट ने MG यूनिवर्सिटी का फंड रोकने का आदेश किया निलंबित

सारांश

कॉकरोच के चित्र वाले दो पोस्टरों ने महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। वाइस-चांसलर ने ₹3.75 लाख की फंडिंग वापस ली, छात्रों ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया — और अदालत ने अंतरिम रोक लगा दी। सवाल यह है: क्या एक पोस्टर में राजनीतिक संदेश था?

मुख्य बातें

केरल हाईकोर्ट ने 7 अगस्त 2026 को महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर का फंड वापसी आदेश अंतरिम रूप से निलंबित किया।
स्टूडेंट्स यूनियन के राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए ₹3.75 लाख स्वीकृत थे; ₹2.81 लाख (75%) पहले ही जारी हो चुके थे।
विवाद का कारण दो पोस्टर थे जिनमें कॉकरोच को प्रतीकात्मक रूप से चित्रित किया गया था; यूनिवर्सिटी ने इन्हें राजनीतिक सामग्री माना।
छात्रों ने कहा कि पोस्टरों में किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का कोई प्रतीक या सामग्री नहीं थी।
मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस की अदालत में होगी।

केरल हाईकोर्ट ने 7 अगस्त 2026 को महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी (MG University) के स्टूडेंट्स यूनियन को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए वाइस-चांसलर के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके तहत एक राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए स्वीकृत ₹3.75 लाख की आर्थिक सहायता 'कॉकरोच' वाले प्रचार पोस्टरों को लेकर वापस ले ली गई थी। न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने यह अंतरिम आदेश स्टूडेंट्स यूनियन की उस याचिका पर दिया, जिसमें वाइस-चांसलर के फैसले को चुनौती दी गई थी।

विवाद की पृष्ठभूमि

स्टूडेंट्स यूनियन ने यूनिवर्सिटी से पूर्व अनुमति लेकर कैंपस में तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की योजना बनाई थी। इसके लिए ₹3.75 लाख की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई, जिसमें से ₹2.81 लाख — यानी कुल राशि का 75 प्रतिशत — पहले ही जारी किया जा चुका था।

तैयारियाँ जारी थीं कि यूनिवर्सिटी ने एक सर्कुलर जारी कर दिया, जिसमें कहा गया कि यूनिवर्सिटी के फंड से आयोजित कार्यक्रमों में किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि की अनुमति नहीं होगी। साथ ही, यूनिवर्सिटी के प्रतीक चिह्न (एम्बलम) के उपयोग के लिए भी पूर्व अनुमति अनिवार्य कर दी गई।

पोस्टर विवाद क्या था

स्टूडेंट्स यूनियन के अनुसार, यह सर्कुलर मुख्यतः सम्मेलन के दो प्रचार पोस्टरों के कारण जारी किया गया। एक पोस्टर में एक कॉकरोच को एक बूट के सामने चुनौती भरे अंदाज़ में खड़े दिखाया गया था, जबकि दूसरे में एक कॉकरोच को एक बड़े पर्दे को पीछे धकेलते हुए चित्रित किया गया था।

स्टूडेंट्स वेलफेयर के डायरेक्टर ने एक नोटिस जारी कर आरोप लगाया कि इन पोस्टरों में राजनीतिक संदेश थे और ये महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स कोड ऑफ कंडक्ट रूल्स, 2005 तथा यूनिवर्सिटी के अन्य नियमों का उल्लंघन करते हैं।

छात्रों का पक्ष और यूनिवर्सिटी की प्रतिक्रिया

स्टूडेंट्स यूनियन के प्रतिनिधि डायरेक्टर के समक्ष उपस्थित हुए और स्पष्ट किया कि पोस्टरों में भारत के चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी राजनीतिक दल का प्रतीक, पार्टी का झंडा या प्रचार सामग्री नहीं थी। यूनियन ने एक लिखित स्पष्टीकरण भी प्रस्तुत किया।

इस स्पष्टीकरण के बावजूद, वाइस-चांसलर ने सम्मेलन के लिए दी गई समस्त आर्थिक स्वीकृति वापस ले ली। इसके बाद स्टूडेंट्स यूनियन ने इस आदेश को चुनौती देते हुए केरल हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।

हाईकोर्ट का आदेश और आगे की राह

न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने अंतरिम रोक लगाते हुए वाइस-चांसलर का आदेश अगले आदेश तक निलंबित कर दिया है। विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा है और मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को निर्धारित की गई है।

यह मामला अब इस केंद्रीय प्रश्न पर टिका है कि क्या कॉकरोच के प्रतीक वाले पोस्टर राजनीतिक अभिव्यक्ति की श्रेणी में आते हैं — एक ऐसा सवाल जिसका उत्तर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई में तय होगा और जो भविष्य में विश्वविद्यालय परिसरों में छात्र अभिव्यक्ति की सीमाओं को परिभाषित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि विश्वविद्यालय परिसरों में छात्र अभिव्यक्ति की सीमाओं को लेकर एक बड़े टकराव का संकेत है। जब प्रशासन 'कॉकरोच' जैसे रूपक को राजनीतिक सामग्री घोषित कर फंड रोक सकता है, तो यह सवाल उठता है कि विश्वविद्यालयों में प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति की स्वीकार्य सीमा क्या है। हाईकोर्ट की अंतरिम रोक यह संकेत देती है कि प्रशासनिक विवेकाधिकार की भी न्यायिक समीक्षा होनी चाहिए। 10 सितंबर की सुनवाई केवल इस मामले का नहीं, बल्कि देशभर के विश्वविद्यालयों में छात्र स्वायत्तता की परिभाषा का भी एक पैमाना बन सकती है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल हाईकोर्ट ने MG यूनिवर्सिटी के खिलाफ क्या आदेश दिया?
केरल हाईकोर्ट ने 7 अगस्त 2026 को महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगाई, जिसमें स्टूडेंट्स यूनियन के राष्ट्रीय सम्मेलन की ₹3.75 लाख की फंडिंग वापस ली गई थी। न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने यह राहत यूनियन की याचिका पर दी।
कॉकरोच पोस्टर विवाद क्या है?
स्टूडेंट्स यूनियन ने अपने राष्ट्रीय सम्मेलन के प्रचार के लिए दो पोस्टर बनाए थे, जिनमें कॉकरोच को प्रतीकात्मक रूप से चित्रित किया गया था। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इन्हें राजनीतिक सामग्री मानते हुए फंड वापस लिया, जबकि छात्रों का कहना था कि पोस्टरों में किसी राजनीतिक दल का कोई प्रतीक नहीं था।
MG यूनिवर्सिटी ने सम्मेलन की फंडिंग क्यों रोकी?
यूनिवर्सिटी ने एक सर्कुलर जारी कर कहा कि विश्वविद्यालय के फंड से आयोजित कार्यक्रमों में राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति नहीं है। स्टूडेंट्स वेलफेयर के डायरेक्टर ने कॉकरोच पोस्टरों को महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स कोड ऑफ कंडक्ट रूल्स, 2005 का उल्लंघन बताया और वाइस-चांसलर ने फंड वापस ले लिया।
इस मामले में आगे क्या होगा?
मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को केरल हाईकोर्ट में होगी। तब तक वाइस-चांसलर का फंड वापसी आदेश निलंबित रहेगा। विस्तृत न्यायिक आदेश अभी प्रतीक्षित है।
स्टूडेंट्स यूनियन को कितना फंड मिला था और कितना रोका गया?
यूनिवर्सिटी ने राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए ₹3.75 लाख की आर्थिक सहायता स्वीकृत की थी। इसमें से ₹2.81 लाख (75%) पहले ही जारी किए जा चुके थे। वाइस-चांसलर ने पोस्टर विवाद के बाद समस्त वित्तीय स्वीकृति वापस ले ली।
राष्ट्र प्रेस
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