केरल हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग की स्वच्छ चुनाव के लिए सराहना की

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केरल हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग की स्वच्छ चुनाव के लिए सराहना की

सारांश

केरल हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग की सराहना की है, जिसने राज्य में स्वच्छ और अनुशासित चुनाव सुनिश्चित किए। इस बार चुनाव प्रचार में बैनर और पोस्टरों की भीड़ कम देखी गई। क्या यह एक नई राजनीतिक संस्कृति की शुरुआत है?

Key Takeaways

  • केरल हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग की सराहना की।
  • चुनाव प्रचार में बैनर और पोस्टरों की भीड़ कम रही।
  • चांडी ओम्मेन ने साइकिल से प्रचार किया।
  • 20 लाख रुपये में चुनाव प्रचार किया गया।
  • राज्य की राजनीतिक संस्कृति में बदलाव की उम्मीद है।

कोच्चि, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केरल हाईकोर्ट ने राज्य में शांतिपूर्ण और स्वच्छ चुनाव आयोजित करने के लिए निर्वाचन आयोग की सराहना की है। अदालत ने यह उल्लेख किया कि इस बार चुनाव प्रचार के दौरान बैनर, पोस्टर, झंडों और फ्लेक्स बोर्ड की भीड़भाड़ काफी हद तक अनुपस्थित रही, जो पहले सामान्य बात थी।

न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन ने राहुल के.टी. बनाम सेंट स्टीफंस मलनकारा कैथोलिक चर्च एवं अन्य मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। अमीकस क्यूरी हरीश वासुदेवन ने अदालत को बताया कि 9 अप्रैल को संपन्न हुए चुनाव में राज्य काफी हद तक अनावश्यक प्रचार सामग्री से मुक्त रहा।

अदालत ने स्वीकार किया कि भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने से यह संभव हो सका। इसने चुनावों में अनियंत्रित प्रचार सामग्री पर प्रभावी रोक लगाई।

हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले से जुड़े अन्य मुद्दे अभी भी लंबित हैं और समय की कमी के कारण सुनवाई को अदालत की छुट्टियों के बाद के लिए स्थगित कर दिया गया है।

इसी बीच, राज्य में चुनाव प्रचार के तरीकों में भी बदलाव देखा गया। पुथुप्पल्ली सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार चांडी ओम्मेन ने बिना फ्लेक्स बोर्ड के कम खर्च और जनसंपर्क पर आधारित प्रचार किया, जो काफी चर्चित रहा। वह अक्सर साइकिल पर क्षेत्र में घूमकर लोगों से वोट मांगते नजर आए।

उनके प्रचार को तब और बल मिला जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी उनके साथ साइकिल चलाते नजर आए। इससे सादगी और जनता से जुड़ाव का एक सकारात्मक संदेश गया।

चांडी ओम्मेन ने बताया कि उनका कुल चुनाव खर्च करीब 20 लाख रुपये रहा, जो दर्शाता है कि कम खर्च में भी नियमों का पालन करते हुए प्रभावी प्रचार संभव है।

गौरतलब है कि केरल में 9 अप्रैल को 140 विधानसभा सीटों के लिए मतदान हुआ था। हाईकोर्ट की इस सराहना और बदले हुए चुनावी रुझानों से राज्य की राजनीतिक संस्कृति में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है, जिसमें संयम, जिम्मेदारी और चुनावी नियमों के पालन को प्राथमिकता मिल रही है।

Point of View

बल्कि यह साबित करती है कि एक स्वच्छ और अनुशासित चुनाव व्यवस्था संभव है। यह बदलाव निश्चित रूप से राज्य की राजनीतिक संस्कृति में सकारात्मक बदलाव लाएगा।
NationPress
13/04/2026

Frequently Asked Questions

केरल हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग की सराहना क्यों की?
क्योंकि चुनाव आयोग ने राज्य में शांतिपूर्ण और स्वच्छ चुनाव सुनिश्चित किए।
क्या इस बार चुनाव प्रचार में कोई बदलाव देखा गया?
हाँ, इस बार प्रचार में बैनर और पोस्टरों की भीड़ कम थी।
चांडी ओम्मेन ने अपने प्रचार में क्या खास किया?
उन्होंने कम खर्च और जनसंपर्क आधारित प्रचार किया, जिसमें फ्लेक्स बोर्ड का उपयोग नहीं किया।
केरल में मतदान कब हुआ था?
केरल में 9 अप्रैल को 140 विधानसभा सीटों के लिए मतदान हुआ था।
क्या यह बदलाव राजनीतिक संस्कृति में स्थायी होगा?
यह बदलाव सकारात्मक है और इससे राजनीतिक संस्कृति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
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