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छात्र आंदोलनों में सिविल डिफेंस को पहली पंक्ति में रखें: किरण बेदी का सुझाव

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छात्र आंदोलनों में सिविल डिफेंस को पहली पंक्ति में रखें: किरण बेदी का सुझाव

सारांश

दिल्ली पुलिस पर 'संसद चलो' मार्च में बर्बरता के आरोपों के बीच किरण बेदी ने एक अलग रास्ता सुझाया — छात्र प्रदर्शनों में सिविल डिफेंस को पहली पंक्ति में रखो, दंगा-रोधी पुलिस को नहीं। बीएसएफ मॉडल पर आधारित यह विचार जवाबदेही और टकराव में कमी, दोनों का दावा करता है।

मुख्य बातें

पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने 23 जुलाई को एक्स पर वीडियो पोस्ट कर छात्र आंदोलनों में सिविल डिफेंस को पहली सुरक्षा पंक्ति बनाने का सुझाव दिया।
यह सुझाव 20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च के बाद आया, जिसमें दिल्ली पुलिस पर कथित बर्बरता के आरोप लगे।
बेदी के अनुसार सिविल डिफेंस जवानों के पास केन शील्ड, बॉडी आर्मर और हेलमेट होंगे, लेकिन लाठियाँ नहीं ।
दंगा-रोधी पुलिस केवल तभी आगे आए जब सिविल डिफेंस की पंक्ति खतरे में हो।
हर राज्य में सिविल डिफेंस और होम गार्ड पे-रोल पर मौजूद हैं — बेदी ने इन्हें तेज़ी से पुनः प्रशिक्षित कर तैनात करने योग्य बताया।

पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने 23 जुलाई को सुझाव दिया कि छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान दंगा-रोधी पुलिस की जगह सिविल डिफेंस के जवानों को सुरक्षा की पहली पंक्ति के रूप में तैनात किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, इस व्यवस्था से पुलिस बल के साथ सीधे टकराव और उस पर लगने वाले आरोपों से बचा जा सकेगा।

सुझाव की पृष्ठभूमि

यह सुझाव ऐसे समय में आया है जब 20 जुलाई को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए 'संसद चलो' मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित 'बर्बरता' के लिए दिल्ली पुलिस की व्यापक आलोचना हो रही थी। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि भीड़-नियंत्रण के दौरान बल-प्रयोग की सीमा क्या होनी चाहिए।

बीएसएफ मॉडल से तुलना

बेदी ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा एक वीडियो में कहा, 'ठीक उसी तरह जैसे सीमा पर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) तैनात होती है और सैनिक सीधे संपर्क में नहीं आते — बॉर्डर पर पहला संपर्क बीएसएफ का होता है। वैसे ही छात्र आंदोलन में भी पहला संपर्क सिविल डिफेंस का होना चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि सिविल डिफेंस जवानों के पास केन शील्ड, बॉडी आर्मर और हेलमेट हो सकते हैं, लेकिन उनके पास लाठियाँ नहीं होंगी। दंगा-रोधी पुलिस दूर रहकर स्थिति पर नज़र रखेगी और जानमाल की सुरक्षा तभी करेगी जब वास्तव में ज़रूरत हो।

कब आए दंगा-रोधी पुलिस

बेदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि दंगा-रोधी पुलिस को केवल तभी हस्तक्षेप करना चाहिए जब सिविल डिफेंस की पंक्ति 'तोड़ी जा रही हो या खतरे में हो।' उनका तर्क है कि इस तरह सशस्त्र पुलिस की तैनाती के लिए एक स्पष्ट और जवाबदेह कारण होगा, जिससे मनमाने बल-प्रयोग के आरोपों से बचा जा सकेगा।

सिविल डिफेंस की मौजूदा स्थिति

बेदी ने एक्स पर एक अन्य पोस्ट में बताया कि हर राज्य में सिविल डिफेंस और होम गार्ड के सदस्य 'भर्ती किए गए युवा पुरुष और महिलाएँ होते हैं जो पे-रोल पर होते हैं।' उन्होंने कहा, 'इसका मतलब है कि हम छात्र आंदोलनों के लिए उन्हें तेज़ी से इकट्ठा कर सकते हैं, दोबारा प्रशिक्षण दे सकते हैं और तैनात कर सकते हैं। इस तरह पुलिस बल के साथ टकराव और आरोपों से बचा जा सकता है — काफी समय और ऊर्जा की बचत हो सकती है।'

जवाबदेही और आगे का रास्ता

बेदी ने यह भी रेखांकित किया कि अगर सिविल डिफेंस प्रदर्शनकारियों से संपर्क की पहली कड़ी बनता है, तो 'छात्र प्रदर्शनकारियों पर यह ज़िम्मेदारी होगी कि वे दंगा-रोधी पुलिस को बुलाने के लिए उकसाने वाली हरकत न करें।' उन्होंने जोड़ा कि इस व्यवस्था में 'सिविल डिफेंस गवाह बन जाता है', जिससे आरोप-प्रत्यारोप के चक्र से बाहर निकला जा सकता है। वीडियो के अंत में उन्होंने कहा, 'यह एक ऐसा विचार है, जिस पर गौर किया जाना चाहिए।'

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक बड़ा सवाल अनुत्तरित है — सिविल डिफेंस की कमान और जवाबदेही की संरचना क्या होगी? बीएसएफ-सेना का मॉडल एक स्पष्ट कमांड चेन पर टिका है; सिविल डिफेंस में वह ढाँचा अभी उतना सुदृढ़ नहीं है। इसके अलावा, 'पहली पंक्ति' की परिभाषा धुंधली रहने पर यह व्यवस्था नई जवाबदेही की जगह नई जटिलता पैदा कर सकती है। फिर भी, भीड़-नियंत्रण में गैर-लाठीधारी बफर की अवधारणा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परखी जा चुकी है और इस पर गंभीर नीतिगत बहस की ज़रूरत है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किरण बेदी ने छात्र आंदोलनों के लिए क्या सुझाव दिया?
किरण बेदी ने सुझाव दिया कि छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान दंगा-रोधी पुलिस की जगह सिविल डिफेंस के जवानों को पहली सुरक्षा पंक्ति के रूप में तैनात किया जाए। उनके अनुसार इससे पुलिस पर लगने वाले बर्बरता के आरोपों और सीधे टकराव से बचा जा सकेगा।
यह सुझाव किस घटना के बाद आया?
यह सुझाव 20 जुलाई को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए 'संसद चलो' मार्च के बाद आया, जिसमें दिल्ली पुलिस पर छात्र प्रदर्शनकारियों के साथ कथित बर्बरता के आरोप लगे थे।
सिविल डिफेंस के जवानों के पास क्या होगा और क्या नहीं?
बेदी के प्रस्ताव के अनुसार सिविल डिफेंस जवानों के पास केन शील्ड, बॉडी आर्मर और हेलमेट होंगे, लेकिन उनके पास लाठियाँ नहीं होंगी। दंगा-रोधी पुलिस केवल तभी हस्तक्षेप करेगी जब सिविल डिफेंस की पंक्ति खतरे में हो।
क्या भारत में सिविल डिफेंस पहले से मौजूद है?
हाँ, बेदी के अनुसार हर राज्य में सिविल डिफेंस और होम गार्ड के सदस्य पहले से पे-रोल पर मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि इन्हें तेज़ी से पुनः प्रशिक्षित कर छात्र आंदोलनों में तैनात किया जा सकता है।
बेदी के अनुसार इस व्यवस्था से छात्रों पर क्या ज़िम्मेदारी आएगी?
बेदी का कहना है कि अगर सिविल डिफेंस पहली कड़ी बने, तो छात्र प्रदर्शनकारियों पर यह ज़िम्मेदारी होगी कि वे ऐसी कोई हरकत न करें जो दंगा-रोधी पुलिस को बुलाने का कारण बने। इससे आरोप-प्रत्यारोप के चक्र से बाहर निकला जा सकेगा।
राष्ट्र प्रेस
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