रांची में लग्जरी गाड़ियां गिरवी रखकर करोड़ों की ठगी, महिला सूत्रधार समेत तीन गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
ओरमांझी थाना पुलिस, रांची ने 30 अक्टूबर 2026 को एक संगठित वाहन-ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए मुख्य सूत्रधार महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपी किराये पर लग्जरी गाड़ियां लेकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उन्हें गिरवी रख देते थे। प्रारंभिक जांच के अनुसार गिरोह ने 20-25 से अधिक ट्रैवल एजेंसियों और निजी वाहन मालिकों को निशाना बनाया, और ठगी की कुल रकम करोड़ों रुपये तक पहुंचने की आशंका है।
मुख्य आरोपी और गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार तीनों आरोपियों की पहचान ज्योति कुमारी, विश्वजीत कुमार और मनोज कुमार के रूप में हुई है। ज्योति कुमारी गिरोह की मुख्य सूत्रधार थी, जो वाहन मालिकों और ट्रैवल एजेंसियों से सीधे संपर्क कर गाड़ियां किराये पर लेती थी। विश्वजीत कुमार रातू रोड स्थित शुभ यात्रा ट्रैवल्स का संचालक बताया गया है, जबकि मनोज कुमार गिरोह के एजेंट के रूप में कार्य करता था और वाहनों को गिरवी रखने हेतु लोगों तथा ठिकानों की तलाश करता था।
गिरोह के काम करने का तरीका
पुलिस की प्रारंभिक पड़ताल में सामने आया कि गिरोह सुनियोजित तरीके से काम करता था। पहले ज्योति कुमारी वाहन मालिकों से संपर्क कर स्कॉर्पियो, फॉर्च्यूनर और बोलेरो जैसी लग्जरी गाड़ियां किराये पर लेती थी। शुरुआती कुछ महीनों तक वाहन मालिकों को समय पर किराया दिया जाता था, ताकि उनका विश्वास अर्जित किया जा सके।
इसके बाद गिरोह कथित तौर पर वाहनों के फर्जी ओनरशिप एग्रीमेंट, अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) और अन्य जाली दस्तावेज तैयार करता था। इन नकली दस्तावेजों के सहारे गाड़ियों को रांची और आसपास के इलाकों में ₹3 लाख से ₹5 लाख प्रति वाहन की दर से गिरवी रख दिया जाता था और एकमुश्त रकम हासिल कर ली जाती थी।
पीड़ितों को कैसे हुई ठगी का एहसास
जब वाहन मालिकों को किराया मिलना बंद हुआ और ज्योति कुमारी से संपर्क टूट गया, तब उन्हें संदेह हुआ। कई मालिकों ने अपनी गाड़ियों में लगे जीपीएस ट्रैकर की लोकेशन जांची, तो पता चला कि वाहन बताए गए स्थान पर नहीं, बल्कि दूसरे इलाकों और गैरेज में खड़े हैं। इसके बाद पीड़ित वाहन मालिकों ने एकजुट होकर ओरमांझी थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने गुप्त सूचना और तकनीकी जांच के आधार पर छापेमारी कर तीनों आरोपियों को दबोचा।
आरोपियों का आपराधिक इतिहास
पुलिस के मुताबिक, विश्वजीत कुमार के खिलाफ कांके और ओरमांझी थानों में हत्या तथा आर्म्स एक्ट सहित कई आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी मिली है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब रांची में संगठित वाहन-धोखाधड़ी के मामले बढ़ते देखे जा रहे हैं।
आगे की जांच
पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों, जाली दस्तावेज तैयार करने वालों और वाहनों को ठिकाने लगाने में सहयोग करने वाले लोगों की तलाश कर रही है। ठगी की कुल रकम और प्रभावित वाहन मालिकों की वास्तविक संख्या का पता लगाया जा रहा है। जांच के आगे बढ़ने के साथ गिरोह के और सदस्यों के नाम उजागर होने की संभावना है।