कोलकाता भगदड़: पंडाल कोषाध्यक्ष सानिब राहा गिरफ्तार, भ्रामक घोषणा से 19 की गई थी जान
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता पुलिस ने 22 अक्टूबर 2026 को उस व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक की, जिसे 17 अक्टूबर की रात उत्तरी कोलकाता के चोरबागन सार्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में भ्रामक माइक घोषणा करने के संदेह में हिरासत में लिया गया था। इस घोषणा के चलते मची भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्ति का नाम सानिब राहा उर्फ सेंटू है।
मुख्य घटनाक्रम
कोलकाता पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त (अपराध) कुणाल अग्रवाल ने पुष्टि की कि सानिब राहा चोरबागन सार्वजनिन की सामुदायिक दुर्गा पूजा आयोजन समिति का कोषाध्यक्ष था। राहा को गुरुवार को दिन में पश्चिम बंगाल के नदिया जिले से गिरफ्तार किया गया और मध्य कोलकाता के लालबाजार स्थित शहर पुलिस मुख्यालय लाया गया।
फिलहाल राहा से गहन पूछताछ जारी है। जाँचकर्ता यह जानना चाहते हैं कि उसने पंडाल में घबराहट फैलाने वाली घोषणा क्यों की और क्या उसने यह कदम स्वेच्छा से उठाया या किसी के निर्देश पर।
भगदड़ की परिस्थितियाँ
17 अक्टूबर की रात पंडाल में पहले से ही अफरा-तफरी का माहौल था, क्योंकि बारिश के कारण बाहर मौजूद श्रद्धालु अंदर आने की कोशिश कर रहे थे, जबकि अंदर मौजूद लोग भीगने के डर से बाहर निकलने से हिचक रहे थे। इसी भीड़भाड़ के बीच माइक पर यह भ्रामक घोषणा की गई कि पंडाल का ढाँचा गिर सकता है और लोगों को तुरंत बाहर निकल जाना चाहिए।
घोषणा सुनते ही सैकड़ों लोग एक साथ निकास द्वार की तरफ भागे। कुछ लोग प्रवेश द्वार से भी बाहर निकलने की कोशिश करने लगे, जिससे धक्का-मुक्की और अंततः भीषण भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस हादसे में 19 लोगों की जान चली गई।
समानांतर जाँच
इस मामले में दो अलग-अलग जाँच एक साथ चल रही हैं। पहली जाँच कोलकाता पुलिस की विशेष जाँच टीम (SIT) द्वारा की जा रही है, जिसका नेतृत्व शहर पुलिस के डिटेक्टिव डिपार्टमेंट (DD) से जुड़े सहायक आयुक्त (AC) रैंक के एक अधिकारी कर रहे हैं।
दूसरी जाँच राज्य सरकार द्वारा गठित न्यायिक जाँच पैनल कर रहा है, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस अनिंदिता रॉय सरस्वती (सेवानिवृत्त) कर रही हैं। इस पैनल को तीन महीनों के भीतर राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।
आगे की कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, राहा से पूछताछ में जो तथ्य सामने आएँगे, उन्हीं के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब दुर्गा पूजा जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक घोषणाओं की जाँच और भीड़ नियंत्रण प्रोटोकॉल को और सख्त बनाने की ज़रूरत है।