20 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

KTR का पवन कल्याण पर पलटवार: ‘तेलंगाना को देशभक्ति का पाठ पढ़ाने की जरूरत नहीं’

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
KTR का पवन कल्याण पर पलटवार: ‘तेलंगाना को देशभक्ति का पाठ पढ़ाने की जरूरत नहीं’

सारांश

पवन कल्याण के तेलंगाना पर तीखे बयानों के जवाब में KTR ने सीधा प्रहार किया — ‘हमें देशभक्ति का पाठ नहीं चाहिए।’ GDP में 5% योगदान, पोट्टी श्रीरामुलु का 58 दिन का अनशन और 60 साल के अलग राज्य संघर्ष का हवाला देकर BRS नेता ने जन सेना प्रमुख की राजनीति में दखल देने की कोशिश को खुली चुनौती दे दी है।

मुख्य बातें

BRS कार्यकारी अध्यक्ष KTR ने हैदराबाद में आंध्र उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण पर तीखा हमला बोला।
KTR का दावा — तेलंगाना भारत का 3% से कम हिस्सा है, पर GDP में योगदान 5% ।
पवन कल्याण की ‘क्षेत्रवाद आतंकवाद से खतरनाक’ टिप्पणी पर पोट्टी श्रीरामुलु के 58 दिन के अनशन का हवाला।
KTR का तंज — पवन कल्याण और परिवार 12 साल से हैदराबाद में रह रहे हैं, किसी ने नहीं रोका।
तेलंगाना 2014 में 60 साल के संघर्ष के बाद बना — ‘मिट्टी के बेटों की जागीर’।

भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव (KTR) ने बुधवार को हैदराबाद में आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और जन सेना पार्टी प्रमुख पवन कल्याण पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि तेलंगाना को उनसे देशभक्ति का कोई पाठ पढ़ने की जरूरत नहीं है। हैदराबाद प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत में KTR ने यह प्रतिक्रिया पवन कल्याण की मंगलवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई टिप्पणियों पर दी।

‘संघर्ष और बलिदान हमारे लिए नई बात नहीं’

KTR ने कहा, ‘हमें पवन कल्याण से देशभक्ति का पाठ पढ़ाने की जरूरत नहीं है। संघर्ष और बलिदान हमारे लिए कोई नई बात नहीं है।’ उन्होंने याद दिलाया कि तेलंगाना भारत का तीन प्रतिशत से भी कम हिस्सा है, लेकिन देश की GDP में इसका योगदान पाँच प्रतिशत है।

BRS नेता ने जोड़ा, ‘हमें किसी तरह के नैतिक उपदेश या नैतिक निगरानी की जरूरत नहीं है। हम आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के रूप में उनका सम्मान करते हैं। एक कलाकार और अभिनेता के रूप में हम उनकी प्रशंसा करते हैं। अगर वे भाई की तरह हमसे मिलने आते हैं, तो हम उन्हें हैदराबादी बिरयानी खिलाएंगे, लेकिन अगर वे हमारी राजनीति में अपना दबदबा कायम करने की कोशिश करते हैं तो हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।’

‘मिट्टी के बेटों की जागीर है तेलंगाना’

पवन कल्याण के इस बयान कि ‘तेलंगाना किसी के बाप की जागीर नहीं है’ पर प्रतिक्रिया देते हुए KTR ने कहा कि तेलंगाना निश्चित रूप से यहाँ की मिट्टी के बेटों की जागीर है और इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2014 में अलग राज्य बनने के लिए तेलंगाना ने 60 वर्षों का लंबा संघर्ष किया है।

‘क्षेत्रवाद आतंकवाद से खतरनाक’ टिप्पणी पर पलटवार

पवन कल्याण की इस टिप्पणी पर कि ‘क्षेत्रवाद आतंकवाद से अधिक खतरनाक है’, KTR ने सवाल किया कि तेलुगु राज्य की माँग को लेकर 58 दिनों तक अनशन कर अपने प्राणों की आहुति देने वाले पोट्टी श्रीरामुलु के बारे में वह क्या कहेंगे। BRS नेता ने पवन कल्याण से यह भी पूछा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कथित तौर पर तेलंगाना आने वाले उद्योगों को गुजरात ले जाने पर उनकी क्या राय है।

चुनाव लड़ने पर BRS का रुख

तेलंगाना में चुनाव लड़ने की पवन कल्याण की घोषणा पर KTR ने कहा कि भारतीय संविधान के तहत किसी भी नागरिक को राजनीतिक दल बनाने और किसी भी राज्य से चुनाव लड़ने का अधिकार है। हालाँकि उन्होंने जोड़ा कि किसी राज्य से चुनाव लड़ने वाले नेता को वहाँ के लोगों की आकांक्षाओं, संघर्षों और बलिदानों का सम्मान करना चाहिए।

KTR ने याद दिलाया कि जन सेना तेलंगाना में 2023 के विधानसभा चुनाव और हाल के नगर निकाय चुनाव लड़ चुकी है, और पवन कल्याण व उनका परिवार पिछले 12 वर्षों से हैदराबाद में रह रहा है तथा उनके व्यवसाय भी यहीं हैं — किसी ने उन्हें नहीं रोका।

‘घुमा-फिराकर मत कहिए’

KTR ने तेलंगाना के गठन के तरीके को लेकर पवन कल्याण की टिप्पणी पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, ‘आप कहते हैं कि आपको तेलंगाना के गठन का तरीका पसंद नहीं आया। घुमा-फिराकर कहने की बजाय साफ-साफ कहिए कि आपको तेलंगाना राज्य का गठन पसंद नहीं था।’ आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच यह जुबानी जंग और तेज होने की संभावना है, खासकर तब जब जन सेना तेलंगाना में अपना राजनीतिक विस्तार करने की तैयारी में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि तेलंगाना की राजनीतिक पहचान को लेकर एक गहरी लड़ाई का संकेत है। 2023 की हार के बाद BRS के लिए ‘तेलंगाना अस्मिता’ ही वह कार्ड बचा है जिस पर वह कांग्रेस और BJP दोनों के सामने खुद को प्रासंगिक रख सकती है — और पवन कल्याण की टिप्पणियाँ KTR के लिए तोहफा बनकर आई हैं। दूसरी ओर, जन सेना का तेलंगाना में विस्तार BJP-नीत NDA की दक्षिणी रणनीति का हिस्सा है, जो आंध्र-तेलंगाना के बीच पुराने भावनात्मक घावों को फिर हरा कर सकती है। असली सवाल यह है कि क्या तेलंगाना का मतदाता 12 साल बाद भी ‘बाहरी बनाम स्थानीय’ की बहस में उलझेगा, या आर्थिक मुद्दों को तरजीह देगा।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

KTR ने पवन कल्याण पर क्या आरोप लगाया है?
BRS कार्यकारी अध्यक्ष KTR ने हैदराबाद प्रेस क्लब में कहा कि तेलंगाना को पवन कल्याण से देशभक्ति का कोई पाठ सीखने की जरूरत नहीं है। उन्होंने जन सेना प्रमुख पर तेलंगाना की राजनीति में दबदबा कायम करने की कोशिश का आरोप लगाया और चेताया कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पवन कल्याण ने तेलंगाना को लेकर क्या कहा था?
मंगलवार को हैदराबाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन कल्याण ने कथित तौर पर कहा था कि ‘तेलंगाना किसी के बाप की जागीर नहीं है’ और ‘क्षेत्रवाद आतंकवाद से अधिक खतरनाक है’। उन्होंने तेलंगाना के गठन के तरीके पर भी असहमति जताई थी।
KTR ने तेलंगाना के GDP योगदान का जिक्र क्यों किया?
KTR ने रेखांकित किया कि तेलंगाना भारत का तीन प्रतिशत से कम हिस्सा होने के बावजूद देश की GDP में पाँच प्रतिशत का योगदान देता है। यह तर्क उन्होंने तेलंगाना की आर्थिक और राजनीतिक स्वायत्तता को सही ठहराने के लिए दिया।
पोट्टी श्रीरामुलु का जिक्र इस विवाद में क्यों आया?
KTR ने पवन कल्याण के ‘क्षेत्रवाद आतंकवाद से खतरनाक’ बयान का जवाब देते हुए पोट्टी श्रीरामुलु का हवाला दिया, जिन्होंने तेलुगु राज्य की माँग को लेकर 58 दिनों तक अनशन कर अपनी जान दे दी थी। उनका तर्क था कि क्षेत्रीय अस्मिता का संघर्ष आतंकवाद नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकार है।
क्या पवन कल्याण की पार्टी तेलंगाना में चुनाव लड़ सकती है?
KTR के अनुसार, भारतीय संविधान के तहत किसी भी दल को किसी भी राज्य में चुनाव लड़ने का अधिकार है और कोई पवन कल्याण को नहीं रोक रहा। जन सेना पहले ही तेलंगाना में 2023 के विधानसभा चुनाव और हाल के नगर निकाय चुनाव लड़ चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले