भोजशाला फैसले पर कुमार विश्वास बोले — ओवैसी कुलवंश का इतिहास पढ़ें, भगवती के सामने नतमस्तक होंगे
सारांश
मुख्य बातें
कवि कुमार विश्वास शनिवार, 16 मई को अपने परिवार के साथ वृंदावन पहुँचे और साध्वी ऋतंभरा के आश्रम वात्सल्य ग्राम स्थित संविद गुरुकुलम गर्ल्स सैनिकल में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर संबंधी फैसले का स्वागत करते हुए इसे भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के लिए गौरव का क्षण बताया।
भोजशाला फैसले पर कुमार विश्वास की प्रतिक्रिया
मीडिया से बातचीत में कुमार विश्वास ने कहा, 'राम जन्मभूमि संघर्ष एक ऐसी परंपरा रही है, जिससे मैं अपने पारिवारिक विरासत के कारण बचपन से जुड़ा रहा हूँ। देवी मां के दर्शन तब भी किए और यह दुर्भाग्य का विषय है, दुख का विषय है कि कितने वर्ष लगे, लेकिन कालांतर में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से यह सुख प्राप्त हुआ और आज भगवान वहाँ अपने विग्रह में विराजमान हैं। आज भोजशाला का निर्णय आया है तो मन में दूना हर्ष है।'
उन्होंने इस फैसले को भारतीय सांस्कृतिक इतिहास की दृष्टि से महत्वपूर्ण करार दिया और कहा कि यह सनातन परंपराओं की पुनर्स्थापना की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
ओवैसी पर कुमार विश्वास का तीखा बयान
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के भोजशाला फैसले पर दिए गए बयान के संदर्भ में कुमार विश्वास ने कहा, 'ओवैसी से मेरा एक अनुरोध है। वे सुशिक्षित व्यक्ति हैं। वे एक बैरिस्टर हैं, लोग ऐसा कहते हैं। हालाँकि भाषा से कई बार नहीं लगता। मैं आशा करता हूँ उनसे कि वे भारतीय सांस्कृतिक इतिहास भी पढ़ें और अपने कुलवंश का इतिहास भी पढ़ें, जिसमें चार पीढ़ी बाद ही उन्हें स्वयं के इसी परंपरा में खड़े होने का बोध प्राप्त हो जाएगा, तो वे भी भगवती के सामने उसी प्रकार नतमस्तक होंगे, जैसे उनके परदादा के पिता नतमस्तक होते थे।'
विश्वास ने आगे कहा, 'दो-तीन पीढ़ी पहले मतांतरण कर लेने के कारण इतना विद्वेष और इतनी प्रकार की घृणा फैलाना उचित नहीं है।' उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की है।
प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर विश्वास का रुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनता से की गई अपील पर कुमार विश्वास ने कहा, 'प्रधानमंत्री विश्व के खतरों से भली-भाँति परिचित हैं। यदि उन्होंने जनता से अपील की है, तो भारत के समग्र विकास के लिए उनकी अपील पर विचार किया जाना चाहिए।' साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सत्ताधारी दल की कमियों को उजागर करना और उनके विरुद्ध आवाज़ उठाना विपक्ष का अधिकार एवं कर्तव्य है।
साध्वी ऋतंभरा का वक्तव्य
साध्वी ऋतंभरा ने भोजशाला फैसले को सनातन अनुयायियों के लिए ऐतिहासिक जीत बताते हुए कहा, 'गुलामी के कालखंड के दौरान आक्रांताओं ने हमारे धार्मिक स्थानों पर कब्जा कर लिया था। अदालत ने बहुत ही सुखद फैसला सुनाया है। हम इसके लिए न्यायपालिका और वकीलों का धन्यवाद और अभिनंदन करते हैं।'
उन्होंने आगे कहा, 'अच्छे फैसलों से देश का स्वाभिमान जागता है। मां सरस्वती के आने का हमें पूरा विश्वास है। कोर्ट के आदेश का सरकार जरूर पालन करेगी। भगवती सरस्वती जल्द ही इंग्लैंड से आएं और गर्भ गृह में उनकी प्रतिष्ठा हो।'
आगे क्या होगा
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद भोजशाला परिसर के भविष्य को लेकर कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएँ तेज होने की संभावना है। साध्वी ऋतंभरा के अनुसार, इंग्लैंड में स्थित भगवती सरस्वती की प्रतिमा को वापस लाकर गर्भ गृह में स्थापित करने की माँग अब और प्रबल हो गई है। सनातन संगठनों ने न्यायपालिका के फैसले का अनुपालन सुनिश्चित करने की अपेक्षा सरकार से जताई है।