कुण्डलिनी शक्ति-विकासक क्रिया: थकान और सुस्ती से निपटने का बेहतरीन उपाय
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान की तेज तर्रार और सुविधाजनक जीवनशैली ने कामों को किंतु आसान बना दिया है, लेकिन इसके साथ ही शारीरिक गतिविधियों में कमी आ गई है। पहले दिनचर्या के कामों में ही काफी शारीरिक मेहनत होती थी, जबकि अब अधिकतर कार्य मशीनों और तकनीक के माध्यम से संपादित हो रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप, लोग अक्सर थकान, सुस्ती और एकाग्रता में कमी का अनुभव करते हैं।
स्वास्थ्य और ताजगी बनाए रखने के लिए नियमित व्यायाम, पौष्टिक भोजन, पर्याप्त नींद और सक्रिय जीवनशैली अपनाना अत्यंत आवश्यक है। इसी संदर्भ में, भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने 'कुण्डलिनी शक्ति-विकासक क्रिया' को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने का सुझाव दिया है। मंत्रालय का मानना है कि यह योगिक क्रिया न केवल शरीर को ऊर्जावान बनाती है, बल्कि मानसिक एकाग्रता को भी बढ़ाती है।
आयुष मंत्रालय ने इस क्रिया को करने की विधि भी साझा की है। सबसे पहले, अपने पैरों के बीच चार अंगुल का अंतर रखते हुए सीधे खड़े हो जाएं। फिर बारी-बारी से घुटने से नीचे के हिस्से को पीछे की ओर मोड़ते हुए एड़ी को नितंबों से स्पर्श कराएं। इसके बाद, पैरों को धीरे-धीरे वापस अपनी पूर्व स्थिति में ले आएं। मंत्रालय ने सलाह दी है कि आप शुरुआत में इस क्रिया को 20 से 25 बार करें और बाद में इसे अपने शरीर की क्षमता के अनुसार बढ़ाते रहें।
कुण्डलिनी शक्ति-विकासक क्रिया एक शक्तिशाली योगिक अभ्यास है, जिसे सुबह नियमित रूप से करने से शरीर में ताजगी आती है और थकान और सुस्ती को दूर करने में मदद मिलती है। यह क्रिया कार्य के प्रति एकाग्रता बनाए रखने में सहायक होती है।