लद्दाख के सातों जिलों में स्वायत्त विकास परिषद: BJP सांसद तरुण चुघ ने सराहा केंद्र का फैसला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद तरुण चुघ ने 14 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार के उस फैसले का स्वागत किया, जिसके तहत लद्दाख के सातों जिलों में ऑटोनोमस डेवलपमेंट काउंसिल (स्वायत्त विकास परिषद) गठित की जाएंगी। उन्होंने इसे सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास की दिशा में एक दूरदर्शी और ऐतिहासिक पहल बताया।
मुख्य घटनाक्रम
चुघ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय दशकों से विकास की मुख्यधारा से कटे दूर-दराज के इलाकों को जोड़ने का काम करेगा। उनके अनुसार, स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाना और प्रशासन को आम जनता के निकट लाना इस पहल का मूल उद्देश्य है।
सांसद ने यह भी कहा कि इस कदम से लद्दाख में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे, प्रशासनिक तंत्र अधिक प्रभावी बनेगा और जनता तक शासन की पहुंच सुदृढ़ होगी। उनके अनुसार यह निर्णय लद्दाख के सांस्कृतिक संरक्षण और जनभागीदारी के एक नए अध्याय की शुरुआत करता है।
अंकित शर्मा हत्याकांड पर प्रतिक्रिया
इसी बातचीत में चुघ ने अंकित शर्मा हत्याकांड में अदालत द्वारा ताहिर हुसैन को दोषी ठहराए जाने के फैसले पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने इसे न्याय, संविधान और कानून के शासन की जीत बताया। उनका कहना था कि इस फैसले से यह स्पष्ट संदेश गया है कि आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून के सामने जवाब देना ही पड़ेगा।
चुघ ने आम आदमी पार्टी (AAP) और उसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि तत्कालीन पार्षद ताहिर हुसैन को राजनीतिक संरक्षण क्यों दिया गया। उन्होंने केजरीवाल से दिल्ली की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
विपक्ष पर निशाना
BJP सांसद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि इन नेताओं ने पीड़ितों के बजाय आरोपियों के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया। चुघ ने कहा कि दोष सिद्ध होने के बाद भी ताहिर हुसैन का बचाव करना न्यायपालिका और कानून के शासन का अपमान है।
उन्होंने कहा कि BJP दिल्ली दंगों के पीड़ित परिवारों को पूर्ण न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में हर संभव कदम उठाया जाएगा।
आगे क्या
लद्दाख के सातों जिलों में स्वायत्त विकास परिषदों के गठन की प्रक्रिया और इसका क्रियान्वयन-ढांचा अभी स्पष्ट किया जाना बाकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन परिषदों की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उन्हें कितने वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार दिए जाते हैं। यह कदम लद्दाख की जनता की लंबे समय से चली आ रही स्वायत्त प्रतिनिधित्व की मांग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।