MP पाठ्यक्रम में विक्रमादित्य की जीवनी होगी शामिल, CM मोहन यादव का बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 21 मई 2025 को घोषणा की कि राज्य के स्कूली पाठ्यक्रम में सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी को शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही भगवान श्रीकृष्ण के गुरु महर्षि सांदीपनि के जीवन पर एक विशेष पुस्तक भी तैयार की जाएगी। यह घोषणा उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान की।
पाठ्यक्रम में क्या बदलेगा
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि आने वाले शैक्षणिक सत्र में मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की पूरी तस्वीर बदलेगी। नए सिलेबस में सम्राट वीर विक्रमादित्य की जीवनी को स्थान दिया जाएगा, जबकि महर्षि सांदीपनि के जीवन पर एक रोचक पुस्तक भी तैयार की जाएगी। उनका कहना था कि स्कूल केवल शिक्षा के केंद्र नहीं बनेंगे, बल्कि ऐसे विद्यार्थी भी तैयार करेंगे जो संस्था के विकास में सहायक बनें।
व्यावसायिक और तकनीकी शिक्षा पर जोर
सीएम यादव ने निर्देश दिए कि हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी कक्षाओं में कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य रोजगारपरक विषयों की पढ़ाई कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कौशल को पाठ्यक्रम से जोड़ने की एक कार्य योजना तैयार की जाए। क्षेत्रीय स्व-सहायता समूहों को भी स्कूलों और विद्यार्थियों से जोड़ने का सुझाव दिया गया।
सरकार की अन्य प्राथमिकताएँ
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों में NCC और NSS जैसी सामाजिक सेवाओं को बढ़ावा दिया जाए। इसके अलावा स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, ड्राइविंग लाइसेंस कैंप और प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग सुविधाएँ भी उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएँ। उन्होंने यह भी कहा कि 16 जून से शुरू हो रहे नए शैक्षणिक सत्र से पहले सभी व्यवस्थाएँ पूरी कर ली जाएँ।
नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि
बैठक में स्कूल शिक्षा सचिव ने बताया कि वर्ष 2024-25 की तुलना में 2025-26 में सरकारी स्कूलों की कक्षा-1 में नामांकन में करीब 32.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। कक्षा 9 से 12 में भी नामांकन में 4.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले वर्षों की तुलना में सर्वाधिक है। प्रदेश के 26 स्कूलों ने शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम दिया है और उन्हें सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाएगा।
आगे की राह
मुख्यमंत्री यादव ने यह भी निर्देश दिए कि 12वीं कक्षा के बाद सरकारी स्कूल के विद्यार्थी उच्च शिक्षा, रोजगार, कृषि, कौशल प्रशिक्षण या पैतृक व्यवसाय में से किस क्षेत्र में जा रहे हैं, इसकी ट्रैकिंग की जाए। इससे सरकार के पास युवाओं का एक व्यापक डेटाबेस तैयार होगा, जो भविष्य की नीति-निर्माण में सहायक बनेगा। यह कदम मध्य प्रदेश को एक शिक्षा-केंद्रित और आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।