'माफीवीर' राहुल गांधी: भाजपा नेता तजिंदर बग्गा ने दिल्ली में लगाए विवादित पोस्टर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने 2 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ पोस्टर अभियान चलाया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय चौहान से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में राहुल गांधी द्वारा लिखित खेद व्यक्त किए जाने के बाद भाजपा ने उन्हें 'माफीवीर' की संज्ञा दी है।
पोस्टर में क्या दिखाया गया
इन पोस्टरों में एक ओर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ओरी की तस्वीर के साथ 'आई एम ओरी' लिखा गया, जबकि दूसरी ओर राहुल गांधी की तस्वीर के नीचे 'आई एम सॉरी' अंकित किया गया। पोस्टर के निचले हिस्से में कार्तिकेय चौहान से हाल ही में मांगी गई कानूनी माफी का स्पष्ट उल्लेख है।
बग्गा ने इन पोस्टरों को अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर भी साझा किया और लिखा — 'माफीवीर राहुल गांधी।'
मानहानि मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद 2018 में मध्य प्रदेश में एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी की कथित टिप्पणियों से उपजा था। कार्तिकेय सिंह की शिकायत के अनुसार, राहुल गांधी ने पनामा पेपर्स विवाद का संदर्भ देते हुए उनका नाम लिया था, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
शिकायत के बाद सांसदों-विधायकों के मामलों की सुनवाई करने वाली भोपाल की विशेष अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी किया। इस पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) नेता ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया और समन तथा मानहानि की कार्यवाही दोनों को रद्द कराने की माँग की।
उच्च न्यायालय में क्या हुआ
उच्च न्यायालय में दाखिल याचिका में राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि विवादित टिप्पणियाँ कार्तिकेय सिंह के बारे में नहीं थीं। याचिका में उन बयानों के लिए 'अफसोस' भी जताया गया जिन पर मानहानि का मुकदमा चल रहा था।
इसके बाद मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राहुल गांधी की ओर से लिखित खेद और कार्तिकेय की ओर से उसे स्वीकार किए जाने के बाद आपराधिक मानहानि की कार्यवाही समाप्त करने के निर्देश दिए।
भाजपा की राजनीतिक प्रतिक्रिया
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद से भाजपा लगातार राहुल गांधी पर हमलावर रही है। पार्टी ने इस माफी को राजनीतिक हथियार बनाते हुए 'माफीवीर' शब्द का प्रयोग शुरू किया है। आलोचकों का कहना है कि भाजपा इस मुद्दे को कांग्रेस की छवि को कमज़ोर करने के लिए भुना रही है, जबकि कांग्रेस का पक्ष है कि यह कानूनी प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा था।
यह ऐसे समय में आया है जब दोनों दलों के बीच संसद के भीतर और बाहर तीखी नोकझोंक जारी है। आने वाले दिनों में यह पोस्टर विवाद दिल्ली की राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।