23 सितंबर 2026
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महाराष्ट्र में गंभीर सूखे का संकट: CM फडणवीस मराठवाड़ा-सोलापुर दौरे पर, DCM शिंदे विदर्भ में, राहत पैकेज का भरोसा

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महाराष्ट्र में गंभीर सूखे का संकट: CM फडणवीस मराठवाड़ा-सोलापुर दौरे पर, DCM शिंदे विदर्भ में, राहत पैकेज का भरोसा

सारांश

अल नीनो की मार से मराठवाड़ा, विदर्भ और खानदेश में फसलें तबाह हैं। CM फडणवीस और DCM शिंदे खुद खेतों में उतरे हैं। कैबिनेट उप-समिति को पूर्ण शक्तियाँ, शनिवार तक सूखे की अधिसूचना और केंद्र को NDRF प्रस्ताव — यह महाराष्ट्र की राज्य मशीनरी की तत्काल जवाबदेही की परीक्षा है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस लातूर, धाराशिव और सोलापुर जिलों का व्यक्तिगत दौरा कर रहे हैं; उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बुलढाणा, अकोला और अमरावती में नेतृत्व कर रहे हैं।
अल नीनो के कारण कम बारिश से सोयाबीन, मक्का, कपास और धान की फसलें बुरी तरह प्रभावित हैं।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में कैबिनेट उप-समिति गठित; इसे पूर्ण कैबिनेट के बराबर अधिकार दिए गए।
फसल नुकसान का पंचनामा बुधवार से शुरू; सूखे की अधिसूचना शनिवार तक जारी होगी।
जालना के 8 तालुकों और 52 राजस्व मंडलों के लिए कलेक्टर आशिमा मित्तल ने केंद्रीय 'वॉर रूम' का आदेश दिया।
केंद्र सरकार का इंतज़ार किए बिना राहत देने का भरोसा; NDRF नियमों के तहत केंद्र को औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाएगा।

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा, विदर्भ, खानदेश और पश्चिमी महाराष्ट्र में गंभीर सूखे का संकट गहराता जा रहा है, जिसके मद्देनज़र मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 23 सितंबर 2026 को फील्ड निरीक्षण अभियान शुरू किया। अल नीनो की वजह से हुई कम बारिश ने सोयाबीन, मक्का, कपास और धान की फसलों को बुरी तरह तबाह कर दिया है, जिससे लाखों किसानों की आजीविका खतरे में पड़ गई है और पीने के पानी व पशुओं के चारे का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।

मुख्यमंत्री का व्यापक दौरा और कैबिनेट उप-समिति

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस लातूर, धाराशिव और सोलापुर जिलों का व्यापक निरीक्षण दौरा कर रहे हैं। वे औसा और निलंगा तालुका के जौ, खरोसा और लमजाना गाँवों में सूखी और नमी की कमी से जूझ रही फसलों का जायज़ा ले रहे हैं। भाजपा विधायक अभिमन्यु पवार के अनुसार, मुख्यमंत्री खरोसा में स्थानीय किसानों से सीधी बातचीत करेंगे। इस दौरे में लोक निर्माण मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले और धाराशिव के प्रभारी मंत्री प्रताप सरनाईक भी उनके साथ हैं।

दौरे से पहले मंगलवार को साप्ताहिक कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री फडणवीस ने राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में एक कैबिनेट उप-समिति गठित करने की घोषणा की। इस उप-समिति को पूर्ण कैबिनेट के बराबर अधिकार दिए गए हैं ताकि राहत उपायों पर त्वरित निर्णय लिए जा सकें। फसल नुकसान के आकलन (पंचनामा) का काम बुधवार से पूरे राज्य में शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

उपमुख्यमंत्री शिंदे का विदर्भ अभियान

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पश्चिमी विदर्भ के बुलढाणा, अकोला और अमरावती जिलों में फसल नुकसान के आकलन का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने सभी शिवसेना मंत्रियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे जमीनी स्तर पर जाएँ, तुरंत पंचनामा करें और प्रभावित गाँवों में जनता दरबार आयोजित करें। किसान समुदाय को भरोसा दिलाते हुए उन्होंने राज्य सरकार की ओर से पूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक सहायता का वादा किया।

सुनेत्रा पवार और जालना में वॉर रूम

उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने मुंबई में पूर्व मोर्शी विधायक देवेंद्र भुयार से जानकारी लेने के बाद अमरावती जिले के वारुड-मोर्शी इलाके के बिगड़ते सूखे के हालात की समीक्षा की। उन्होंने अमरावती के जिला कलेक्टर से संपर्क कर तत्काल प्रशासनिक कदम उठाने के निर्देश दिए।

इधर, जालना के सभी आठ तालुकों और 52 राजस्व मंडलों में लंबे समय से सूखे के हालात बने रहने के बाद, जिला कलेक्टर आशिमा मित्तल ने एक केंद्रीय 'वॉर रूम' गठित करने का आधिकारिक आदेश जारी किया। यह कमांड सेंटर फसल की स्थिति, चारे की उपलब्धता, जल भंडारण, टैंकर स्टेशनों, ई-क्रॉप सर्वे और गाँवों से संभावित पलायन जैसे रोज़ाना के आँकड़ों पर नज़र रखेगा।

कृषि मंत्री की हाई-लेवल बैठक और केंद्र को प्रस्ताव

मंगलवार शाम को नवी मुंबई के सिडको भवन में कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई, जिसमें सिंधुदुर्ग, रत्नागिरी, रायगढ़, ठाणे और पालघर जिलों में पानी की कमी, खेती के नुकसान और स्थानीय किसानों की समस्याओं का जायज़ा लिया गया।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने मीडिया से कहा, 'राज्य सरकार केंद्र सरकार से आर्थिक मदद का इंतज़ार किए बिना प्रभावित किसानों को तुरंत सहायता देगी।' उन्होंने बताया कि सूखे जैसे हालात घोषित करने वाला शुरुआती अधिसूचना शनिवार तक आधिकारिक रूप से जारी कर दी जाएगी। साथ ही, NDRF के नियमों के तहत राहत कोष की माँग करने वाला औपचारिक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

आगे क्या होगा और किसानों पर असर

सोयाबीन, मक्का और कपास जैसी मुख्य फसलों को भारी नुकसान हुआ है, जबकि कोंकण क्षेत्र में धान के खेत भी बुरी तरह प्रभावित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले सात से आठ महीनों तक पीने के पानी की आपूर्ति और पशुओं के चारे पर विशेष ध्यान दिया जाएगा और इसके लिए नगर निगमों, नगर परिषदों व स्थानीय निकायों के साथ समन्वय किया जाएगा। कैबिनेट उप-समिति राज्य भर से आने वाले फील्ड डेटा के आधार पर राहत पैकेज और उपायों का निर्धारण करेगी। सभी की निगाहें अब मुख्यमंत्री के फील्ड दौरों के बाद घोषित होने वाले आधिकारिक राहत पैकेज पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा पंचनामे की गुणवत्ता और राहत वितरण की गति में होगी — क्योंकि राज्य में अतीत में सूखा राहत की घोषणाएँ और ज़मीनी अमल के बीच बड़ा अंतर रहा है। कैबिनेट उप-समिति को 'पूर्ण शक्तियाँ' देना नौकरशाही जड़ता को तोड़ने की कोशिश है, पर इसका असर तभी दिखेगा जब ये शक्तियाँ जिला स्तर तक पारदर्शी तरीके से पहुँचें। मराठवाड़ा और विदर्भ दशकों से कृषि संकट के केंद्र रहे हैं — यह सूखा उस दीर्घकालिक संरचनात्मक कमज़ोरी की नई कड़ी है। केंद्र की मदद का इंतज़ार न करने का ऐलान साहसिक है, पर राज्य के आपदा प्रबंधन कोष की सीमाएँ भी जल्द परखी जाएँगी।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में सूखे के हालात कितने गंभीर हैं?
अल नीनो की वजह से हुई कम बारिश ने मराठवाड़ा, विदर्भ, खानदेश और पश्चिमी महाराष्ट्र में सोयाबीन, मक्का, कपास और धान जैसी मुख्य फसलों को बुरी तरह नुकसान पहुँचाया है। जालना के सभी आठ तालुकों और 52 राजस्व मंडलों में लंबे समय से सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है, और पीने के पानी व पशुओं के चारे का भी गंभीर संकट है।
CM फडणवीस ने सूखे से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री फडणवीस ने राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में एक कैबिनेट उप-समिति गठित की है, जिसे पूर्ण कैबिनेट के बराबर अधिकार दिए गए हैं। बुधवार से पूरे राज्य में पंचनामा शुरू होगा, शनिवार तक सूखे की आधिकारिक अधिसूचना जारी होगी, और केंद्र को NDRF नियमों के तहत राहत कोष का औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाएगा।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे विदर्भ में क्या कर रहे हैं?
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बुलढाणा, अकोला और अमरावती जिलों में फसल नुकसान के आकलन का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने सभी शिवसेना मंत्रियों को निर्देश दिया है कि वे जमीनी स्तर पर जाएँ, तुरंत पंचनामा करें और प्रभावित गाँवों में जनता दरबार लगाएँ।
जालना में 'वॉर रूम' क्या है और यह किस काम आएगा?
जालना की जिला कलेक्टर आशिमा मित्तल ने आठ तालुकों और 52 राजस्व मंडलों में सूखे की स्थिति की निगरानी के लिए एक केंद्रीय 'वॉर रूम' का आदेश दिया है। यह कमांड सेंटर फसल की सेहत, चारे की उपलब्धता, जल भंडारण, टैंकर स्टेशनों, ई-क्रॉप सर्वे और गाँवों से संभावित पलायन जैसे रोज़ाना के आँकड़ों पर नज़र रखेगा।
किसानों को राहत कब और कैसे मिलेगी?
राज्य सरकार ने केंद्र की मदद का इंतज़ार किए बिना तत्काल राहत देने का भरोसा दिया है। बुधवार से पंचनामा शुरू होगा और फील्ड डेटा के आधार पर कैबिनेट उप-समिति राहत पैकेज तय करेगी। अगले सात से आठ महीनों तक पीने के पानी की आपूर्ति और पशुओं के चारे को प्राथमिकता दी जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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