विस्फोटक कंपनियों में हादसे रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार का बड़ा कदम, 'विस्फोटक नियम 2008' में संशोधन का प्रस्ताव केंद्र को भेजेगी
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में विस्फोटक निर्माण कंपनियों में होने वाली दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए ठोस कदम उठाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में 7 जून 2026 को एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें 'विस्फोटक नियम, 2008' में संशोधन के प्रस्ताव पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। बैठक में निर्णय लिया गया कि राज्य सरकार सुरक्षा मानकों को और मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष यह संशोधन प्रस्ताव रखेगी।
बैठक में क्या हुआ
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्वयं एक्स पर पोस्ट कर कहा कि विस्फोटक निर्माण क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करना 'समय की जरूरत' है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित संशोधनों का मुख्य उद्देश्य दुर्घटनाओं की रोकथाम और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
प्रस्तावित बदलावों में क्या शामिल है
सीएम फडणवीस के अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों में तीन प्रमुख बिंदु शामिल हैं। पहला — उच्च जोखिम वाले कार्यों में रोबोटिक्स और ऑटोमेशन का अधिकतम उपयोग। दूसरा — मानव हस्तक्षेप को न्यूनतम स्तर पर लाना। तीसरा — अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना। मुख्यमंत्री का मानना है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से दुर्घटनाओं की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
विस्फोटक नियम 2008 क्या है
गौरतलब है कि 'विस्फोटक नियम, 2008' देशभर में विस्फोटकों के निर्माण, भंडारण, उपयोग, बिक्री, परिवहन, आयात और निर्यात को नियंत्रित करता है। महाराष्ट्र सहित पूरे देश में इन नियमों का पालन अनिवार्य है। इन नियमों का प्रशासन पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) द्वारा किया जाता है, जो केंद्र सरकार के अधीन काम करता है।
यह कदम क्यों अहम है
राज्य सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब औद्योगिक सुरक्षा और तकनीकी आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में विस्फोटक एवं रासायनिक इकाइयों में हादसों को लेकर चिंता बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वचालन और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों को अनिवार्य बनाने से न केवल जान-माल का नुकसान कम होगा, बल्कि उद्योग की दीर्घकालिक उत्पादकता भी बढ़ेगी।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार अब यह संशोधन प्रस्ताव औपचारिक रूप से केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत करेगी। चूँकि PESO केंद्रीय नियामक संस्था है, इसलिए किसी भी संशोधन के लिए केंद्र की मंजूरी आवश्यक होगी। माना जा रहा है कि प्रस्तावित संशोधन लागू होने के बाद विस्फोटक उद्योग में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा भविष्य में दुर्घटनाओं को रोकने में सहायता मिलेगी।