FSSAI पर महाराष्ट्र सरकार बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंची, राज्य अधिकारों के अतिक्रमण की संवैधानिक चुनौती
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने 23 अक्टूबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर केंद्रीय खाद्य सुरक्षा नियामक भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के खिलाफ संवैधानिक चुनौती पेश की है। राज्य सरकार का आरोप है कि FSSAI ने केंद्रीय लाइसेंसिंग और निरीक्षण तंत्र के ज़रिए राज्य सरकार के क़ानूनी अधिकारों का अतिक्रमण करते हुए एक समानांतर व्यवस्था खड़ी कर दी है। यह याचिका राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त के माध्यम से दायर की गई है।
याचिका में क्या है मुख्य दावा
याचिका में कहा गया है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत लाइसेंस जारी करने और कानून लागू करने की शक्तियाँ राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों के पास हैं। महाराष्ट्र सरकार का आरोप है कि केंद्र ने लाइसेंसिंग रेगुलेशंस 2011, रिक्रूटमेंट रेगुलेशंस 2018 और 2026 के संशोधित नियमों के ज़रिए इन अधिकारों को कमज़ोर कर दिया है।
राज्य सरकार ने यह भी आरोप लगाया है कि FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ने कानून में कोई प्रावधान न होने के बावजूद 'सेंट्रल फूड सेफ्टी ऑफिसर' के पद सृजित कर दिए, जो राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में सीधा हस्तक्षेप है।
निरीक्षण अधिकार और डेटाबेस विवाद
याचिका के अनुसार, 12 मई 2023 को FSSAI ने एक आदेश जारी कर राज्य के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को उन कंपनियों का निरीक्षण करने से रोक दिया, जिनके पास केंद्रीय लाइसेंस हैं। इससे राज्य की प्रवर्तन क्षमता प्रभावी रूप से सीमित हो गई।
इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार का कहना है कि फूड सेफ्टी कंप्लायंस सिस्टम पोर्टल के माध्यम से सभी खाद्य व्यवसायों को केंद्रीय नियंत्रण में लाया गया, जिससे राज्यों की व्यावहारिक भूमिका सीमित होकर रह गई। गौरतलब है कि यह पोर्टल खाद्य व्यवसायों के लाइसेंसिंग डेटाबेस का केंद्रीय भंडार बन गया है, जिस तक राज्यों की स्वतंत्र पहुँच बाधित है।
अधिसूचनाओं पर भी सवाल
महाराष्ट्र सरकार ने 10 मार्च और 13 मार्च 2026 को जारी उन अधिसूचनाओं को भी चुनौती दी है, जिनमें अपील दायर करने की समय-सीमा बढ़ाई गई थी। याचिका में दावा किया गया है कि इन अधिसूचनाओं को लागू करने से पहले जनता से आपत्तियाँ और सुझाव नहीं माँगे गए, जो स्थापित कानूनी प्रक्रिया के विरुद्ध है।
अदालत से क्या माँगी है राहत
याचिका में महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट से तीन प्रमुख राहतें माँगी हैं: जिन नियमों को असंवैधानिक बताया गया है उन्हें रद्द किया जाए; मई 2023 के उस आदेश पर रोक लगाई जाए जिसके तहत राज्य अधिकारियों के निरीक्षण अधिकार सीमित किए गए; और खाद्य व्यवसायों से जुड़ा लाइसेंसिंग डेटाबेस फिर से राज्य सरकार को सौंपा जाए।
इस याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ — जिसमें मुख्य न्यायाधीश महेश सी. त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना शामिल हैं — सुनवाई करेगी।
व्यापक संवैधानिक बहस
यह मामला केंद्र और राज्यों के बीच खाद्य सुरक्षा विनियमन तथा प्रशासनिक अधिकारों को लेकर एक महत्त्वपूर्ण संवैधानिक मिसाल बन सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्य सरकारें केंद्रीय नियामकों द्वारा समवर्ती सूची के विषयों में बढ़ते हस्तक्षेप को लेकर चिंता व्यक्त कर रही हैं। आलोचकों का कहना है कि FSSAI के ढाँचे में केंद्र-राज्य जिम्मेदारियों का स्पष्ट सीमाँकन आवश्यक है। अदालत का फैसला देशभर में खाद्य सुरक्षा प्रशासन की संरचना को प्रभावित कर सकता है।