महाराष्ट्र में दूध ₹2 प्रति लीटर महंगा, 11 अगस्त 2026 से नई दरें लागू; डेयरी उत्पाद भी 10% तक बढ़े
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र में गाय और भैंस के दूध की कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है, जो 11 अगस्त 2026 से प्रभावी होगी। मिल्क प्रोड्यूसर्स एंड प्रोसेसर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने यह निर्णय बढ़ती उत्पादन लागत के मद्देनज़र लिया है। राज्य भर के उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
मूल्य वृद्धि के कारण
एसोसिएशन के अनुसार, डीजल की कीमतें ₹10 प्रति लीटर बढ़ चुकी हैं और पैकेजिंग का खर्च लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ गया है। इसके अलावा दूध की खरीद कीमत में भी इज़ाफ़ा हुआ है। एसोसिएशन ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में और बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या-क्या महंगा होगा
दूध की बिक्री कीमत में ₹2 प्रति लीटर की वृद्धि के साथ-साथ डेयरी उत्पादों की कीमतें भी 10 प्रतिशत तक बढ़ाई जाएंगी। यह बदलाव गाय और भैंस दोनों प्रकार के दूध पर लागू होगा। नई दरें 11 अगस्त 2026 से लागू होंगी।
सरकार का रुख और MSP विवाद
गौरतलब है कि पिछले महीने ही केंद्र सरकार ने संसद को बताया था कि दूध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। लोकसभा में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (उर्फ ललन सिंह) ने स्पष्ट किया कि दूध की कीमतें सहकारी समितियाँ और निजी डेयरियाँ बाज़ार की स्थितियों के आधार पर तय करती रहेंगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब डेयरी किसान और उपभोक्ता दोनों ही मूल्य नीति को लेकर दबाव में हैं।
सरकारी पहलें और बुनियादी ढाँचा
मंत्री ने बताया कि सरकार डेयरी क्षेत्र को मज़बूत करने के लिए कई कदम उठा रही है। मार्च 2026 तक गाँव स्तर पर 36,283 नई डेयरी कोऑपरेटिव सोसायटियाँ बनाई गई हैं और 31,150 सोसायटियों को सुदृढ़ किया गया है। प्रतिदिन 168 लाख लीटर दूध ठंडा करने की क्षमता विकसित की गई है और 76,748 गुणवत्ता परीक्षण उपकरण वितरित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, प्रतिदिन 418 लाख लीटर दूध की प्रोसेसिंग और वैल्यू-एडिशन क्षमता वाले परियोजनाओं को मंज़ूरी दी गई है।
आम उपभोक्ता पर असर
यह मूल्य वृद्धि महाराष्ट्र के उन लाखों परिवारों को सीधे प्रभावित करेगी जो रोज़ाना दूध और डेयरी उत्पादों पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक उत्पादन लागत में कमी नहीं आती, तब तक उपभोक्ताओं को राहत मिलना मुश्किल है। डेयरी उद्योग में पारदर्शी मूल्य निर्धारण नीति की माँग अब और तेज़ हो सकती है।