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महाराष्ट्र में पारिवारिक कृषि भूमि बंटवारे पर ₹200 रजिस्ट्रेशन फीस माफ, किसानों को सीधी राहत

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महाराष्ट्र में पारिवारिक कृषि भूमि बंटवारे पर ₹200 रजिस्ट्रेशन फीस माफ, किसानों को सीधी राहत

सारांश

महाराष्ट्र ने 2016 से चली आ रही ₹200 की रजिस्ट्रेशन फीस खत्म कर पारिवारिक कृषि भूमि बंटवारे को सस्ता और सरल बनाया। राजस्व मंत्री बावनकुले ने इसे किसान परिवारों के लिए व्यापक भूमि सुधार अभियान का हिस्सा बताया, जिसमें ईमेल नोटिस और मुफ्त पुलिस सुरक्षा जैसे प्रावधान भी शामिल हैं।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने 29 जुलाई 2026 को परिवार के सदस्यों के बीच कृषि भूमि बंटवारे पर ₹200 की रजिस्ट्रेशन फीस माफ करने की घोषणा की।
यह छूट महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता, 1966 की धारा 85 के तहत लागू होगी और सह-हिस्सेदारों व परिवार के सदस्यों पर समान रूप से लागू होगी।
2016 में लगाई गई यह फीस गिफ्ट डीड दस्तावेजों पर ली जाती थी, जिसे अब पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
'मामलतदार कोर्ट्स एक्ट' में संशोधन के तहत सुनवाई नोटिस अब ईमेल से भेजे जाएंगे और आदेश न मानने पर प्रभावित किसानों को मुफ्त पुलिस सुरक्षा मिलेगी।
यह निर्णय राजस्व विभाग के व्यापक सुधार अभियान का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य भूमि प्रशासन को सरल और पारदर्शी बनाना है।

महाराष्ट्र सरकार ने 29 जुलाई 2026 को एक अहम फैसले में परिवार के सदस्यों के बीच कृषि भूमि के बंटवारे के दस्तावेजों पर लगने वाली ₹200 की रजिस्ट्रेशन फीस पूरी तरह माफ कर दी। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने नागपुर में यह घोषणा करते हुए कहा कि यह कदम छोटे और गरीब किसान परिवारों को आर्थिक राहत देने की दिशा में उठाया गया है।

क्या है नई व्यवस्था

राज्य सरकार ने एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता, 1966 की धारा 85 के अंतर्गत सह-हिस्सेदारों या परिवार के सदस्यों के बीच कृषि भूमि के बंटवारे के दस्तावेजों पर कोई रजिस्ट्रेशन शुल्क नहीं लिया जाएगा। यह व्यवस्था अधिसूचना जारी होने की तिथि से तत्काल प्रभाव से लागू मानी जाएगी।

गौरतलब है कि 2016 में लिए गए एक फैसले के बाद से परिवार के सदस्यों के बीच कृषि भूमि के बंटवारे — जिसे गिफ्ट डीड भी कहा जाता है — के दस्तावेजों पर ₹200 की फीस अनिवार्य कर दी गई थी। अब इस शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।

किसानों पर क्या होगा असर

मंत्री बावनकुले के अनुसार, इस निर्णय से पारिवारिक भूमि बंटवारे की प्रक्रिया आसान, पारदर्शी और आर्थिक रूप से किफायती बनेगी। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसान परिवारों को इसका सबसे अधिक लाभ मिलेगा, जो अक्सर मामूली शुल्क के कारण भी कागज़ी कार्यवाही टालते रहते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण महाराष्ट्र में कृषि भूमि विवाद और उत्तराधिकार के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं।

राजस्व विभाग के अन्य सुधार

रजिस्ट्रेशन फीस माफी के साथ-साथ राजस्व विभाग ने 'मामलतदार कोर्ट्स एक्ट' में भी महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नई व्यवस्था के तहत सुनवाई के नोटिस अब सीधे ईमेल के ज़रिए भेजे जाएंगे, जिससे प्रक्रिया में तेज़ी आएगी। इसके अलावा, यदि तहसीलदार (मामलतदार) के आदेश के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया जाता, तो प्रभावित किसानों को मुफ्त पुलिस सुरक्षा प्रदान करना अनिवार्य कर दिया गया है।

पिछले सप्ताह मंत्री बावनकुले ने ग्रामीण क्षेत्रों में खेती की ज़मीन के रास्तों, पारंपरिक आवागमन मार्गों या जल प्रवाह में बाधा डालने वालों के विरुद्ध किसानों के हित में सख्त कदम उठाने की भी घोषणा की थी। इस संबंध में एक सर्कुलर भी जारी किया गया है।

व्यापक संदर्भ

यह निर्णय महाराष्ट्र राजस्व विभाग की उस व्यापक पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भूमि से जुड़े कामकाज को सरल बनाना, प्रशासनिक देरी घटाना और किसान परिवारों पर वित्तीय बोझ कम करना है। आलोचकों का कहना है कि ₹200 जैसी मामूली फीस की माफी प्रतीकात्मक तो है, लेकिन असली ज़रूरत भूमि रिकॉर्ड डिजिटलीकरण और विवाद निपटारे की प्रक्रिया को तेज़ करने की है।

आगे की राह

सरकार के अनुसार, राजस्व विभाग भूमि प्रशासन में और सुधारों की योजना बना रहा है। ईमेल-आधारित नोटिस प्रणाली और मुफ्त पुलिस सुरक्षा के प्रावधान के साथ, आने वाले महीनों में किसानों के लिए भूमि विवाद समाधान की प्रक्रिया अधिक सुलभ होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन संकेत बड़ा है — महाराष्ट्र सरकार भूमि प्रशासन को किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में एक के बाद एक कदम उठा रही है। असली परीक्षा यह है कि ईमेल नोटिस और मुफ्त पुलिस सुरक्षा जैसे प्रावधान ज़मीनी स्तर पर कितनी तेज़ी से लागू होते हैं, क्योंकि ग्रामीण महाराष्ट्र में तहसील कार्यालयों की डिजिटल क्षमता अभी भी असमान है। भूमि विवादों की जड़ अक्सर रिकॉर्ड की अपारदर्शिता में होती है, न कि केवल फीस में — इसलिए इन सुधारों की सफलता डिजिटलीकरण की रफ्तार पर निर्भर करेगी।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में पारिवारिक कृषि भूमि बंटवारे पर रजिस्ट्रेशन फीस माफी का क्या मतलब है?
अब परिवार के सदस्यों के बीच कृषि भूमि के बंटवारे के दस्तावेज बनवाने पर कोई रजिस्ट्रेशन शुल्क नहीं देना होगा। महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता, 1966 की धारा 85 के तहत यह छूट सह-हिस्सेदारों और परिवार के सभी सदस्यों पर लागू होगी।
यह ₹200 की फीस कब से लागू थी और अब क्यों हटाई गई?
2016 में लिए गए एक फैसले के बाद से पारिवारिक कृषि भूमि के गिफ्ट डीड दस्तावेजों पर ₹200 की रजिस्ट्रेशन फीस अनिवार्य थी। राजस्व मंत्री बावनकुले ने इसे छोटे और गरीब किसानों पर अनावश्यक बोझ बताते हुए 29 जुलाई 2026 को इसे समाप्त करने की घोषणा की।
इस फैसले से किन किसानों को सबसे ज़्यादा फायदा होगा?
इस निर्णय का सबसे अधिक लाभ छोटे और सीमांत किसान परिवारों को मिलेगा, जो भूमि बंटवारे की कागज़ी कार्यवाही के लिए मामूली शुल्क भी वहन करने में असमर्थ होते हैं। इससे पारिवारिक भूमि विवाद कम होने और रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया सरल होने की उम्मीद है।
मामलतदार कोर्ट्स एक्ट में क्या बदलाव हुए हैं?
संशोधित नियमों के तहत सुनवाई के नोटिस अब सीधे ईमेल से भेजे जाएंगे। यदि तहसीलदार के आदेश के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया जाता, तो प्रभावित किसानों को मुफ्त पुलिस सुरक्षा देना अनिवार्य होगा।
महाराष्ट्र राजस्व विभाग आगे और कौन से सुधार लाने की योजना में है?
राजस्व विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में खेती के रास्तों और जल प्रवाह में बाधा डालने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के लिए पहले ही सर्कुलर जारी कर चुका है। भूमि प्रशासन को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में और सुधारों की योजना बताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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