महात्मा फुले: भारत के भविष्य के लिए प्रेरणास्त्रोत, 200वीं जयंती पर पीएम मोदी का एक लेख

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महात्मा फुले: भारत के भविष्य के लिए प्रेरणास्त्रोत, 200वीं जयंती पर पीएम मोदी का एक लेख

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके विचारों ने समाज में न्याय, समानता और शिक्षा के लिए प्रेरणा दी। जानें, फुले के योगदान और उनके जीवन के अद्वितीय पहलुओं के बारे में।

Key Takeaways

  • महात्मा ज्योतिराव फुले ने समानता, न्याय और शिक्षा के लिए जीवन समर्पित किया।
  • महिलाओं और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
  • शिक्षा को न्याय और समानता का माध्यम बनाया।
  • उनके विचार समाज की प्रगति के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
  • महात्मा फुले का जीवन हमें सामाजिक बदलाव की दिशा में प्रेरित करता है।

नई दिल्ली, ११ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रमुख समाज सुधारकों में से एक, महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। पीएम मोदी ने कहा कि ज्योतिराव फुले ने अपने जीवन को समानता, न्याय और शिक्षा के मूल्यों के प्रति समर्पित किया। वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने महिलाओं और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष की शुरुआत की। इस अवसर पर, प्रधानमंत्री मोदी ने एक लेख में अपने विचार साझा किए।

प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती पर, मैं इस दूरदर्शी समाज सुधारक को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने अपना जीवन समानता, न्याय और शिक्षा के मूल्यों के प्रति समर्पित किया। उन्होंने महिलाओं और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष की शुरुआत की। उनके प्रयासों से शिक्षा सशक्तिकरण का एक सशक्त माध्यम बन सकी। इस वर्ष, हम उनके जन्म की द्विशताब्दी वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। आशा है कि उनके विचार हम सभी को सामाजिक प्रगति की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते रहें।"

पीएम मोदी ने आगे लिखा, "आज ११ अप्रैल हम सभी के लिए विशेष दिन है। यह दिन भारत के महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले की जन्म-जयंती है। इस वर्ष यह अवसर और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि हम उनके 200वें जयंती वर्ष का स्वागत कर रहे हैं। महात्मा फुले का जीवन नैतिक साहस, आत्म चिंतन और समाज के हित के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। महात्मा फुले को केवल उनकी संस्थाओं या आंदोलनों के लिए ही नहीं, बल्कि उन्होंने लोगों में जो आशा और आत्मविश्वास जगाया, उसका व्यापक प्रभाव आज भी महसूस होता है। उनके विचार देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।"

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि महात्मा फुले का जन्म १८२७ में महाराष्ट्र के एक साधारण परिवार में हुआ था। लेकिन प्रारंभिक चुनौतियों ने उनकी शिक्षा, साहस और समाज के प्रति समर्पण को रोकने में असफलता पाई। उन्होंने हमेशा यह विश्वास किया कि चाहे कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, इंसान को मेहनत करनी चाहिए, ज्ञान प्राप्त करना चाहिए और समस्याओं का समाधान करना चाहिए। उनके बचपन की जिज्ञासा उनके जीवन भर बनी रही, और वे हमेशा कहते थे, "हम जितना ज्यादा सवाल करते हैं, उससे उतना ही अधिक ज्ञान प्राप्त होता है।"

उन्होंने लिखा, "महात्मा फुले के जीवन में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य बनी। उनका मानना था कि ज्ञान केवल एक वर्ग की संपत्ति नहीं, बल्कि एक ऐसी शक्ति है, जिसे सभी के साथ साझा किया जाना चाहिए। जब समाज के बड़े हिस्से को शिक्षा से वंचित रखा जाता था, तब उन्होंने लड़कियों और वंचित वर्गों के लिए स्कूल खोले। उनका मानना था कि 'बच्चों में सुधार मां के माध्यम से आता है। इसलिए यदि स्कूल खोले जाएं, तो सबसे पहले लड़कियों के लिए खोले जाने चाहिए।' उन्होंने शिक्षा को न्याय और समानता का माध्यम बनाया।"

शिक्षा के प्रति उनके दृष्टिकोण की चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "उनका दृष्टिकोण हमें आज भी प्रेरित करता है। पिछले एक दशक में भारत ने युवा पीढ़ी के लिए रिसर्च और इनोवेशन को प्राथमिकता दी है। एक ऐसा इकोसिस्टम बनाया जा रहा है, जिसमें युवा सवाल पूछने, नई चीजें सीखने और नवाचार के लिए प्रेरित हों। ज्ञान, कौशल और अवसरों में निवेश करके, भारत अपने युवाओं को देश की प्रगति का आधारस्तंभ बना रहा है।"

उन्होंने आगे लिखा, "महात्मा फुले ने अपने शैक्षिक ज्ञान और बौद्धिकता से कृषि, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में गहरी जानकारी हासिल की। वे कहते थे कि किसानों और मजदूरों के साथ अन्याय समाज को कमजोर करता है। उन्होंने देखा कि सामाजिक असमानताएं खेतों और गांवों में लोगों के जीवन को कैसे प्रभावित करती हैं। इसलिए उन्होंने गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्गों को सम्मान दिलाने के लिए अपना जीवन समर्पित किया और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किए।"

महात्मा फुले के विचारों को स्मरण करते हुए पीएम मोदी ने लिखा, "महात्मा फुले ने कहा था, 'जोपर्यंत समाजातील सर्वांना समान अधिकार मिळत नाहीत, तोपर्यंत खरे स्वातंत्र्य मिळत नाही', अर्थात जब तक समाज के सभी लोगों को समान अधिकार नहीं मिलते, तब तक सच्ची आज़ादी नहीं मिल सकती। इस विचार को धरातल पर उतारने के लिए उन्होंने कई संस्थाएं स्थापित कीं। उनका 'सत्यशोधक समाज' आधुनिक भारत के सबसे महत्वपूर्ण समाज सुधार आंदोलनों में से एक था। यह आंदोलन सामाजिक सुधार, सामुदायिक सेवा और मानवीय गरिमा को बढ़ावा देने में अग्रणी रहा। यह महिलाओं, युवाओं और गांवों में रहने वालों की आवाज बना। यह आंदोलन उनके इस विश्वास को दर्शाता है कि समाज की मजबूती के लिए न्याय, हर व्यक्ति के प्रति सम्मान और सामूहिक प्रगति आवश्यक है।"

पीएम मोदी ने कहा कि महात्मा फुले का व्यक्तिगत जीवन भी साहस का उदाहरण रहा। लोगों के बीच लगातार काम करने का असर उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ा। लेकिन गंभीर बीमारी ने भी उनके संकल्प को कमजोर नहीं किया। एक गंभीर स्ट्रोक के बाद भी, उन्होंने अपना कार्य और समाज के लिए संघर्ष जारी रखा। उनका शरीर कमजोर हुआ, लेकिन समाज के प्रति उनका समर्पण कभी भी डगमगाया नहीं। आज भी करोड़ों लोग उनके जीवन के इस पहलू से प्रेरित होते हैं।

उन्होंने कहा कि महात्मा फुले का स्मरण, सावित्रीबाई फुले के उल्लेख के बिना अधूरा है। पीएम मोदी ने लिखा, "वह स्वयं भारत की महान समाज सुधारकों में से एक थीं। भारत की पहली महिला शिक्षिकाओं में से एक, सावित्रीबाई ने लड़कियों की शिक्षा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महात्मा फुले के निधन के बाद भी, उन्होंने इस कार्य को जारी रखा। १८९७ में प्लेग महामारी के दौरान, उन्होंने मरीजों की इतनी सेवा की कि वह स्वयं भी इस बीमारी की शिकार हो गईं और उनका निधन हो गया।"

पीएम मोदी ने आगे लिखा, "भारतभूमि बार-बार ऐसी महान विभूतियों से धन्य होती रही है, जिन्होंने अपने विचार, त्याग और कर्म से समाज को मजबूत बनाया है। उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि स्वयं बदलाव का माध्यम बने। सदियों से हमारे देश में समाज सुधार की आवाज उन्हीं लोगों से उठी है, जिन्होंने पीड़ा को भाग्य नहीं माना, बल्कि उसे समाप्त करने के प्रयासों में जुटे रहे। महात्मा ज्योतिराव फुले भी ऐसे ही महान व्यक्तित्व थे।"

पीएम मोदी ने २०२२ में पुणे की अपनी यात्रा को याद करते हुए लिखा, "जब मैंने शहर में महात्मा फुले की भव्य प्रतिमा पर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। उनके 200वें जयंती वर्ष की शुरुआत पर, हम उनके विचारों को अपनाकर ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं। हमें शिक्षा के प्रति अपने संकल्प को मजबूत करना होगा। अन्याय के प्रति संवेदनशील बनना होगा और यह विश्वास रखना होगा कि समाज अपने प्रयासों से ही खुद को बेहतर बना सकता है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि समाज की शक्ति को जनहित और नैतिक मूल्यों से जोड़कर भारत में क्रांतिकारी बदलाव लाए जा सकते हैं। यही कारण है कि आज भी उनके विचार करोड़ों लोगों में नई उम्मीद जगाते हैं। महात्मा ज्योतिराव फुले 200 साल बाद भी केवल इतिहास का नाम नहीं हैं, बल्कि वे भारत के भविष्य के मार्गदर्शक बने हुए हैं।

Point of View

बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए भी मार्गदर्शक बने हुए हैं।
NationPress
12/04/2026

Frequently Asked Questions

महात्मा फुले ने किस वर्ष जन्म लिया?
महात्मा ज्योतिराव फुले का जन्म 1827 में हुआ था।
महात्मा फुले का मुख्य उद्देश्य क्या था?
महात्मा फुले का मुख्य उद्देश्य समानता, न्याय और शिक्षा को बढ़ावा देना था।
महात्मा फुले ने समाज में क्या योगदान दिया?
उन्होंने महिलाओं और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और शिक्षा के माध्यम से समाज में सुधार लाने का प्रयास किया।
महात्मा फुले की पत्नी कौन थीं?
महात्मा फुले की पत्नी का नाम सावित्रीबाई फुले था।
महात्मा फुले की 200वीं जयंती कब मनाई गई?
महात्मा फुले की 200वीं जयंती 11 अप्रैल 2023 को मनाई गई।
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