महिला आरक्षण बिल पर केंद्र सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाते कांग्रेस सांसद
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नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दक्षिण भारत के कांग्रेस सांसदों ने महिला आरक्षण बिल से संबंधित नोटिफिकेशन और परिसीमन पर केंद्र सरकार को तीखा जवाब दिया है। जबकि कुछ सांसदों ने इस बिल के समर्थन में मतदान की बात कही है। कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने कहा, "कल रात भाजपा सरकार ने नया प्लान बनाया। आज 4 बजे इस बिल पर वोटिंग है। हम देखेंगे कि वे महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को अलग कर रहे हैं या नहीं। हम इस बिल के पक्ष में वोट नहीं देंगे, लेकिन हम महिला आरक्षण बिल का समर्थन करेंगे, क्योंकि यह हमारा बिल है।"
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, "जब अगले हफ्ते दो बड़े राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, तो सत्र बुलाने की क्या जल्दी थी? 2023 में पास हुआ एक मुद्दा अचानक सत्र के दौरान नोटिफाई किया जा रहा है। सब कुछ बहुत स्पष्ट नहीं है और कोई भी पारदर्शिता नहीं है। यह सब एक छलावा और अस्पष्टता का प्रतीक है। यह एक ऐसी स्थिति है जैसे कोई इंश्योरेंस बेचने वाला पहले कहता है कि वह पॉलिसी बेच रहा है और फिर बारीक अक्षरों में शर्तें बताता है।"
कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने कहा, "सांसद तेजस्वी सूर्या ने लोकसभा में परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान तेलंगाना के विभाजन का उल्लेख किया। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने इन टिप्पणियों का समर्थन किया। इन दोनों को तेलंगाना की जनता से माफी मांगनी चाहिए।"
डीएमके सांसद टी. आर. बालू ने कहा, "यह प्रक्रिया पिछले एक सप्ताह से चल रही है, जबकि यह असल में पिछले एक साल से जारी है।"
कांग्रेस सांसद सप्तगिरि शंकर उलका ने कहा, "यह काफी चौंकाने वाला है। हमें लगा था कि इसे पहले ही नोटिफाई कर दिया गया है, लेकिन अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि 2023 में पास हुआ बिल अभी तक नोटिफाई नहीं हुआ है।"
तेलंगाना से कांग्रेस सांसद कडियम काव्या ने कहा, "गुरुवार को महिला आरक्षण 131वें संशोधन बिल और परिसीमन बिल पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने तेलंगाना का विभाजन भारत-पाकिस्तान विभाजन जैसा बताया। हमने मांग की है कि वे माफी मांगें।"
सीपीआई सांसद पी. संतोष ने कहा, "महिलाओं के लिए आरक्षण समय की आवश्यकता है, और हम इसका समर्थन करते हैं। इसे भारत की संसद ने सर्वसम्मति से पारित किया था।"
कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल ने कहा, "जब भी किसी कानून में संशोधन पेश होता है, तब सरकार का फ़र्ज़ है कि वह इसकी सूचना दे।"