महिलाओं के लिए डिजिटल शिक्षा: नया अवसर और बढ़ती भागीदारी
सारांश
Key Takeaways
- डिजिटल शिक्षा से महिलाओं को नए अवसर मिल रहे हैं।
- महिलाओं का उच्च शिक्षा में नामांकन 41 लाख से अधिक हो चुका है।
- समर्थ ई गवर्नेंस प्लेटफार्म पर एक करोड़ से अधिक महिला छात्रों का नामांकन।
- एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट से पढ़ाई में साक्षात्कार नहीं होगा।
- महिलाओं की भागीदारी राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण है।
नई दिल्ली, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत में डिजिटल शिक्षा पहलों के कारण उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल संसाधन महिलाओं को घर से पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का एक नया अवसर प्रदान कर रहे हैं।
मंत्रालय के अनुसार, जनवरी 2025 और जुलाई 2025 सत्र को जोड़कर स्वयं प्लेटफॉर्म पर महिला विद्यार्थियों के नामांकन की संख्या 41 लाख से अधिक हो गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां स्कूल से लेकर पोस्ट-ग्रेजुएशन स्तर के सैकड़ों कोर्स उपलब्ध हैं। इस मंच पर उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाले ऑनलाइन कोर्स के कारण देशभर की छात्राओं को समान अवसर मिल रहे हैं। छात्राएं यहाँ अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ाई कर पा रही हैं।
इसी प्रकार, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बने डिजिटल प्लेटफॉर्म साथी भी छात्राओं के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। मंत्रालय के अनुसार, लगभग 7.6 लाख छात्राएं इस प्लेटफॉर्म के जरिए डिजिटल माध्यम से परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं। यहाँ उपलब्ध सेल्फ-असेसमेंट और तैयारी से जुड़ी सामग्री उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन में मदद कर रही है।
उच्च शिक्षा संस्थानों के डिजिटलीकरण में भी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी देखी जा रही है। विश्वविद्यालयों के प्रबंधन के लिए बनाए गए समर्थ ई गवर्नेंस प्लेटफार्म पर महिला छात्रों के नामांकन की संख्या 1 करोड़ से अधिक हो गई है। वहीं, यहाँ पुरुष छात्रों का नामांकन लगभग 99 लाख है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय विश्वविद्यालय तेजी से डिजिटल कैंपस बन रहे हैं और इस बदलाव में छात्राओं की भागीदारी बढ़ रही है।
इसके अतिरिक्त, देश में 1.12 करोड़ से अधिक महिलाओं को अपनी शिक्षा के लिए डिजिटल पहचान भी प्राप्त हो चुकी है। एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट के माध्यम से छात्राएं अपनी पढ़ाई, कौशल प्रशिक्षण और अनुभव से जुड़े अकादमिक क्रेडिट सुरक्षित रख सकती हैं। इससे यदि किसी कारण से पढ़ाई में विराम आता है तो उन्हें फिर से शुरुआत नहीं करनी पड़ती और वे वहीं से आगे बढ़ सकती हैं जहाँ से उन्होंने छोड़ा था। इस प्रणाली में अंक-मान के प्रबंधन को सरल बनाया गया है।
विद्यार्थी अपने शैक्षणिक और कौशल आधारित कार्यक्रमों से प्राप्त अंक-मान को आसानी से देख और स्थानांतरित कर सकते हैं। हर विद्यार्थी को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाती है, जिसमें उसकी पढ़ाई से जुड़े सभी अभिलेख सुरक्षित रहते हैं। इससे उसकी शैक्षणिक प्रगति को समझना आसान हो जाता है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने महिला दिवस के अवसर पर कहा कि डिजिटल शिक्षा पहलों के माध्यम से महिलाओं को शिक्षा और करियर के नए अवसर मिल रहे हैं। मंत्रालय ने सभी से मिलकर काम करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर तथा समान अवसरों वाला भविष्य बनाने की अपील भी की।
इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, "नारी केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं, समाज और राष्ट्र की प्रगति की प्रेरक शक्ति भी है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। आइए, हम सब मिलकर हर बेटी, हर बहन और हर मां को सुरक्षित, सक्षम और स्वावलंबी बनाने के संकल्प को और सशक्त करें।"