26 जून 2026
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मणिपुर CM युमनाम खेमचंद सिंह ने कांग्ला किले से ड्रग-विरोधी मेगा रन को दिखाई हरी झंडी, युवाओं से की अपील

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मणिपुर CM युमनाम खेमचंद सिंह ने कांग्ला किले से ड्रग-विरोधी मेगा रन को दिखाई हरी झंडी, युवाओं से की अपील

सारांश

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने नशीली दवाओं के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर कांग्ला किले से 10 किमी मेगा रन को हरी झंडी दिखाई। 1,300 से अधिक प्रतिभागियों के साथ यह आयोजन उस राज्य में हुआ जहाँ 398 किमी की खुली म्यांमार सीमा ड्रग तस्करी की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 26 जून 2026 को कांग्ला किले , इम्फाल से 10 किलोमीटर की मेगा ड्रग-विरोधी जागरूकता दौड़ को हरी झंडी दिखाई।
दौड़ में 1,300 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी थीं; दौड़ चार श्रेणियों में आयोजित हुई।
डीजीपी मुकेश सिंह ने स्वयं 40-प्लस श्रेणी में दौड़ में भाग लिया और कहा कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई के लिए समाज की सामूहिक भागीदारी ज़रूरी है।
मणिपुर के पाँच जिलों की म्यांमार के साथ 398 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ वाली सीमा ड्रग तस्करी का प्रमुख मार्ग बनी हुई है।
गृह मंत्रालय ने भारत-म्यांमार सीमा के 50 किमी में बाड़बंदी पूरी की; अतिरिक्त 80 किमी में कार्य जारी है।
प्रत्येक श्रेणी में प्रथम, द्वितीय, तृतीय विजेताओं को क्रमशः ₹10,000 , ₹5,000 और ₹3,000 का पुरस्कार दिया जाएगा।

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 26 जून 2026 को नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर इम्फाल के ऐतिहासिक कांग्ला किले के पश्चिमी गेट से 10 किलोमीटर की मेगा जागरूकता दौड़ को हरी झंडी दिखाई। इस दौड़ में 1,300 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों — विशेषकर युवाओं — से नशीले पदार्थों से दूर रहने की अपील की।

मुख्य घटनाक्रम

यह कार्यक्रम 'विश्व ड्रग समस्या: बनी हुई समस्याएं, नई चुनौतियां, नए समाधान' थीम के अंतर्गत आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों सहित उपस्थित सभी लोगों को 'नशीली दवाओं को ना कहें' का संकल्प दिलाया और शपथ-पत्र पर हस्ताक्षर करवाए। उन्होंने ऊर्जावान युवाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त की।

कार्यक्रम में गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदस सिंह, मुख्य सचिव डॉ. पुनीत कुमार गोयल, वरिष्ठ सिविल और पुलिस अधिकारी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी शामिल हुए। मणिपुर पुलिस विभाग द्वारा आयोजित इस आयोजन में महिला प्रतिभागियों की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही।

सरकार की प्रतिबद्धता

कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री ने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट कर सरकार की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने लिखा, 'संदेश साफ है: जीवन को हां, नशीले पदार्थों को ना। मणिपुर सरकार रोकथाम, प्रवर्तन, पुनर्वास और जनभागीदारी के माध्यम से नशीले पदार्थों के दुरुपयोग और अवैध तस्करी से निपटने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।'

मणिपुर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मुकेश सिंह ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई अकेले पुलिस नहीं लड़ सकती — इसके लिए समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने स्वयं पुरुष 40-प्लस श्रेणी में 10 किलोमीटर की दौड़ में भाग लेकर विभाग की प्रतिबद्धता का व्यावहारिक संदेश दिया।

सीमा की चुनौती और भू-राजनीतिक संदर्भ

मणिपुर और पड़ोसी राज्य मिजोरम, म्यांमार के साथ लंबी और अधिकांशतः बिना बाड़ वाली अंतर्राष्ट्रीय सीमा के कारण पूर्वोत्तर भारत में ड्रग तस्करी के प्रमुख मार्गों में से एक बन गए हैं। राज्य के पाँच जिलों — चूराचांदपुर, तेंगनौपाल, चंदेल, कामजोंग और उखरुल — की म्यांमार के साथ 398 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ वाली सीमा है, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए निगरानी को अत्यंत कठिन बनाती है।

गौरतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट इन खुली सीमाओं का फायदा उठाकर भारत में नशीले पदार्थों और प्रतिबंधित सामग्री की तस्करी करते रहे हैं। यह ऐसे समय में और भी गंभीर हो गया है जब म्यांमार में चल रहे आंतरिक संघर्ष ने सीमा-पार आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया है।

नीति आयोग बैठक में उठाई माँगें

इस महीने की शुरुआत में नई दिल्ली में हुई नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में मुख्यमंत्री ने म्यांमार संघर्ष से उत्पन्न सुरक्षा चिंताओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बेहतर सीमा प्रबंधन, उन्नत निगरानी प्रणाली और केंद्रीय व राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि गृह मंत्रालय ने भारत-म्यांमार सीमा के 50 किलोमीटर हिस्से में बाड़ लगाने का कार्य पूरा कर लिया है, जबकि अतिरिक्त 80 किलोमीटर हिस्से में निर्माण जारी है।

दौड़ के पुरस्कार और आगे की राह

मेगा अवेयरनेस रन चार श्रेणियों में आयोजित हुई। प्रत्येक श्रेणी में प्रथम स्थान पर ₹10,000, द्वितीय पर ₹5,000 और तृतीय पर ₹3,000 का नकद पुरस्कार निर्धारित किया गया। इसके अलावा, चुने गए प्रतिभागियों को ₹1,000 का सांत्वना पुरस्कार भी दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य प्रशासन केंद्रीय एजेंसियों और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर ड्रग-विरोधी अभियानों को और सुदृढ़ करेगा, ताकि मणिपुर इस क्षेत्र में सीमा-पार अपराध के खिलाफ लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाता रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा 398 किलोमीटर की खुली म्यांमार सीमा पर है, जहाँ बाड़बंदी अभी भी अधूरी है। केवल 50 किमी में बाड़ पूरी होना और 80 किमी में काम जारी रहना बताता है कि तस्करी के रास्ते अभी भी बड़े पैमाने पर खुले हैं। जब तक सीमा प्रबंधन, पुनर्वास कार्यक्रम और सामुदायिक जागरूकता एक साथ नहीं चलते, जागरूकता दौड़ें प्रतीकात्मक बनकर रह जाती हैं। नीति आयोग की बैठक में उठाई गई माँगें सही दिशा में हैं — लेकिन केंद्र की प्रतिक्रिया और बजटीय आवंटन ही तय करेंगे कि यह अभियान नारे से नतीजे तक पहुँचता है या नहीं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर में ड्रग-विरोधी मेगा जागरूकता दौड़ कहाँ और कब आयोजित हुई?
यह दौड़ 26 जून 2026 को इम्फाल के ऐतिहासिक कांग्ला किले के पश्चिमी गेट से आयोजित की गई। नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इसे हरी झंडी दिखाई।
मणिपुर में ड्रग तस्करी की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
मणिपुर के पाँच जिलों — चूराचांदपुर, तेंगनौपाल, चंदेल, कामजोंग और उखरुल — की म्यांमार के साथ 398 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ वाली अंतर्राष्ट्रीय सीमा है। अंतर्राष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट इन खुली सीमाओं का फायदा उठाकर नशीले पदार्थों की तस्करी करते हैं, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती है।
भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़बंदी की क्या स्थिति है?
गृह मंत्रालय ने भारत-म्यांमार सीमा के 50 किलोमीटर हिस्से में बाड़ लगाने का काम पूरा कर लिया है, जबकि अतिरिक्त 80 किलोमीटर हिस्से में निर्माण कार्य जारी है। मुख्यमंत्री ने नीति आयोग की बैठक में इस कार्य में तेज़ी लाने और केंद्र-राज्य समन्वय बढ़ाने की माँग रखी थी।
मेगा अवेयरनेस रन में प्रतिभागियों को क्या पुरस्कार मिलेंगे?
चार श्रेणियों में आयोजित इस दौड़ में प्रत्येक श्रेणी के प्रथम विजेता को ₹10,000, द्वितीय को ₹5,000 और तृतीय को ₹3,000 का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा चुने गए प्रतिभागियों को ₹1,000 का सांत्वना पुरस्कार भी मिलेगा।
मणिपुर पुलिस महानिदेशक ने ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई पर क्या कहा?
डीजीपी मुकेश सिंह ने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई सिर्फ पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है और इसके लिए समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी ज़रूरी है। उन्होंने खुद 40-प्लस श्रेणी में 10 किलोमीटर की दौड़ में हिस्सा लेकर विभाग की प्रतिबद्धता का व्यावहारिक उदाहरण पेश किया।
राष्ट्र प्रेस
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