मन की बात के 134वें एपिसोड में PM मोदी ने गंगा डॉल्फिन रेस्क्यू की सराहना की, 13 घंटे चला अभियान
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 मई 2026 को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 134वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश में एक गंगा डॉल्फिन के सफल बचाव अभियान को प्रकृति संरक्षण का प्रेरणादायक उदाहरण बताया। यह अभियान लगभग 13 घंटे तक चला और अंततः डॉल्फिन को सुरक्षित बचाकर राप्ती नदी में छोड़ा गया।
मुख्य घटनाक्रम
मोदी ने बताया कि हाल ही में एक वीडियो व्यापक रूप से चर्चा में रहा, जिसमें बचाव दल के सदस्य अत्यंत धैर्य और सावधानी के साथ एक गंगा डॉल्फिन को बचाने में जुटे दिखे। उत्तर प्रदेश में यह डॉल्फिन एक नहर में फंस गई थी। बचाव दल ने डॉल्फिन को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला, उसकी चिकित्सकीय जांच की और उपचार के बाद उसे राप्ती नदी में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया।
मोदी ने कहा कि यह घटना केवल एक जीव को बचाने की कहानी नहीं, बल्कि प्रकृति और जैव विविधता के संरक्षण के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक है।
गंगा डॉल्फिन रेस्क्यू एम्बुलेंस की भूमिका
इस सफल अभियान में भारत की पहली गंगा डॉल्फिन रेस्क्यू एम्बुलेंस की निर्णायक भूमिका रही। 'नमामि गंगे' अभियान के तहत विकसित इस विशेष एम्बुलेंस को मौके पर भेजा गया। प्रधानमंत्री ने इसे एक चलते-फिरते अस्पताल की संज्ञा दी — इसमें डॉल्फिन को सुरक्षित रखने की विशेष व्यवस्था, ऑक्सीजन की सुविधा, विशेष स्ट्रेचर और आधुनिक बचाव उपकरण मौजूद हैं।
यदि कोई डॉल्फिन घायल हो जाए, नदी से कट जाए या किसी नहर में फंस जाए, तो यह एम्बुलेंस तत्काल सहायता पहुंचाने में सक्षम है। गौरतलब है कि गंगा डॉल्फिन को भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया है और यह प्रजाति संकटग्रस्त श्रेणी में आती है।
जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र पर जोर
मोदी ने कहा कि जब हम गंगा डॉल्फिन को बचाते हैं, तब हम केवल एक प्रजाति की रक्षा नहीं करते, बल्कि गंगा नदी की जैव विविधता और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करते हैं। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति की अनमोल धरोहर को सुरक्षित रखने का प्रयास है।
यह ऐसे समय में आया है जब गंगा की सफाई और उसके पारिस्थितिकी तंत्र के पुनरुद्धार पर सरकार का विशेष ध्यान केंद्रित है। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत नदी में डॉल्फिन की संख्या में वृद्धि को जल गुणवत्ता सुधार का सूचक माना जाता है।
मन की बात में अन्य विषय
इस एपिसोड में प्रधानमंत्री ने भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों, गर्मी के मौसम में पारंपरिक पेय पदार्थों के महत्व और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता जैसे विषयों पर भी चर्चा की।
संबोधन के अंत में उन्होंने देशवासियों की बचपन की उन यादों का जिक्र किया जो नदियों, तालाबों और कुओं से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि पानी से जुड़ी ये स्मृतियां जीवनभर मन में बसी रहती हैं और हमें प्रकृति से अपने संबंध को और मजबूत बनाने की प्रेरणा देती हैं।
आम जनता पर असर
मोदी ने नागरिकों से जल स्रोतों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील रहने का आह्वान किया। विशेषज्ञों के अनुसार, गंगा डॉल्फिन की उपस्थिति नदी की स्वच्छता का एक विश्वसनीय प्राकृतिक संकेतक है — जितनी अधिक डॉल्फिनें, उतना स्वस्थ नदी तंत्र। इस दृष्टि से रेस्क्यू एम्बुलेंस जैसी पहलें न केवल एक जीव को बचाती हैं, बल्कि नदी की समग्र सेहत के प्रति सामाजिक चेतना भी जगाती हैं।