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मथुरा की 5 विधानसभा सीटें 2027: भाजपा का दबदबा, 2022 के वोट अंतर से समझें पूरा समीकरण

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मथुरा की 5 विधानसभा सीटें 2027: भाजपा का दबदबा, 2022 के वोट अंतर से समझें पूरा समीकरण

सारांश

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मथुरा की सभी 5 सीटों पर भाजपा का कब्ज़ा है। 2022 में सबसे बड़ा अंतर मथुरा सीट पर 1,09,803 वोट का रहा, जबकि मांट सबसे कड़ी टक्कर वाली सीट थी। जाट-ब्राह्मण-ठाकुर-मुस्लिम समीकरण तय करेगा कि इस बार बाज़ी किसके हाथ।

मुख्य बातें

मथुरा जिले में कुल 5 विधानसभा सीटें हैं — छाता, मांट, गोवर्धन, मथुरा और बलदेव — सभी पर फिलहाल भाजपा के विधायक हैं।
मथुरा सीट पर श्रीकांत शर्मा ने 1,09,803 वोटों के सबसे बड़े अंतर से जीत दर्ज की; उन्हें 1,58,859 वोट मिले।
मांट सीट पर राजेश चौधरी की जीत का अंतर सबसे कम — मात्र 9,580 वोट — रहा, जो 2027 में सबसे प्रतिस्पर्धी सीट बन सकती है।
छाता से लक्ष्मी नारायण चौधरी ने 48,948 वोटों से जीत, गोवर्धन से मेघश्याम सिंह ने 42,507 वोटों से जीत दर्ज की।
बलदेव पर पूरन प्रकाश ने राष्ट्रीय लोकदल की बबीता देवी को 25,255 वोटों के अंतर से हराया।
मथुरा का चुनावी समीकरण मुख्यतः जाट, ब्राह्मण, ठाकुर और मुस्लिम मतदाताओं पर निर्भर करता है।

मथुरा की पाँचों विधानसभा सीटों पर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। ब्रज क्षेत्र के इस जिले में जाट, ब्राह्मण, ठाकुर और मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं और 2022 के परिणामों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सभी पाँच सीटें अपने नाम की थीं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का यह धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील जिला अब फिर से चुनावी चर्चा के केंद्र में है।

मथुरा की पाँच विधानसभा सीटें और वर्तमान विधायक

मथुरा जिले में कुल 5 विधानसभा क्षेत्र हैं — छाता, मांट, गोवर्धन, मथुरा और बलदेव। वर्तमान में छाता से लक्ष्मी नारायण चौधरी, मांट से राजेश चौधरी, गोवर्धन से मेघश्याम सिंह, मथुरा से श्रीकांत शर्मा और बलदेव से पूरन प्रकाश विधायक हैं — ये सभी भाजपा से हैं।

2022 के चुनाव परिणाम: सीटवार विश्लेषण

छाता सीट पर लक्ष्मी नारायण चौधरी ने 1,24,414 वोट पाकर राष्ट्रीय लोकदल के तेजपाल सिंह को 48,948 मतों के अंतर से हराया। तेजपाल सिंह को 75,466 वोट मिले थे। इस सीट पर कुल 12 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे।

मांट सीट पर भाजपा के राजेश चौधरी ने 83,958 वोट हासिल कर बहुजन समाज पार्टी (BSP) के श्याम सुंदर शर्मा (जिन्हें 74,378 वोट मिले) को 9,580 मतों के अंतर से पराजित किया। समाजवादी पार्टी (SP) के संजय लाठर 60,585 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। यह जिले की सबसे कड़ी टक्कर वाली सीट रही।

गोवर्धन सीट पर भाजपा के ठाकुर मेघश्याम सिंह ने 1,00,199 वोट पाकर BSP के राजकुमार रावत को 42,507 मतों के अंतर से शिकस्त दी। रावत को 57,692 वोट मिले। इस सीट पर कुल 13 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे।

मथुरा विधानसभा सीट पर भाजपा के श्रीकांत शर्मा ने 1,58,859 वोट पाकर जिले में सबसे बड़े अंतर — 1,09,803 मतों — से जीत दर्ज की। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) के प्रदीप माथुर 49,056 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि BSP और SP के प्रत्याशी क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर रहे।

बलदेव सीट पर भाजपा के पूरन प्रकाश को 1,08,414 वोट मिले और उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल की बबीता देवी (83,159 वोट) को 25,255 मतों के अंतर से हराया। इस सीट पर सबसे कम — केवल 6 प्रत्याशी — मैदान में थे।

जातीय समीकरण और चुनावी महत्व

मथुरा का चुनावी परिदृश्य जाट, ब्राह्मण, ठाकुर और मुस्लिम मतदाताओं के बीच संतुलन पर टिका है। गौरतलब है कि छाता और मांट सीटों पर जाट वोटर्स की संख्या निर्णायक मानी जाती है, जबकि मथुरा और गोवर्धन में ब्राह्मण और ठाकुर मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल — खासकर SP और कांग्रेस — 2022 की हार की समीक्षा कर 2027 की रणनीति बनाने में जुटे हैं।

2027 में क्या होगा आगे

भाजपा के लिए मांट सीट सबसे कमज़ोर कड़ी रही, जहाँ जीत का अंतर मात्र 9,580 वोट था। विश्लेषकों के अनुसार, राष्ट्रीय लोकदल और SP के बीच संभावित गठजोड़ इस बार कुछ सीटों पर मुकाबले को रोचक बना सकता है। भाजपा का रणनीतिक लक्ष्य सभी पाँच सीटों पर अपना दबदबा बनाए रखना होगा, जबकि विपक्ष के लिए एकजुट होकर जातीय समीकरण साधना बड़ी चुनौती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मांट जैसी सीट पर मात्र 9,580 वोट का अंतर यह भी बताता है कि यहाँ एकजुट विपक्ष खेल बदल सकता है। असली सवाल यह है कि क्या SP और राष्ट्रीय लोकदल जाट-मुस्लिम वोटों को फिर से एकत्रित कर पाएंगे, जो 2022 में बिखरे रहे। भाजपा के लिए श्रीकांत शर्मा की मथुरा सीट आराम का क्षेत्र है, पर छाता और बलदेव में भी विपक्ष की एकजुटता नतीजे बदल सकती है। 2027 में ब्रज क्षेत्र का चुनावी रण जातीय गठजोड़ और स्थानीय मुद्दों पर टिका होगा।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मथुरा जिले में कितनी विधानसभा सीटें हैं और कौन-कौन सी हैं?
मथुरा जिले में कुल 5 विधानसभा सीटें हैं — छाता, मांट, गोवर्धन, मथुरा और बलदेव। 2022 के चुनाव में इन सभी पाँचों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी।
2022 में मथुरा विधानसभा सीट पर कितने वोटों से भाजपा जीती थी?
2022 में मथुरा विधानसभा सीट पर भाजपा के श्रीकांत शर्मा ने 1,09,803 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। उन्हें 1,58,859 वोट मिले, जबकि दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस के प्रदीप माथुर को 49,056 वोट मिले थे।
2022 में मथुरा की सबसे कड़ी टक्कर वाली सीट कौन-सी रही?
2022 में मांट सीट सबसे कड़ी टक्कर वाली रही, जहाँ भाजपा के राजेश चौधरी ने बसपा के श्याम सुंदर शर्मा को केवल 9,580 वोटों के अंतर से हराया था। यह जिले में सबसे कम जीत के अंतर वाली सीट रही।
2027 में मथुरा के चुनावी समीकरण में कौन-से जातीय समूह अहम भूमिका निभाएंगे?
मथुरा का चुनावी ताना-बाना मुख्य रूप से जाट, ब्राह्मण, ठाकुर और मुस्लिम मतदाताओं पर निर्भर करता है। छाता और मांट सीटों पर जाट वोटर्स निर्णायक माने जाते हैं, जबकि मथुरा और गोवर्धन में ब्राह्मण और ठाकुर मतदाता महत्वपूर्ण हैं।
2022 में बलदेव और गोवर्धन सीटों पर भाजपा की जीत का अंतर कितना था?
बलदेव सीट पर भाजपा के पूरन प्रकाश ने राष्ट्रीय लोकदल की बबीता देवी को 25,255 वोटों के अंतर से हराया था। गोवर्धन सीट पर भाजपा के मेघश्याम सिंह ने बसपा के राजकुमार रावत को 42,507 मतों के अंतर से शिकस्त दी थी।
राष्ट्र प्रेस
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