मायावती का अखिलेश पर वार: 'पीडीए रथ' का भगवाकरण क्यों, मुसलमानों पर भरोसा उठा?
सारांश
मुख्य बातें
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 21 सितंबर 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए सपा के प्रचारित 'पीडीए रथ' के रंग को लेकर गंभीर सवाल उठाए। मायावती ने आरोप लगाया कि यह रथ सपा के अपने लाल रंग से कम और भारतीय जनता पार्टी (BJP) व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के भगवा रंग से अधिक प्रभावित दिखता है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या अखिलेश यादव का मुस्लिम मतदाताओं से वोट पाने का भरोसा अब कम हो गया है।
मायावती के सोशल मीडिया पोस्ट में क्या कहा
मायावती ने सोशल मीडिया पर सिलसिलेवार पोस्ट में लिखा, 'यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी हेतु समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख का प्रचारित 'पीडीए रथ' सपा के अपने लाल रंग का कम और आरएसएस/भाजपा के 'भगवा' रंग का (भगवाकरण) ज्यादा है, तो ऐसे में लोगों में चर्चा यही है कि यह सब उनका वोटों के स्वार्थ की खातिर गिरगिट की तरह लगातार रंग बदलना है या फिर मुसलमानों पर से सपा प्रमुख का वोट पाने का भरोसा उठ जाना है।'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं और विभिन्न दल अपने-अपने सामाजिक समीकरण साधने में जुटे हैं। गौरतलब है कि 'पीडीए' यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक गठजोड़ की अवधारणा को लेकर सपा और बसपा के बीच लंबे समय से राजनीतिक खींचतान चली आ रही है।
मुस्लिम मतदाताओं पर बसपा का दावा
मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुस्लिम समाज को यह 'कड़वी हकीकत' पूरी तरह से अहसास हो चुकी है कि पिछले चुनावों में सपा को एकतरफा वोट देने के बावजूद यह पार्टी BJP को सत्ता में आने से नहीं रोक पाई। उन्होंने दावा किया कि इसी कारण मुस्लिम समाज के एक वर्ग में सपा को बार-बार वोट देने पर सवाल उठ रहे हैं और उनका रुख बसपा की ओर तेज़ी से बदल रहा है।
उन्होंने लिखा, 'वे अपरकास्ट में से खासकर ब्राह्मण समाज की तरह ही अपना रवैया काफी तेजी से बीएसपी के पक्ष में बदल रहे हैं।' हालाँकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और इसे मायावती का राजनीतिक आकलन माना जाना चाहिए।
'पीडीए' की परिभाषा पर सीधा सवाल
बसपा प्रमुख ने 'पीडीए' के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर अखिलेश यादव पर करारा निशाना साधा। उनके अनुसार, सपा ने चुनावी स्वार्थ के मुताबिक अलग-अलग समय में 'पीडीए' की अलग-अलग व्याख्या की है। मायावती ने आरोप लगाया, 'कभी 'पीडी' को 'पिछड़ा, दलित' बताया, कभी 'पीडी' को 'पण्डित' बताया और कभी अपने आपको 'अम्बेडकरवादी' दर्शाने के चक्कर में बसपा का 'नीला' रंग वाला वस्त्र धारण कर तस्वीरें खिंचवाई, लेकिन लोगों ने फौरन ही फेक अम्बेडकरवादी कहकर रिजेक्ट भी कर दिया।'
यह ऐसे समय में आया है जब सपा उत्तर प्रदेश में 'पीडीए' को अपनी चुनावी रणनीति का आधार बना रही है, जिसमें पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं को एकजुट करने की कोशिश है।
बसपा का शासन रिकॉर्ड और 'सर्वजन' की नीति
मायावती ने अपनी पार्टी के शासनकाल का हवाला देते हुए कहा कि बसपा ने उत्तर प्रदेश में अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था और जनकल्याण के क्षेत्र में बेहतरीन शासन कई बार स्थापित कर दिखाया है। उन्होंने बसपा को 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' की नीति पर चलने वाली अम्बेडकरवादी पार्टी बताया।
उन्होंने कहा, 'बसपा समाज के सभी वर्गों के लिए रोटी, रोज़गार, आत्मसम्मान और स्वाभिमान के साथ जीवन जीने की पक्षधर है।' इसके ज़रिए उन्होंने सपा की 'पीडीए' अवधारणा को संकीर्ण बताते हुए बसपा को अधिक समावेशी विकल्प के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की।
क्या होगा आगे
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बसपा और सपा के बीच यह वाकयुद्ध दलित, पिछड़े और मुस्लिम मतदाताओं के ध्रुवीकरण की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। बसपा की यह रणनीति यह संकेत देती है कि वह अपने पारंपरिक दलित वोट बैंक के साथ-साथ मुस्लिम और ब्राह्मण मतदाताओं को पुनः जोड़ने की कोशिश कर रही है। सपा की ओर से इस हमले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।