22 अगस्त 2026
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मायावती का अखिलेश पर पलटवार: 'सपा गिरगिट की तरह रंग बदलती है', जयंत चौधरी वाले बयान पर मांगी माफी

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मायावती का अखिलेश पर पलटवार: 'सपा गिरगिट की तरह रंग बदलती है', जयंत चौधरी वाले बयान पर मांगी माफी

सारांश

मायावती ने अखिलेश यादव के 'चवन्नी से रुपया' वाले बयान को जाट समाज और चौधरी चरण सिंह के परिवार का अपमान बताया। 1993 के गठबंधन से लेकर 1995 के गेस्ट हाउस कांड तक का इतिहास दोहराते हुए उन्होंने सपा को 'गिरगिट' कहा — यूपी चुनाव से पहले यह वार महज़ बयानबाज़ी नहीं, रणनीतिक पुनर्स्थापन है।

मुख्य बातें

बसपा प्रमुख मायावती ने 22 अगस्त को एक्स पर पोस्ट कर अखिलेश यादव के 'चवन्नी से रुपया' वाले बयान की कड़ी निंदा की।
मायावती ने इस बयान को जाट समाज और स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह के परिवार का अपमान बताते हुए अखिलेश से तत्काल माफी माँगने की माँग की।
उन्होंने 1993 के सपा-बसपा गठबंधन के टूटने और 2 जून 1995 के लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड का हवाला दिया।
मायावती ने सपा पर 'गिरगिट की तरह रंग बदलने' का आरोप लगाया और पीडीए फॉर्मूले को राजनीतिक स्वार्थ की आड़ बताया।
बसपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सर्वसमाज से सपा को सत्ता से दूर रखने की अपील की।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने 22 अगस्त को समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव के उस बयान पर तीखा पलटवार किया, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के बारे में कहा था कि 'हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है।' मायावती ने इस बयान को 'पूर्णतः अमर्यादित, अशोभनीय व अति-शर्मनाक' करार देते हुए अखिलेश से माफी की माँग की।

मायावती का एक्स पर सीधा हमला

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए मायावती ने लिखा कि अखिलेश यादव का यह बयान न केवल आरएलडी और जयंत चौधरी का अपमान है, बल्कि स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह के परिवार और समूचे जाट समाज का भी अपमान है। उन्होंने कहा कि अखिलेश को इसके लिए तत्काल सार्वजनिक माफी माँगनी चाहिए।

मायावती ने सपा पर निशाना साधते हुए लिखा, 'यह पार्टी गठबंधन के मामले में केवल अपना काम निकालना जानती है, और अपना काम निकलते ही फिर यह पार्टी गिरगिट की तरह अपना रंग बदल लेती है तथा दूसरी पार्टी के बारे में अनाप-शनाप भाषा का भी खूब इस्तेमाल करती रहती है।'

1993 और गेस्ट हाउस कांड का जिक्र

मायावती ने सपा के साथ अपने पुराने कड़वे अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि 1993 में मुलायम सिंह यादव के साथ बना सपा-बसपा गठबंधन जल्द ही टूट गया था। इसके बाद 2 जून 1995 को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड हुआ, जिसे उन्होंने अपनी हत्या के षड्यंत्र का हिस्सा बताया। उन्होंने यह भी कहा कि बाद में अखिलेश यादव के साथ हुआ लोकसभा चुनावी गठबंधन भी सपा के 'अहंकारी व स्वार्थी रवैये' के कारण टूट गया।

पीडीए की राजनीति पर तंज

मायावती ने अखिलेश यादव के 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि सपा मुखिया अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए 'पी' को कभी पिछड़ा वर्ग, तो कभी पंडितों का हितकारी बताते हैं। उनके अनुसार, अखिलेश अपनी खुद की जाति के अलावा बाकी पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और ब्राह्मण समाज के भी हितैषी नहीं रहे हैं।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जोड़ा संदेश

मायावती ने अपनी पोस्ट के अंत में उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव का संदर्भ देते हुए सर्वसमाज से अपील की कि वे सपा को सत्ता में न आने दें। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की सरकारों में दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और ब्राह्मण समाज का शोषण हुआ, तथा कानून-व्यवस्था इतनी बिगड़ी कि 'दिन छिपने के बाद बहन-बेटियाँ घर से बाहर नहीं निकल सकती थीं।' यह टिप्पणी आगामी चुनावी मौसम में सपा-विरोधी मतदाताओं को एकजुट करने की रणनीति के रूप में देखी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और ऐसे में सपा पर हमला बोलना मायावती के लिए खुद को 'तीसरे विकल्प' के रूप में स्थापित करने का प्रयास भी है। 1995 के गेस्ट हाउस कांड का बार-बार ज़िक्र दर्शाता है कि यह राजनीतिक दरार कितनी गहरी और पुरानी है। असली सवाल यह है कि क्या मायावती की यह आक्रामकता उन्हें वोट दिलाएगी, या सपा-विरोधी मत भाजपा के पक्ष में ही जाएगा — जैसा अतीत में होता आया है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी के बारे में क्या कहा था जिस पर मायावती भड़कीं?
अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के बारे में कहा था कि 'हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है।' मायावती ने इस बयान को अमर्यादित, अशोभनीय और जाट समाज का अपमान बताया।
मायावती ने अखिलेश यादव से क्या माँग की है?
मायावती ने माँग की है कि अखिलेश यादव आरएलडी, जयंत चौधरी, स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह के परिवार और समूचे जाट समाज से तत्काल सार्वजनिक माफी माँगें। उन्होंने इस बयान को अहंकारी और अलोकतांत्रिक करार दिया।
मायावती ने 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड का ज़िक्र क्यों किया?
मायावती ने इसे सपा के 'अहंकारी स्वभाव' का ऐतिहासिक प्रमाण बताया। उनके अनुसार, 1993 में मुलायम सिंह यादव के साथ बना सपा-बसपा गठबंधन टूटने के बाद 2 जून 1995 को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस में उनकी हत्या के षड्यंत्र के तहत यह कांड हुआ था।
मायावती ने सपा के पीडीए फॉर्मूले पर क्या कहा?
मायावती ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव राजनीतिक स्वार्थ के लिए 'पी' को कभी पिछड़ा वर्ग तो कभी पंडितों का हितकारी बताते हैं। उनके अनुसार, सपा वास्तव में अपनी खुद की जाति के अलावा अन्य पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और ब्राह्मण समाज की हितैषी नहीं रही है।
यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्यों अहम है?
यूपी विधानसभा चुनाव से पहले यह बयानबाज़ी जाट, दलित और पिछड़े मतदाताओं को प्रभावित कर सकती है। मायावती की यह आक्रामकता सपा-विरोधी मतदाताओं को बसपा की ओर आकर्षित करने की कोशिश मानी जा रही है, जबकि आलोचकों का कहना है कि इसका लाभ अंततः भाजपा को मिल सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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