15 सितंबर 2026
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जयंत चौधरी का अखिलेश के 'चवन्नी' बयान पर पलटवार, एनडीए बोली — 2027 में भुगतेगी सपा

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जयंत चौधरी का अखिलेश के 'चवन्नी' बयान पर पलटवार, एनडीए बोली — 2027 में भुगतेगी सपा

सारांश

अखिलेश यादव के 'चवन्नी' तंज ने यूपी की सियासत में आग लगा दी। जयंत चौधरी ने गठबंधन के 'राज़ खोलने' की चेतावनी देकर पलटवार किया; एनडीए के तीन मंत्री एक साथ मैदान में उतरे। 2027 से पहले पश्चिमी यूपी के जाट मतदाताओं पर कब्ज़े की यह जंग और तीखी होने वाली है।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने रालोद पर तंज कसते हुए कहा — 'हम लोगों ने चवन्नी का रुपया बना दिया, फिर भी हमें छोड़कर चले गए।' जयंत चौधरी ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेतावनी दी — गठबंधन के राज़ खोले तो अखिलेश को यूपी में खड़े होने की जगह नहीं मिलेगी।
मंत्री ओमप्रकाश राजभर , अनिल राजभर और नरेंद्र कश्यप ने एनडीए की ओर से अखिलेश पर निशाना साधा।
अनिल राजभर ने कहा — 2027 के चुनाव में इस बयान का खामियाजा समाजवादी पार्टी को भुगतना पड़ेगा।
विवाद की जड़ में 2022 के बाद टूटा सपा-रालोद गठबंधन और पश्चिमी यूपी के जाट मतदाताओं पर दावेदारी है।

समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के 'चवन्नी' वाले बयान पर राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तीखा पलटवार किया। चौधरी ने चेतावनी दी कि यदि उन्होंने पुराने गठबंधन के राज़ खोले, तो अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश में खड़े होने की जगह नहीं मिलेगी। इस बयान के बाद यूपी की सियासत तेज़ गर्मी में आ गई और एनडीए के कई नेता एक साथ मैदान में उतर आए।

विवाद की जड़: अखिलेश का 'चवन्नी' तंज

दरअसल, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने रालोद और जयंत चौधरी पर तंज कसते हुए कहा था — 'हम लोगों ने चवन्नी का रुपया बना दिया, फिर भी हमें छोड़कर चले गए।' यह बयान पुराने सपा-रालोद गठबंधन के टूटने के संदर्भ में था। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और हर दल अपनी सियासी ज़मीन मज़बूत करने में जुटा है।

जयंत चौधरी की चेतावनी

केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने इस बयान को अपने परिवार का अपमान बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके पास गठबंधन के ऐसे 'पुराने राज़' हैं, जिन्हें उजागर करने पर अखिलेश यादव के लिए यूपी में राजनीतिक स्थान बचाना मुश्किल हो जाएगा। हालाँकि उन्होंने उन राज़ों का विस्तार नहीं किया, मगर इस अर्धस्पष्ट चेतावनी ने सियासी हलकों में हलचल ज़रूर मचा दी।

एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने जयंत चौधरी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि वे अखिलेश यादव के परिवार के निकट रहे हैं और 'पूरे घर का हाल जानते हैं।' उनका इशारा साफ था कि सपा के भीतरी मामलों की जानकारी रालोद के पास है।

मंत्री अनिल राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि जयंत चौधरी के परिवार का पूरा देश सम्मान करता है और उन्हें 'चवन्नी' जैसे शब्दों से अपमानित करना उचित नहीं। उन्होंने आगाह किया कि 2027 के चुनाव में इस बयान का खामियाजा समाजवादी पार्टी को भुगतना पड़ेगा।

मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि जयंत चौधरी के दादा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री रहे हैं — ऐसे परिवार को 'चवन्नी' कहना स्वाभाविक रूप से आक्रोश को जन्म देगा। कश्यप ने संकेत दिया कि जयंत चौधरी के पास सपा से जुड़े 'कुछ पुराने अनुभव' हैं जो राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकते हैं।

राजनीतिक संदर्भ और पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि रालोद और सपा ने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में गठबंधन करके चुनाव लड़ा था, किंतु वह साझेदारी बाद में टूट गई और जयंत चौधरी एनडीए के साथ आ गए। तब से दोनों दलों के बीच तल्खी बनी हुई है। अखिलेश यादव का 'चवन्नी' बयान इसी कड़वाहट की सार्वजनिक अभिव्यक्ति थी। यह यूपी की राजनीति में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट मतदाताओं को लेकर दोनों दलों के बीच जारी खींचतान का हिस्सा भी है, जिस पर रालोद पारंपरिक रूप से अपना दावा रखती है।

आगे क्या होगा

विश्लेषकों के अनुसार, जयंत चौधरी की 'राज़ खोलने' की अर्धस्पष्ट चेतावनी आने वाले हफ्तों में और तीखी बयानबाज़ी को जन्म दे सकती है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा और रालोद दोनों के लिए पश्चिमी यूपी की जाट-मुस्लिम समीकरण की लड़ाई निर्णायक रहेगी। यह विवाद उस बड़ी लड़ाई की शुरुआती झलक भर है जो अगले डेढ़ साल तक चलने वाली है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आत्मघाती बयानबाज़ी अधिक लगता है — क्योंकि इसने जयंत चौधरी को 'पीड़ित' की भूमिका में खड़ा कर दिया और एनडीए को एकजुट होने का मौका दे दिया। असली सवाल यह है कि जयंत चौधरी ने 'राज़ खोलने' की बात कही तो किस राज़ की ओर इशारा है — और वे उसे कभी सार्वजनिक करेंगे भी या नहीं, यह साफ नहीं है। पश्चिमी यूपी में जाट मतदाताओं पर रालोद की पकड़ 2022 के बाद कमज़ोर हुई है, इसलिए इस विवाद को हवा देना एनडीए की सुविचारित रणनीति भी हो सकती है। मुख्यधारा की कवरेज बयानबाज़ी पर केंद्रित है, लेकिन असली कहानी 2027 से पहले पश्चिमी यूपी के मतदाता समीकरणों को पुनर्गठित करने की कोशिश में है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव का 'चवन्नी' बयान क्या था?
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने रालोद और जयंत चौधरी पर तंज कसते हुए कहा था — 'हम लोगों ने चवन्नी का रुपया बना दिया, फिर भी हमें छोड़कर चले गए।' यह बयान 2022 के बाद टूटे सपा-रालोद गठबंधन के संदर्भ में था।
जयंत चौधरी ने इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
जयंत चौधरी ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चेतावनी दी कि यदि उन्होंने पुराने गठबंधन के राज़ उजागर किए, तो अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश में राजनीतिक रूप से खड़े होने की जगह नहीं मिलेगी। उन्होंने इसे अपने परिवार का अपमान बताया।
एनडीए के किन नेताओं ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी?
उत्तर प्रदेश के मंत्री ओमप्रकाश राजभर, अनिल राजभर और नरेंद्र कश्यप ने जयंत चौधरी के बयान का समर्थन करते हुए अखिलेश यादव पर निशाना साधा। अनिल राजभर ने कहा कि 2027 के चुनाव में इस बयान का खामियाजा समाजवादी पार्टी को भुगतना पड़ेगा।
सपा और रालोद का गठबंधन कब और क्यों टूटा?
सपा और रालोद ने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में गठबंधन कर चुनाव लड़ा था, लेकिन बाद में यह साझेदारी टूट गई और जयंत चौधरी एनडीए के साथ आ गए। तब से दोनों दलों के बीच तल्खी बनी हुई है।
इस विवाद का 2027 के यूपी चुनाव पर क्या असर पड़ सकता है?
2027 से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट मतदाताओं पर दावेदारी को लेकर सपा और रालोद के बीच यह तनाव और बढ़ सकता है। एनडीए नेताओं ने स्पष्ट किया है कि सपा को इस बयान का राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
राष्ट्र प्रेस
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