7 अगस्त 2026
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मेघालय: VPP का सचिवालय मार्च, 10 जन-मुद्दों पर MDA सरकार से जवाब की मांग

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मेघालय: VPP का सचिवालय मार्च, 10 जन-मुद्दों पर MDA सरकार से जवाब की मांग

सारांश

VPP का मेघालय सचिवालय मार्च विधानसभा सत्र से ठीक पहले MDA सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश था — लेकिन अनुमान से कम भीड़ और एक नेता द्वारा गलती से अपनी ही पार्टी की निंदा ने प्रदर्शन की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए।

मुख्य बातें

VPP ने 6 अगस्त को शिलांग में मेघालय सचिवालय तक विरोध मार्च निकाला।
पार्टी ने MDA सरकार से 10 जन-मुद्दों पर कार्रवाई की माँग की, जिनमें भर्ती समीक्षा, मूल निवासी अधिकार और अवैध कोयला खनन पर रोक शामिल हैं।
VPP का 1 लाख प्रतिभागियों का दावा था, लेकिन वास्तविक संख्या अनुमान से कम रही।
मुख्यमंत्री कॉनराड के.
संगमा ने कहा कि 24-28 अगस्त के विधानसभा सत्र में मुद्दे उठाए जाएँ।
VPP नेता MDC पॉवेल सोखलेट ने गलती से अपनी ही पार्टी के खिलाफ नारे लगवाए, जिससे प्रदर्शन पर राजनीतिक बहस छिड़ गई।

वॉयस ऑफ द पीपल्स पार्टी (VPP) ने 6 अगस्त को शिलांग में मेघालय सचिवालय तक एक बड़ा विरोध मार्च निकाला और मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस (MDA) सरकार से 10 प्रमुख जन-मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की माँग की। पार्टी ने इसे राज्य के हालिया राजनीतिक इतिहास के सबसे बड़े जन-जमावड़ों में से एक बताया था, हालाँकि वास्तविक भागीदारी पार्टी के 1 लाख के अनुमान से कम रही।

मुख्य माँगें

VPP की माँगों में 'लुम पोंगडेंग' परियोजना को लागू करना और उस पर 'व्हाइट पेपर' जारी करना सबसे ऊपर है। इसके अलावा पार्टी ने डिस्ट्रिक्ट सिलेक्शन कमेटी (DSC), मेघालय पब्लिक सर्विस कमीशन (MPSC) और अन्य एजेंसियों के माध्यम से की गई भर्तियों की स्वतंत्र समीक्षा की माँग की है। मूल निवासियों के अधिकारों की सुरक्षा, प्रवासन को विनियमित करने और मूल निवासियों की पहचान के लिए कानून बनाना, स्ट्रीट वेंडर्स के अधिकारों की बहाली, तथा पारंपरिक ग्राम प्रमुखों और उनकी परिषदों को कानूनी मान्यता देना भी इन माँगों में शामिल है।

पर्यावरण और खनन पर दबाव

VPP ने कोक और सीमेंट उद्योगों पर सख्त नियामक ढाँचा लागू करने, नदियों और जल स्रोतों की रक्षा करने, अनियंत्रित रेत व पत्थर खनन पर रोक लगाने और जल स्रोतों में कचरा फेंकने पर प्रतिबंध की भी माँग की। पार्टी ने कथित तौर पर जारी अवैध कोयला खनन, उसके परिवहन और इस क्षेत्र में सक्रिय कथित सिंडिकेट के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की भी अपील की।

सरकार की प्रतिक्रिया

मार्च से पूर्व मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने सड़क पर प्रदर्शन की प्रासंगिकता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब विधानसभा का ऑटम सेशन 24 से 28 अगस्त के बीच होने वाला है, तो जन-मुद्दों को उठाने का सही लोकतांत्रिक मंच सदन ही है। संगमा ने दोहराया कि सरकार संवाद के लिए पूरी तरह तैयार है।

विरोध में शर्मनाक पल

मार्च के दौरान एक अजीब स्थिति भी उत्पन्न हुई। VPP नेता और MDC पॉवेल सोखलेट विरोधी दलों के खिलाफ नारे लगवा रहे थे, तभी उन्होंने गलती से VPP का नाम भी उन पार्टियों में शामिल कर लिया जिनकी निंदा की जा रही थी। भीड़ ने बिना रुके वे नारे दोहराए, जिससे यह संकेत मिला कि अनेक प्रतिभागियों को प्रदर्शन के उद्देश्य की पूरी जानकारी नहीं थी।

राजनीतिक संदर्भ

यह प्रदर्शन विधानसभा सत्र से तीन सप्ताह से भी कम समय पहले हुआ, जो इसके राजनीतिक समय को महत्त्वपूर्ण बनाता है। आलोचकों का कहना है कि इस घटनाक्रम ने मेघालय में बड़े पैमाने पर जन-लामबंदी की प्रभावशीलता और प्रतिभागियों को मुद्दों की जानकारी देने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आगामी विधानसभा सत्र में VPP के पास बहस, प्रश्न और प्रस्तावों के माध्यम से इन सभी मुद्दों को औपचारिक रूप से उठाने का अवसर होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अनुमान से कम भीड़ और नेता की सार्वजनिक चूक ने विपक्ष की संगठनात्मक क्षमता पर ही सवाल उठा दिए। मुख्यमंत्री संगमा का यह तर्क — कि विधानसभा ही सही मंच है — लोकतांत्रिक दृष्टि से ठोस है, लेकिन यह भी सच है कि सड़क पर दबाव अक्सर सदन में बहस को धार देता है। असली परीक्षा यह होगी कि VPP इन 10 माँगों को ऑटम सेशन में कितने प्रभावी ढंग से उठा पाती है — सड़क की ऊर्जा को संसदीय जवाबदेही में बदलना ही इस प्रदर्शन की असली सफलता होगी।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

VPP का मेघालय सचिवालय मार्च किस लिए निकाला गया?
VPP ने 6 अगस्त को शिलांग में MDA सरकार से 10 जन-मुद्दों पर कार्रवाई की माँग को लेकर यह मार्च निकाला। इन माँगों में भर्ती समीक्षा, मूल निवासी अधिकार, अवैध कोयला खनन पर रोक और पर्यावरण संरक्षण शामिल हैं।
VPP की 10 प्रमुख माँगें क्या हैं?
'लुम पोंगडेंग' परियोजना लागू करना, DSC और MPSC भर्तियों की स्वतंत्र समीक्षा, मूल निवासी अधिकारों की सुरक्षा, प्रवासन नियंत्रण कानून, स्ट्रीट वेंडर अधिकार, पारंपरिक ग्राम प्रमुखों को मान्यता, कोक-सीमेंट उद्योगों पर सख्त नियम, नदियों की सुरक्षा, अनियंत्रित खनन पर रोक और अवैध कोयला सिंडिकेट के विरुद्ध कार्रवाई इनमें शामिल हैं।
मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने मार्च पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने कहा कि जब विधानसभा का ऑटम सेशन 24 से 28 अगस्त के बीच होने वाला है, तो सड़क पर प्रदर्शन की जरूरत नहीं है। उन्होंने विधानसभा को जन-मुद्दों के लिए सही लोकतांत्रिक मंच बताया और संवाद के लिए तत्परता जताई।
मार्च में 'शर्मनाक पल' क्या था?
VPP नेता MDC पॉवेल सोखलेट विरोधी दलों के खिलाफ नारे लगवाते समय गलती से VPP का नाम भी उन पार्टियों में शामिल कर बैठे जिनकी निंदा की जा रही थी। भीड़ ने बिना रुके वे नारे दोहराए, जिससे प्रतिभागियों की जागरूकता पर सवाल उठे।
मेघालय विधानसभा का ऑटम सेशन कब होगा?
मेघालय विधानसभा का ऑटम सेशन 24 से 28 अगस्त के बीच निर्धारित है। इस सत्र में विपक्ष को बहस, सवालों और प्रस्तावों के माध्यम से इन सभी मुद्दों को औपचारिक रूप से उठाने का अवसर मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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