धारावी पुनर्विकास: गणेश नगर-मेघवाड़ी बेदखली में पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई — DRP का स्पष्टीकरण
सारांश
मुख्य बातें
धारावी पुनर्विकास परियोजना (DRP) और स्लम पुनर्वास प्राधिकरण ने 7 अगस्त 2026 को एक विस्तृत आधिकारिक बयान जारी कर यह स्पष्ट किया कि गणेश नगर-मेघवाड़ी के निवासियों को बिना पूर्व सूचना के नहीं हटाया गया। प्राधिकरण ने कहा कि 6 अगस्त को की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई महीनों तक चली कानूनी प्रक्रिया का अंतिम चरण थी, जिसमें सार्वजनिक नोटिस, व्यक्तिगत चेतावनियाँ, औपचारिक सुनवाई और काउंसलिंग शामिल थीं।
मुख्य घटनाक्रम
अप्रैल 2026 में, DRP ने सेक्टर-6 के निवासियों को एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर किराए के समझौते करने और मानसून से पहले जगह खाली करने का निर्देश दिया। इसके बाद सभी प्रभावित निवासियों को व्यक्तिगत रूप से औपचारिक बेदखली नोटिस भेजे गए।
6 जुलाई और 13 जुलाई को उन निवासियों के लिए विधिवत सुनवाई आयोजित की गई जिन्होंने आपत्तियाँ दर्ज कराई थीं। 28 जुलाई को तोड़फोड़ के सार्वजनिक नोटिस आधिकारिक रूप से चस्पा किए गए। इस प्रकार कार्रवाई से पहले निवासियों को कई सप्ताह की अतिरिक्त मोहलत दी गई।
तोड़फोड़ की कार्रवाई और स्वैच्छिक खाली करना
6 अगस्त को चिह्नित 16 ढाँचों/झोपड़ियों में से 12 निवासियों ने काउंसलिंग के बाद स्वेच्छा से जगह खाली कर दी। शेष 4 संरचनाओं के कब्जेदारों ने कानूनी नोटिस मानने से लगातार इनकार किया, जिसके बाद पुलिस की सहायता से उन्हें हटाया गया।
DRP के प्रशासनिक अधिकारी और तहसीलदार द्वारा जारी स्पष्टीकरण में कहा गया कि यह कार्रवाई बिना किसी पूर्व सूचना के नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित बहु-चरणीय प्रक्रिया के अंत में की गई।
परियोजना की आवश्यकता और व्यापक संदर्भ
प्राधिकरण ने बताया कि इन संरचनाओं को हटाना माहिम और माटुंगा रेलवे भूमि पर पुनर्वास निर्माण कार्य शुरू करने और बड़े सार्वजनिक व रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की एक अनिवार्य शर्त थी। यह ऐसे समय में आया है जब धारावी पुनर्विकास परियोजना अपने क्रियान्वयन के महत्वपूर्ण चरण में है।
गौरतलब है कि धारावी एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्तियों में से एक है और इसका पुनर्विकास वर्षों से राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र रहा है।
पुनर्वास लाभ और पात्रता
DRP ने स्पष्ट किया कि सभी प्रभावित परिवारों को किराए में सहायता प्रदान की जाती है, चाहे उनकी पात्रता का अंतिम निर्णय अभी बाकी हो। जिन निवासियों की पात्रता अभी तय नहीं हुई है, उन्हें सक्षम सरकारी अधिकारियों के समक्ष दस्तावेज़ सत्यापन पूरा करने के पर्याप्त अवसर दिए जाएंगे।
चेतावनी और आगे की राह
प्राधिकरण ने यह भी चेतावनी दी कि जो कब्जेदार उचित नोटिस और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद जगह खाली नहीं करते, वे कानून के तहत बेदखली के साथ-साथ किराया सहायता और पुनर्वास लाभ भी खो सकते हैं। आने वाले हफ्तों में माहिम और माटुंगा की रेलवे भूमि पर पुनर्वास निर्माण की गति तेज होने की उम्मीद है।