कांदिवली माथाडी भूमि विवाद: महाराष्ट्र सरकार ने जांच के आदेश दिए, 26,900 वर्ग मीटर ज़मीन वापस लेगी
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने 2 जुलाई 2026 को स्वीकार किया कि मुंबई के कांदिवली (पश्चिम) में 27 एकड़ माथाडी श्रमिक भूमि के हस्तांतरण और पुनर्विकास में शर्तों का गंभीर उल्लंघन हुआ है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विधानसभा में घोषणा की कि 26,900 वर्ग मीटर अतिरिक्त सरकारी भूमि को तत्काल वापस लिया जाएगा और मामले की व्यापक जांच कराई जाएगी।
मुख्य घटनाक्रम
विधानसभा में विधायक हारून खान द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न के जवाब में मंत्री बावनकुले ने बताया कि बोरीवली तालुका के सर्वेक्षण संख्या 149 के अंतर्गत यह 27 एकड़ भूमि मूल रूप से कपड़ा बाजार और दुकान बोर्ड को आवंटित की गई थी। बाद में इसे 'विशाल सह्याद्री सहकारी आवास समिति' को हस्तांतरित कर दिया गया।
इस व्यवस्था के तहत 11,254 वर्ग मीटर भूमि विशाल सोसाइटी को, 334 वर्ग मीटर एक गणेश मंदिर को, और 2,000 वर्ग मीटर रायत शिक्षण संस्था को दी गई। शेष 99,116 वर्ग मीटर भूमि विशाल सह्याद्री सोसाइटी को पट्टे पर दी गई।
उल्लंघन और वसूली
मंत्री ने बताया कि इस द्वितीय श्रेणी की भूमि को प्रथम श्रेणी में परिवर्तित करने के दौरान सरकार ने प्रीमियम के रूप में ₹42.07 करोड़ और स्टांप शुल्क के रूप में ₹74.09 करोड़ वसूल किए थे। निर्माण की समयसीमा में दी गई छूट, भूमि के व्यावसायिक उपयोग और बाद में हुए हस्तांतरणों से संबंधित उल्लंघन पाए गए हैं। इनमें से कुछ उल्लंघनों को नियमित करने के लिए पहले ही ₹21.67 करोड़ वसूल किए जा चुके हैं, फिर भी कानूनी और प्रक्रियात्मक अनियमितताएं बनी हुई हैं।
गौरतलब है कि 26,900 वर्ग मीटर भूमि को जिला कलेक्टर की पूर्व अनुमति के बिना डेवलपर के साथ समझौते में शामिल किया गया था, जिसे सरकार ने शर्तों का गंभीर उल्लंघन माना है।
जांच की समयसीमा
पुणे स्थित पंजीकरण महानिरीक्षक (IGR) अगले 15 दिनों के भीतर स्टांप शुल्क संबंधी अनियमितताओं की जांच करेंगे। निचले प्रशासनिक स्तरों पर किसी भी हेराफेरी का पूरा डेटा 7 से 15 दिनों में सरकार को प्राप्त होगा। जिला कलेक्टर को 26,900 वर्ग मीटर भूमि पर तत्काल कब्जा लेने के निर्देश जारी किए जाएंगे।
माथाडी श्रमिकों पर असर
स्थानीय विधायक योगेश सागर ने माथाडी श्रमिकों के लंबित आवास मुद्दे को उठाते हुए बताया कि लगभग 1,250 से 1,300 माथाडी श्रमिक परिवार यहां रहते हैं और कई श्रमिकों के बच्चों के आवेदन अभी भी लंबित हैं। उन्होंने मांग की कि 26,900 वर्ग मीटर अतिरिक्त भूमि पर माथाडी श्रमिकों के लिए मकान बनाए जाएं।
मंत्री बावनकुले ने आश्वासन दिया कि मौजूदा मकानों और आवास समितियों में रहने वाले आम नागरिकों और माथाडी श्रमिकों को पूर्ण सुरक्षा मिलेगी। सरकार इन जमीनों को 'फ्रीहोल्ड' का दर्जा देने की योजना बना रही है ताकि निवासियों को पूर्ण स्वामित्व अधिकार प्राप्त हो सकें।
सरकार की प्रतिक्रिया
मंत्री बावनकुले ने कहा, 'हम संबंधित संस्था और विधायक योगेश सागर के साथ बैठक करेंगे। यदि वास्तव में श्रमिकों के लिए 1,600 से 2,000 मकान बनाए जाने हैं, तो सरकार आवश्यक प्रीमियम वसूलने के बाद श्रमिकों के आवास के लिए वह जमीन आवंटित करने को पूरी तरह तैयार है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि डेवलपर को 'बिक्री घटक' मिलने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन मूल माथाडी श्रमिकों के हक के घरों पर कोई समझौता नहीं होगा। यह मामला आने वाले हफ्तों में जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद और अधिक स्पष्ट होगा।