17 अगस्त 2026
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कांदिवली माथाडी भूमि विवाद: महाराष्ट्र सरकार ने जांच के आदेश दिए, 26,900 वर्ग मीटर ज़मीन वापस लेगी

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कांदिवली माथाडी भूमि विवाद: महाराष्ट्र सरकार ने जांच के आदेश दिए, 26,900 वर्ग मीटर ज़मीन वापस लेगी

सारांश

मुंबई के कांदिवली में माथाडी श्रमिकों की 27 एकड़ भूमि के पुनर्विकास में गंभीर उल्लंघन — महाराष्ट्र सरकार ने 26,900 वर्ग मीटर ज़मीन वापस लेने और 15 दिन में IGR जांच के आदेश दिए। 1,250 से 1,300 श्रमिक परिवारों के आवास अधिकार अब भी दांव पर।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र सरकार ने 2 जुलाई 2026 को स्वीकार किया कि कांदिवली (पश्चिम) में 27 एकड़ माथाडी भूमि के हस्तांतरण में शर्तों का उल्लंघन हुआ।
26,900 वर्ग मीटर अतिरिक्त सरकारी भूमि — जो बिना कलेक्टर की अनुमति के डेवलपर समझौते में शामिल की गई — तत्काल वापस ली जाएगी।
सरकार ने भूमि रूपांतरण पर ₹42.07 करोड़ प्रीमियम और ₹74.09 करोड़ स्टांप शुल्क वसूल किए थे; उल्लंघनों के लिए ₹21.67 करोड़ अलग से वसूले गए।
पुणे स्थित पंजीकरण महानिरीक्षक (IGR) 15 दिनों में स्टांप शुल्क अनियमितताओं की जांच करेंगे।
लगभग 1,250 से 1,300 माथाडी श्रमिक परिवार प्रभावित क्षेत्र में रहते हैं; सरकार भूमि को 'फ्रीहोल्ड' दर्जा देने की योजना बना रही है।
राजस्व मंत्री बावनकुले ने आश्वासन दिया कि मूल माथाडी श्रमिकों के आवास अधिकारों पर कोई समझौता नहीं होगा।

महाराष्ट्र सरकार ने 2 जुलाई 2026 को स्वीकार किया कि मुंबई के कांदिवली (पश्चिम) में 27 एकड़ माथाडी श्रमिक भूमि के हस्तांतरण और पुनर्विकास में शर्तों का गंभीर उल्लंघन हुआ है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विधानसभा में घोषणा की कि 26,900 वर्ग मीटर अतिरिक्त सरकारी भूमि को तत्काल वापस लिया जाएगा और मामले की व्यापक जांच कराई जाएगी।

मुख्य घटनाक्रम

विधानसभा में विधायक हारून खान द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न के जवाब में मंत्री बावनकुले ने बताया कि बोरीवली तालुका के सर्वेक्षण संख्या 149 के अंतर्गत यह 27 एकड़ भूमि मूल रूप से कपड़ा बाजार और दुकान बोर्ड को आवंटित की गई थी। बाद में इसे 'विशाल सह्याद्री सहकारी आवास समिति' को हस्तांतरित कर दिया गया।

इस व्यवस्था के तहत 11,254 वर्ग मीटर भूमि विशाल सोसाइटी को, 334 वर्ग मीटर एक गणेश मंदिर को, और 2,000 वर्ग मीटर रायत शिक्षण संस्था को दी गई। शेष 99,116 वर्ग मीटर भूमि विशाल सह्याद्री सोसाइटी को पट्टे पर दी गई।

उल्लंघन और वसूली

मंत्री ने बताया कि इस द्वितीय श्रेणी की भूमि को प्रथम श्रेणी में परिवर्तित करने के दौरान सरकार ने प्रीमियम के रूप में ₹42.07 करोड़ और स्टांप शुल्क के रूप में ₹74.09 करोड़ वसूल किए थे। निर्माण की समयसीमा में दी गई छूट, भूमि के व्यावसायिक उपयोग और बाद में हुए हस्तांतरणों से संबंधित उल्लंघन पाए गए हैं। इनमें से कुछ उल्लंघनों को नियमित करने के लिए पहले ही ₹21.67 करोड़ वसूल किए जा चुके हैं, फिर भी कानूनी और प्रक्रियात्मक अनियमितताएं बनी हुई हैं।

गौरतलब है कि 26,900 वर्ग मीटर भूमि को जिला कलेक्टर की पूर्व अनुमति के बिना डेवलपर के साथ समझौते में शामिल किया गया था, जिसे सरकार ने शर्तों का गंभीर उल्लंघन माना है।

जांच की समयसीमा

पुणे स्थित पंजीकरण महानिरीक्षक (IGR) अगले 15 दिनों के भीतर स्टांप शुल्क संबंधी अनियमितताओं की जांच करेंगे। निचले प्रशासनिक स्तरों पर किसी भी हेराफेरी का पूरा डेटा 7 से 15 दिनों में सरकार को प्राप्त होगा। जिला कलेक्टर को 26,900 वर्ग मीटर भूमि पर तत्काल कब्जा लेने के निर्देश जारी किए जाएंगे।

माथाडी श्रमिकों पर असर

स्थानीय विधायक योगेश सागर ने माथाडी श्रमिकों के लंबित आवास मुद्दे को उठाते हुए बताया कि लगभग 1,250 से 1,300 माथाडी श्रमिक परिवार यहां रहते हैं और कई श्रमिकों के बच्चों के आवेदन अभी भी लंबित हैं। उन्होंने मांग की कि 26,900 वर्ग मीटर अतिरिक्त भूमि पर माथाडी श्रमिकों के लिए मकान बनाए जाएं।

मंत्री बावनकुले ने आश्वासन दिया कि मौजूदा मकानों और आवास समितियों में रहने वाले आम नागरिकों और माथाडी श्रमिकों को पूर्ण सुरक्षा मिलेगी। सरकार इन जमीनों को 'फ्रीहोल्ड' का दर्जा देने की योजना बना रही है ताकि निवासियों को पूर्ण स्वामित्व अधिकार प्राप्त हो सकें।

सरकार की प्रतिक्रिया

मंत्री बावनकुले ने कहा, 'हम संबंधित संस्था और विधायक योगेश सागर के साथ बैठक करेंगे। यदि वास्तव में श्रमिकों के लिए 1,600 से 2,000 मकान बनाए जाने हैं, तो सरकार आवश्यक प्रीमियम वसूलने के बाद श्रमिकों के आवास के लिए वह जमीन आवंटित करने को पूरी तरह तैयार है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि डेवलपर को 'बिक्री घटक' मिलने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन मूल माथाडी श्रमिकों के हक के घरों पर कोई समझौता नहीं होगा। यह मामला आने वाले हफ्तों में जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद और अधिक स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी अनियमितताएं 'बनी रहीं' — यह विरोधाभास जवाबदेही की सीमाओं को उजागर करता है। असली परीक्षा यह है कि 26,900 वर्ग मीटर वापस लेने के बाद वह ज़मीन वास्तव में 1,250 से 1,300 माथाडी परिवारों के लिए उपयोग होती है या फिर किसी नए 'प्रीमियम' के नाम पर डेवलपर के पास लौट जाती है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांदिवली माथाडी भूमि विवाद क्या है?
मुंबई के कांदिवली (पश्चिम) में 27 एकड़ भूमि, जो मूल रूप से माथाडी श्रमिकों के लिए आरक्षित थी, को 'विशाल सह्याद्री सहकारी आवास समिति' को हस्तांतरित किया गया और पुनर्विकास में शर्तों का उल्लंघन हुआ। महाराष्ट्र सरकार ने 2 जुलाई 2026 को इसे स्वीकार करते हुए जांच और 26,900 वर्ग मीटर भूमि वापस लेने के आदेश दिए।
सरकार कितनी ज़मीन वापस लेगी और क्यों?
सरकार 26,900 वर्ग मीटर अतिरिक्त भूमि वापस लेगी क्योंकि इसे जिला कलेक्टर की पूर्व अनुमति के बिना डेवलपर के साथ समझौते में शामिल किया गया था। राजस्व मंत्री बावनकुले ने इसे शर्तों का गंभीर उल्लंघन बताया और तत्काल कब्जे के निर्देश देने की बात कही।
माथाडी श्रमिकों को इस मामले में क्या सुरक्षा मिलेगी?
राजस्व मंत्री बावनकुले ने आश्वासन दिया कि मौजूदा मकानों में रहने वाले माथाडी श्रमिकों और आम नागरिकों को पूर्ण सुरक्षा दी जाएगी। सरकार इन जमीनों को 'फ्रीहोल्ड' दर्जा देने की योजना बना रही है ताकि निवासियों को पूर्ण स्वामित्व अधिकार मिल सकें।
इस मामले की जांच कब तक पूरी होगी?
पुणे स्थित पंजीकरण महानिरीक्षक (IGR) 15 दिनों के भीतर स्टांप शुल्क संबंधी अनियमितताओं की जांच करेंगे। निचले प्रशासनिक स्तरों पर हेराफेरी का पूरा डेटा 7 से 15 दिनों में सरकार को प्राप्त होने की उम्मीद है।
इस भूमि सौदे में कितना वित्तीय लेन-देन हुआ?
भूमि को द्वितीय श्रेणी से प्रथम श्रेणी में परिवर्तित करने पर सरकार ने ₹42.07 करोड़ प्रीमियम और ₹74.09 करोड़ स्टांप शुल्क वसूल किए। इसके अतिरिक्त, कुछ उल्लंघनों को नियमित करने के लिए ₹21.67 करोड़ अलग से वसूल किए जा चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
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