शिलांग-डॉकी सड़क पर बार-बार भूस्खलन: भाजपा ने मेघालय सरकार से विस्तृत जांच की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
मेघालय की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार की सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 22 जून 2026 को निर्माणाधीन शिलांग-डॉकी सड़क परियोजना पर बार-बार हो रहे भूस्खलनों की विस्तृत जांच की माँग की है। पार्टी ने इस महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचा गलियारे की सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थिरता को लेकर गहरी चिंता जताई है।
मुख्य घटनाक्रम
शिलांग में सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए मेघालय भाजपा के प्रवक्ता मारियाहोम खारक्रांग ने स्पष्ट किया कि रविवार को राजमार्ग पर आया भीषण भूस्खलन कोई एकाकी घटना नहीं थी। उन्होंने बताया कि परियोजना के विभिन्न हिस्सों में इससे पहले भी इसी प्रकार की घटनाएँ हो चुकी हैं।
खारक्रांग ने कहा, "इन घटनाओं के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू की जानी चाहिए। जांच के निष्कर्षों के आधार पर, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुधारात्मक उपाय किए जाने चाहिए।"
सुरक्षा और इंजीनियरिंग पर सवाल
भाजपा नेता के अनुसार, बार-बार होने वाले भूस्खलनों ने न केवल सड़क संपर्क को बाधित किया है, बल्कि ढलान की स्थिरता और परियोजना के समग्र कार्यान्वयन पर भी गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। खारक्रांग ने कहा कि परियोजना से जुड़े यात्रियों और श्रमिकों की सुरक्षा अधिकारियों की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि जांच के निष्कर्षों से यह निर्धारित करने में सहायता मिलेगी कि ये घटनाएँ भूवैज्ञानिक कारकों, निर्माण संबंधी खामियों, अपर्याप्त ढलान सुरक्षा उपायों या अन्य तकनीकी त्रुटियों का परिणाम हैं।
परियोजना का महत्व
शिलांग-डॉकी सड़क परियोजना मेघालय की सबसे महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। इसका उद्देश्य राज्य की राजधानी शिलांग और भारत-बांग्लादेश सीमा के निकट स्थित प्रमुख व्यापार एवं पर्यटन केंद्र डॉकी के बीच संपर्क को सुदृढ़ करना है। यह मार्ग सीमा पार व्यापार और पर्यटन दोनों के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मानसून में बढ़ता खतरा
भाजपा नेता ने परियोजना में शामिल एजेंसियों से आग्रह किया कि वे भूस्खलन के खतरे को कम करने के लिए सभी आवश्यक सावधानियाँ बरतें और वैज्ञानिक बचाव उपायों को अपनाएँ। उन्होंने विशेष रूप से मानसून के मौसम का उल्लेख किया, जब ऐसी घटनाएँ अधिक बारंबार होती हैं और जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
आगे क्या
बार-बार होने वाले भूस्खलनों ने स्थानीय निवासियों और यात्रियों के बीच चिंता की लहर पैदा कर दी है। अब सभी की नज़रें इस पर हैं कि मेघालय सरकार और संबंधित एजेंसियाँ भाजपा की जांच की माँग पर क्या रुख अपनाती हैं और परियोजना की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।