मृणाल ठाकुर ने श्रीमंत दगड़ूशेठ हलवाई गणपति मंदिर में बप्पा का दर्शन किया, जानिए इस मंदिर की अद्भुत विशेषताएँ
सारांश
Key Takeaways
- मृणाल ठाकुर ने गणपति के दर्शन किए।
- श्रीमंत दगड़ूशेठ हलवाई गणपति मंदिर की स्थापना 1893 में हुई थी।
- यह मंदिर पुणे के मुख्य क्षेत्र में स्थित है।
- गणेश चतुर्थी का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है।
- यह मंदिर भारतीय संस्कृति का प्रतीक है।
मुंबई, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अभिनेत्री मृणाल ठाकुर ने हिंदी, मराठी और तेलुगु फिल्म उद्योग में अपनी उत्कृष्ट अदाकारी के कारण एक विशेष पहचान बनाई है। मंगलवार को उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा किया, जिसमें वे देश के सबसे प्रसिद्ध और भव्य मंदिरों में से एक श्रीमंत दगड़ूशेठ हलवाई गणपति मंदिर में भगवान गणेश का दर्शन करती दिख रही हैं।
एक्ट्रेस ने बप्पा के साथ कुछ बेहद सुंदर तस्वीरें अपने प्रशंसकों के साथ साझा की हैं और उन्होंने कैप्शन में लिखा है, "पुण्यात आलो आणि बाप्पाचं दर्शन घेतलं नाही तर काय केलं?" अर्थात, अगर आप पुणे आए और भगवान गणेश के दर्शन नहीं किए, तो फिर क्या किया?
मृणाल ठाकुर के इस पोस्ट को उनके फैंस द्वारा बहुत पसंद किया जा रहा है। क्या आप इस प्राचीन और प्रसिद्ध श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर के बारे में जानते हैं? यदि नहीं, तो आइए हम आपको बताते हैं, यह मंदिर देश के सबसे धनी, प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मंदिरों में से एक है।
यह मंदिर महाराष्ट्र के पुणे के बुधवार पेठ क्षेत्र में, शनिवार वाडा के नज़दीक स्थित है। इस मंदिर की विरासत 125 वर्षों से अधिक पुरानी है। इसकी स्थापना 1893 में पुणे के एक प्रसिद्ध मिठाई विक्रेता, दगडूशेठ हलवाई और उनकी पत्नी लक्ष्मीबाई ने की थी।
दगडूशेठ हलवाई ने अपने बेटे की प्लेग महामारी में मृत्यु हो जाने के बाद गुरु माधवनाथ महाराज के कहने पर शहर के बीचोंबीच इस मंदिर का निर्माण किया। भगवान गणेश को समर्पित इस मंदिर की भव्यता और उनकी प्रतिमा का सौंदर्य अद्भुत है। यहाँ गणेश चतुर्थी का त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, जो विश्वभर में प्रसिद्ध है।
इस मंदिर में गणेश चतुर्थी का त्योहार पूरा 10 दिनों तक शानदार तरीके से मनाया जाता है, जिसमें शामिल होने के लिए देश-विदेश से भक्त और पर्यटक आते हैं।