मुगल रोड हादसा: वाहन नाले में गिरा, 2 की मौत और 2 लापता, खोज अभियान जारी
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर की मुगल रोड पर मंगलवार, 5 मई को एक दर्दनाक सड़क हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य व्यक्ति अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, लापता वाहन छत्तापानी इलाके के एक नाले में मिला, जिसे बाहर निकालने के बाद दो शव बरामद किए गए। पुंछ पुलिस ने बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान शुरू किया हुआ है।
मुख्य घटनाक्रम
अधिकारियों ने बताया कि चारों लोग सोमवार, 4 मई को मुगल रोड से यात्रा कर रहे थे, जब वे लापता हो गए। इसके बाद पुंछ पुलिस ने तत्काल खोज और बचाव अभियान चलाया। मंगलवार को तलाशी के दौरान लापता वाहन छत्तापानी क्षेत्र के एक नाले में मिला। वाहन को बाहर निकालने पर मौके से दो लोगों के शव बरामद हुए।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शेष दो लापता व्यक्तियों की तलाश अभी भी जारी है और उन्हें जल्द से जल्द ढूंढने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभियान आगे बढ़ने पर और जानकारी साझा की जाएगी।
भारी बर्फबारी बनी हादसे की पृष्ठभूमि
सोमवार और मंगलवार को पीर की गली क्षेत्र में हुई भारी बर्फबारी के कारण प्रशासन ने मुगल रोड पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी थी। यह हादसा ऐसे समय में हुआ जब सड़क आधिकारिक रूप से बंद थी, जिससे बचाव कार्य और भी चुनौतीपूर्ण हो गया।
गौरतलब है कि मुगल रोड बुफलियाज (पुंछ) से शोपियां जिले तक जाने वाला लगभग 84 किलोमीटर लंबा मार्ग है, जो पीर पंजाल दर्रे से होकर गुजरता है और समुद्र तल से लगभग 3,500 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग का एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग भी है।
मुगल रोड का ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्व
इतिहास में मुगल सम्राट अकबर ने कश्मीर विजय के बाद इस मार्ग को सुदृढ़ कर 'इम्पीरियल रोड' बनाया था, जो लाहौर से कश्मीर तक जाता था। आधुनिक समय में इसे मुगल रोड कहा जाता है। 1950 के दशक में इसे कश्मीर की अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए प्रस्तावित किया गया था।
1979 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने इस परियोजना को आगे बढ़ाया और इसका नाम 'मुगल रोड' रखा, किंतु आतंकवाद के कारण कार्य रुक गया। बाद में इस मार्ग पर बने बुफलियाज ब्रिज को आतंकवादियों ने उड़ा दिया था। वर्तमान निर्माण कार्य अक्टूबर 2005 में पुनः आरंभ हुआ था।
एक ट्रस्ट ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर निर्माण रोकने की माँग की थी, जिसमें हिरपोरा वन्यजीव अभयारण्य में मार्कोर बकरी जैसे लुप्तप्राय जीवों को नुकसान और सर्दियों में भारी बर्फबारी का हवाला दिया गया था। हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय ने शर्तों के साथ सड़क निर्माण की अनुमति प्रदान की।
आम जनता और यात्रियों पर असर
यह मार्ग बुफलियाज, चांदिमार्ग, चटापानी, पीर की गली, अलीबाद (पुंछ) और हिरपोरा (शोपियां) जैसे क्षेत्रों से होकर गुजरता है। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण यह मार्ग बार-बार बंद होता है, जिससे स्थानीय लोगों और यात्रियों की आवाजाही प्रभावित होती है।
क्या होगा आगे
अधिकारियों ने बताया कि लापता दोनों व्यक्तियों की तलाश के लिए खोज और बचाव अभियान निरंतर जारी है। अभियान में प्रगति के साथ-साथ नई जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। यह हादसा एक बार फिर इस ऊँचाई वाले मार्ग पर मौसम की विकटता और सुरक्षित यात्रा की चुनौतियों को उजागर करता है।